04/28/2026 | Press release | Distributed by Public on 04/28/2026 01:36
हिंद महासागर पोत (आईओएस सागर), आईएनएस सुनायना, 26 अप्रैल, 2026 को सिंगापुर के चांगी नौसेना अड्डे पर पहुंचा, जो महासागर(क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) की परिकल्पना के अंतर्गत चल रही आईओएस सागर तैनाती के दौरान उसका चौथा पोर्ट कॉल है।
16 मित्र विदेशी देशों (एफएफसी) के बहुराष्ट्रीय दल वाला यह पोत हिंद महासागर क्षेत्र में तैनात है और सिंगापुर पहुंचने से पहले माले, फुकेत और जकार्ता में बंदरगाहों पर रुक चुका है।
सिंगापुर पहुंचने पर पोत का गर्मजोशी से स्वागत किया गया, जिससे भारत-सिंगापुर के मजबूत समुद्री संबंधों की पुष्टि हुई। सिंगापुर में भारत की उच्चायुक्त डॉ. शिल्पक अंबुले ने जहाज पर सवार चालक दल से बातचीत की और सागर विजन के तहत समुद्री साझेदारी को मजबूत करने और अंतर-संचालनीयता को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका की सराहना की। आईएनएस सुनायना के कमान अधिकारी कमांडर सिद्धार्थ चौधरी ने क्रांजी युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और सिंगापुर गणराज्य नौसेना (आरएसएन) के 9वें फ्लोटिला के कमांडर कर्नल चुआह मेंग सून से मुलाकात कर समुद्री सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की।
इस यात्रा के दौरान, पोत स्कूली बच्चों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स सहित आगंतुकों के लिए खुला रहा, जिससे उन्हें समुद्र में जीवन का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हुआ। 27 अप्रैल, 2026 को, IOS SAGAR के चालक दल ने भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों के साथ मिलकर 'एक महासागर, एक मिशन' विषय पर आधारित एक दौड़ में भाग लिया, जिसका उद्देश्य समुद्री जागरूकता और एकता को बढ़ावा देना था।
यह जहाज पेशेवर और सामुदायिक स्तर पर कई तरह की बातचीत के माध्यम से राष्ट्रीय नौसेना (आरएसएन) के साथ जुड़ा हुआ है। आगामी गतिविधियों में आईओएस सागर के चालक दल द्वारा सिंगापुर में आरएसएन के नेविगेशन और डैमेज कंट्रोल सिमुलेटर, सूचना संलयन केंद्र और नौसेना संग्रहालय का दौरा शामिल है, जिससे सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्रीय समुद्री जागरूकता बढ़ेगी। इसके अलावा, आईओएस सागर पर मौजूद एक थिंक टैंक के कर्मियों के साथ बातचीत, एक संयुक्त योग सत्र और एक औपचारिक डेक रिसेप्शन हितधारकों के साथ जुड़ाव को और मजबूत करेंगे।
आईएनएस सुनायना 29 अप्रैल, 2026 को सिंगापुर से रवाना होने वाल है, जो हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सहयोग को मजबूत करने और सामूहिक सुरक्षा को बढ़ावा देने के अपने मिशन को जारी रखेगी।
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