08/12/2026 | Press release | Distributed by Public on 08/12/2026 06:40
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (इनईपी) 2020 बहुभाषावाद के महत्व को रेखांकित करती है और सभी भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने पर ज़ोर देती है। इनईपी 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप, भारत सरकार ने भारतीय भाषाओं में शिक्षा, संरक्षण और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग (एआई/एमएल) तकनीकों को अपनाकर इन प्रयासों को और बढ़ाया गया है। इनमें भारतीय भाषाओं में लार्ज लैंग्वेज मॉडल, अनुवाद टूल और भाषा-सक्षम डिजिटल सेवाओं का विकास शामिल है।
भारत सरकार ने BharatGen प्रोजेक्ट शुरू किया है, जो मल्टीमॉडल लार्ज लैंग्वेज मॉडल (एलएलएम) है। यह कुशल और समावेशी एआई समाधान विकसित करने पर केंद्रित है जो सभी 22 अनुसूचित भाषाओं का समर्थन करते हैं और मज़बूत डिजिटल एआई इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में सहायता करते हैं। BharatGen का संचालन आईआईटी बॉम्बे में किया जा रहा है, जहाँ भाषा तकनीकों का मुख्य विकास कार्य होता है। इस पहल को आईआईटी कानपुर, आईआईटी मद्रास, आईआईटी हैदराबाद, आईआईआईटी हैदराबाद, आईआईएम इंदौर और आईआईटी मंडी जैसे प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के समूह (कंसोर्टियम) के माध्यम से लागू किया जा रहा है।
इसके अलावा, भारतीय भाषाओं में कंटेंट के अनुवाद को आसान बनाने के लिए तकनीकी प्रगति में एआई-आधारित अनुवाद टूल का विकास शामिल है, जैसे कि अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) द्वारा 'अनुवादिनी' (ANUVADINI) और डिजिटल इंडिया प्रोग्राम के अंतर्गत 'भाषिणी' (BHASHINI) पहल।
'भाषिणी' ने 70 से अधिक अनुसंधान भागीदार संस्थानों के सहयोग से भारतीय भाषाओं के लिए अत्याधुनिक एआई मॉडल विकसित किए हैं। 'भाषिणी' प्लेटफ़ॉर्म 360 से अधिक एआई-आधारित भाषा मॉडलों का भंडार (रिपॉजिटरी) है। यह 22 से अधिक विशेष भाषा सेवाएँ प्रदान करता है। इन सेवाओं में ऑटोमैटिक स्पीच रिकग्निशन (एएसआर), मशीन ट्रांसलेशन (एमटी), टेक्स्ट-टू-स्पीच (टीटीएस), ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (ओसीआर) और ट्रांसलिट्रेशन शामिल हैं। डेटासेट कॉर्पस में 246 मिलियन समानांतर वाक्य जोड़े गए और 3.7 मिलियन मोनोलिंगुअल टेक्स्ट एंट्रीज़ शामिल हैं। सभी डेटासेट और मॉडल 'भाषिणी' प्लेटफ़ॉर्म या एआई कोश (AIKosh) प्लेटफ़ॉर्म पर 'डिजिटल इंडिया 'भाषिणी' डिवीज़न' अकाउंट के ज़रिए सबके लिए उपलब्ध हैं। इसके अलावा, 'नेशनल लैंग्वेज ट्रांसलेशन मिशन' 'भाषिणी' प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए सभी 22 अनुसूचित भाषाओं में बड़ी मात्रा में टेक्स्ट और स्पीच डेटा को डिजिटल बना रहा है। यह प्लेटफ़ॉर्म भीली और संथाली जैसी जनजातीय भाषाओं को भी सपोर्ट करता है।
इसके अलावा, शिक्षा मंत्रालय के अधीन काम करने वाले संस्थान केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान (सीआईआईएल) ने एनसीईआरटी के साथ मिलकर संथाली सहित कई जनजातीय भाषाओं में शुरुआती स्तर की किताबें (प्राइमर) और भाषाई डेटासेट तैयार किए हैं। इसके साथ ही, मातृभाषा-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए SWAYAM प्लेटफ़ॉर्म पर 12 सप्ताह का संथाली भाषा कोर्स भी शुरू किया गया है।
सीआईआईएल के प्रोजेक्ट 'लिंग्विस्टिक डेटा कंसोर्टियम फ़ॉर इंडियन लैंग्वेजेज़' (LDC-IL) के अंतर्गत, संथाली और मुंडारी जैसी जनजातीय भाषाओं के लिए भाषाई संसाधन विकसित किए गए हैं। संथाली के लिए उपलब्ध संसाधनों में 60 वक्ताओं की 50 घंटे की ऑडियो रिकॉर्डिंग वाला स्पीच डेटासेट शामिल है। इसके अलावा, भाषाई विशेषताओं और संरचनाओं को कवर करने वाले पैरेलल टेक्स्ट कॉर्पोरा (समानांतर पाठ संग्रह) भी तैयार किए गए हैं, जिनमें संथाली और मुंडारी में से प्रत्येक में 5,200 वाक्य शामिल हैं। LDC-IL ने भारतीय भाषाओं में अनुसंधान और विकास को सपोर्ट करने के लिए वेब-आधारित एप्लिकेशन और टूल भी विकसित किए हैं। इनमें से कई टूल, जो सीआईआईएल डेटा सेंटरों पर होस्ट किए गए हैं, ये 'मेधा भाषिका' वेबसाइट https://medha.ciil.org के ज़रिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
सीआईआईएल ने मुंडारी, खड़िया, हो-हिंदी, कुरुख, कोरवा (झारखंड और छत्तीसगढ़), भूमिज, संथाली-हिंदी और माल्टो जैसी कई भाषाओं में शुरुआती स्तर की किताबें भी तैयार की हैं। इसके अलावा, सीआईआईएल के 'भारतवाणी' पोर्टल पर संथाली भाषा से जुड़े कई तरह के संसाधन उपलब्ध हैं, जैसे भाषाकोश (भाषा सीखने का भंडार), ज्ञानकोश (विश्वकोश), पाठ्यपुस्तककोश (पाठ्यपुस्तकें) और शब्दकोश (डिक्शनरी)।
शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
*******
पीके/केसी/पीके