Amar Ujala Ltd

07/25/2026 | Press release | Distributed by Public on 07/25/2026 02:37

Crude Oil: लाल सागर और होर्मुज संकट, क्या देश में फिर बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम? जानिए ताजा हालात

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Crude Oil: लाल सागर और होर्मुज संकट, क्या देश में फिर बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम? जानिए ताजा हालात

Sat, 25 Jul 2026 10:31 AM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Sat, 25 Jul 2026 10:31 AM IST
सार

ईरान की ओर से बाब अल-मंदेब जलमार्ग बंद करने की तैयारी से वैश्विक तेल व्यापार पर संकट गहराया है। जानें कैसे लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य का दोहरा व्यवधान भारत की अर्थव्यवस्था, निर्यात और ईंधन की कीमतों को प्रभावित कर सकता है।

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होर्मुज के बाद अब लाल सागर संकट - फोटो : amarujala.com
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विस्तार

ईरान यमन के हूती विद्रोहियों के माध्यम से लाल सागर में बाब अल-मंदेब जलमार्ग बंद करने की तैयारी कर रहा है। यह कदम होर्मुज जलडमरूमध्य के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा व्यवधान पैदा कर सकता है। यदि ऐसा होता है, तो दुनिया के दो सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर एक साथ संकट आ जाएगा। ये मार्ग पश्चिम एशिया के ऊर्जा उत्पादकों को एशिया, यूरोप और अन्य देशों के ग्राहकों से जोड़ते हैं।

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होर्मुज के आसपास की बिगड़ती परिस्थितियों के बाद खाड़ी के तेल उत्पादक तेजी से लाल सागर की ओर मुड़ गए थे। इससे लाल सागर गलियारे से गुजरने वाले तेल की मात्रा में भारी वृद्धि हुई। केपलर सिग्नल ओशन के आंकड़ों के अनुसार, हाल के हफ्तों में लाल सागर से तेल का प्रेषण औसतन लगभग 40 लाख बैरल प्रति दिन रहा है। जून में बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाली कुल पेट्रोलियम मात्रा 74 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गई थी। यह मात्रा वैश्विक तेल उत्पादन का सात फीसदी है। भारत का अधिकांश अंतरराष्ट्रीय व्यापार समुद्री मार्ग पर निर्भर है। देश का 95 फीसदी व्यापार मात्रा के हिसाब से समुद्र के रास्ते होता है। मूल्य के हिसाब से भी लगभग 70 फीसदी व्यापार समुद्री परिवहन पर निर्भर करता है। भारत का लगभग आधा वस्तु निर्यात लाल सागर गलियारे से होता है। आयात के मोर्चे पर, लगभग 30 फीसदी व्यापार इसी मार्ग पर निर्भर है। यूरोपीय देशों के साथ भारत का 80 फीसदी व्यापार लाल सागर और स्वेज नहर से होता है।
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लाल सागर क्यों बनी ऊर्जा की जीवनरेखा?

होर्मुज जलडमरूमध्य के पास तनाव बढ़ने के बाद खाड़ी के तेल उत्पादकों ने लाल सागर को प्राथमिकता दी। इससे लाल सागर गलियारे से तेल की आवाजाही में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। केपलर सिग्नल ओशन के आंकड़ों के अनुसार, हाल के हफ्तों में लाल सागर से तेल का प्रेषण औसतन 40 लाख बैरल प्रतिदिन रहा। जून में बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाली कुल पेट्रोलियम मात्रा 74 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गई। यह आंकड़ा वैश्विक तेल उत्पादन का सात फीसदी है। यह मार्ग पश्चिम एशिया के ऊर्जा उत्पादकों को दुनिया के बड़े बाजारों से जोड़ता है।

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भारत पर क्या होगा इसका असर?

रिसर्च एंड इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर डेवलपिंग कंट्रीज के अनुसार, लाल सागर के लगातार बंद रहने से भारत को बड़ा नुकसान होगा। भारत को निर्यात के मोर्चे पर 30 अरब डॉलर तक का नुकसान हो सकता है। यह व्यवधान कृषि और कपड़ा जैसे प्रमुख क्षेत्रों को प्रभावित करेगा। रसायन, पेट्रोलियम उत्पाद और विनिर्माण आपूर्ति शृंखला उद्योग भी इससे अछूते नहीं रहेंगे। भारत का 95 फीसदी व्यापार समुद्री मार्ग से होता है, जिससे यह संकट और गंभीर हो जाता है। यूरोपीय देशों के साथ भारत का 80 फीसदी व्यापार इसी मार्ग पर निर्भर है।

क्या बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?

इस व्यवधान के कारण कच्चे तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। भारत के पास रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार हैं, जो अस्थायी व्यवधानों के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच प्रदान करते हैं। हालांकि, यदि लाल सागर और होर्मुज का दोहरा संकट लंबे समय तक बना रहा, तो सरकारी तेल कंपनियों पर लाभ अंतर का दबाव बढ़ेगा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें घरेलू अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित करेंगी। इससे पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और हवाई ईंधन की कीमतें बढ़ेंगी। माल ढुलाई लागत और अंततः खुदरा कीमतें भी प्रभावित होंगी, जिससे महंगाई बढ़ेगी। तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि विनिर्माण, कृषि और उपभोक्ता वस्तुओं में महंगाई को बढ़ावा देगी।

Amar Ujala Ltd published this content on July 25, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on July 25, 2026 at 08:37 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]