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08/05/2026 | Press release | Distributed by Public on 08/04/2026 19:34

Seven Years After Article 370: जम्मू-कश्मीर में सात साल बाद कैसे हैं हालात, अनुच्छेद 370 हटने से क्या बदला

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Seven Years After Article 370: जम्मू-कश्मीर में सात साल बाद कैसे हैं हालात, अनुच्छेद 370 हटने से क्या बदला?

Wed, 05 Aug 2026 06:44 AM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला। Published by: ज्योति भास्कर Updated Wed, 05 Aug 2026 06:44 AM IST
सार

Seven Years After Article 370: आज ही के दिन जम्मू-कश्मीर में लंबे समय से लागू संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधान हटाए गए थे। बीते सात वर्षों से जम्मू-कश्मीर एक केंद्र शासित प्रदेश है। केंद्र सरकार के फैसले के बाद पिछते सात वर्षों में हालात कितने बदले? अनुच्छेद 370 और आर्टिकल 35ए हटा जाने की वर्षगांठ पर लोगों की राय क्या है? जानिए इस खबर में

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जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के सात साल पूरे - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने बीते 12 साल के कार्यकाल में कई बड़े फैसले लिए हैं। पांच अगस्त, 2019 के दिन देश की संसद में एक ऐसा फैसला हुआ, जिसकी किसी को कानों-कान खबर नहीं थी। यहां तक की जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन राज्यपाल सत्यपाल मलिक (अब दिवंगत) ने भी बाद के दिनों में साक्षात्कारों के दौरान इस फैसले पर हैरानी जताई थी। दरअसल, आज ही के दिन जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले सांविधानिक प्रावधान- अनुच्छेद 370 और आर्टिकल 35 ए को निष्प्रभावी करने का फैसला लिया गया था। संसद में हंगामे के बावजूद केंद्रीय गृह मंत्री ने सरकार के दृढ़ इरादे जाहिर किए थे। लंबी चर्चा, विरोध और आपत्तियों के बाद संसद ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और आर्टिकल 35 ए को हटाने पर मुहर लगाई, जिसके बाद से आज तक जम्मू-कश्मीर एक केंद्र शासित प्रदेश के तौर पर अस्तित्व में है।
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जम्मू-कश्मीर को लेकर केंद्र सरकार के इस सात वर्ष पुराने फैसले पर आज भी क्यों होती है चर्चा? पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मसला बनाने पर क्यों अड़ा है? ऐसे वक्त में जब पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में वहां की सेना दमन कर रही है, भारत सरकार का रूख क्या है? पांच अगस्त के मौके पर आज एक बार फिर इतिहास के पन्नों के जरिए इन सवालों का जवाब तलाशती यह रिपोर्ट
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जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 रद्द: क्यों और कब लिया गया फैसला
तीन तलाक की तरह ही अनुच्छेद 370 का मसला भी भारत की आजादी के साथ ही शुरू हुआ था। 1948 में जम्मू-कश्मीर के राजा हरि सिंह ने भारत में विलय से पहले विशेषाधिकार की शर्त रखी थी। जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा होने के बाद भी अलग ही रहा। राज्य का अपना अलग संविधान बना। वहां भारत के कुछ ही कानून लागू होते थे। 2019 में चुनाव जीतने के बाद मोदी सरकार ने 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 खत्म कर दिया।

भारतीयों पर क्या असर: अब जम्मू-कश्मीर में भी केंद्र के सभी कानून लागू होते हैं। मनरेगा, शिक्षा के अधिकार को भी लागू किया गया। हालांकि, इस कानून के लागू होने के कुछ शुरुआती नकारात्मक असर भी देखने को मिले। कुछ राजनीतिक पार्टियों ने इसका बहिष्कार किया। वहीं, लंबे समय तक राज्य में इंटरनेट भी बैन रखा गया।

अनुच्छेद-370 हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर में क्या-क्या बदला?

1. कश्मीर में जगह-जगह तिरंगा फहरा रहा
सबसे बड़ा बदलाव यह आया कि अब कश्मीर में जगह-जगह तिरंगा फहराया जा रहा है। सरकारी भवनों से लेकर सहरद तक लहराता तिरंगा पाकिस्तान समेत दुनिया को संदेश दे रहा है। राष्ट्रीय पर्व पर गांव-गांव तिरंगा फहरने के साथ राष्ट्रगान गाया जाने लगा। पहले यहां तिरंगा उठाने से लोग घबराते थे।

2. अब पाकिस्तान परस्ती की आवाज नहीं उठती
पांच अगस्त 2019 के बाद हुर्रियत की ओर से कश्मीर के किसी कोने से पाकिस्तान परस्ती की आवाज नहीं उठी। हवा के बदले रुख को भांप अलगाववादी खेमे सैयद अली शाह गिलानी और मीरवाइज उमर फारूक की ओर से भी बंद का आह्वान नहीं किया गया। कुछ मौकों पर अलगाववादियों की ओर से बंद के पोस्टर चस्पा किए गए, लेकिन आम कश्मीरियों ने इसे कोई तवज्जो नहीं दी। युवाओं का अब पूरा ध्यान अपने करिअर पर है।

3. पाकिस्तान के इशारे पर काम करने वालों पर शिकंजा
बदलावों के बीच ही सरकार ने पाकिस्तान परस्त लोगों पर जबर्दस्त शिकंजा कसा। अलगाववादियों, आतंकवादियों से साठगांठ और पाकिस्तान के इशारे पर काम करने वाले सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त करना शुरू किया। इसी कड़ी में हिजबुल मुजाहिदीन सरगना सैयद सलाहुद्दीन के दो बेटों की सरकारी सेवा समाप्त कर दी गई। हिजबुल आतंकी के साथ गिरफ्तार डीएसपी दविंदर सिंह को भी बर्खास्त कर दिया गया।

4. आतंकियों का सफाया हो रहा
अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से लगभग हर दिन आतंकियों के लिए काल साबित हो रहा है। पिछले दो वर्षों में घाटी में 130 टॉप कमांडरों समेत 459 आतंकियों को मार गिराने में सुरक्षाबलों को सफलता प्राप्त हुई है। सुरक्षाबलों की सख्ती से 149 आतंकियों ने या तो सरेंडर किया है या वे जिंदा पकडे़ गए हैं।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की हेकड़ी निकली
दहशतगर्दों के खिलाफ सबसे ठोस और हालिया सैन्य कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर है। भारतीय सेना ने पहलगाम में पर्यटकों पर हुए कायराना आतंकी हमले के बाद मई 2025 में पाकिस्तान के भीतर बने आतंक के अड्डों को नेस्तनाबूद कर दिया।

5. पाकिस्तान की बौखलाहट भी जवाब दे गई
अनुच्छेद-370 हटने के बाद पाकिस्तान इतना बौखला गया कि सरहद पर हर रोज सीजफायर तोड़ने लगा। हालांकि, पाकिस्तान की यह हिमाकत डेढ़ साल में ही हांफ गई। पड़ोसी मुल्क की बौखलाहट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2018 में पाकिस्तान ने सीमा पर 1800 बार गोलाबारी की। अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटा तो पाकिस्तान ने सीजफायर को बड़े स्तर पर तोड़ा।

2019 में सरहद पर 3200 बार गोलाबारी की गई। इसमें से अगस्त 2019 से लेकर 31 दिसंबर 2019 तक ही 1400 बार सीजफायर का उल्लंघन किया गया। यही नहीं अगले साल 2020 में पाकिस्तान ने सारी हदें तोड़ दीं, 5100 साल बार गोलाबारी की गई।
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दिसंबर, 2023 में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने जम्मू-कश्मीर और संविधान के अनुच्छेद 370 पर अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा है कि 5 अगस्त 2019 का निर्णय वैध था और यह जम्मू कश्मीर के एकीकरण के लिए था।

ये भी पढ़ें- Article 370: कश्मीर में आतंकियों की ढाल खत्म; क्यों बोले कश्मीरी कि अंदर ही तैयार हो रहा था इस्लामिक स्टेट?

क्या है जम्मू-कश्मीर से जुड़ा इतिहास?
इतिहासकार प्रो. संध्या के मुताबिक, 'मार्च 1948 में, महाराजा ने शेख अब्दुल्ला के साथ प्रधानमंत्री के रूप में राज्य में एक अंतरिम सरकार नियुक्त की। जुलाई 1949 में, शेख अब्दुल्ला और तीन अन्य सहयोगी भारतीय संविधान सभा में शामिल हुए और जम्मू-कश्मीर की विशेष स्थिति पर बातचीत की, जिससे अनुच्छेद-370 को अपनाया गया।'

अनुच्छेद-370 के प्रावधान क्या थे?
1. इस अनुच्छेद में प्रावधान किया गया कि रक्षा, विदेश, वित्त और संचार मामलों को छोड़कर भारतीय संसद को राज्य में किसी कानून को लागू करने के लिए जम्मू-कश्मीर सरकार की मंजूरी की आवश्यकता होगी।

2. इसके चलते जम्मू और कश्मीर के निवासियों की नागरिकता, संपत्ति के स्वामित्व और मौलिक अधिकारों का कानून शेष भारत में रहने वाले निवासियों से अलग था। अनुच्छेद-370 के तहत, अन्य राज्यों के नागरिक जम्मू-कश्मीर में संपत्ति नहीं खरीद सकते थे। अनुच्छेद-370 के तहत, केंद्र को राज्य में वित्तीय आपातकाल घोषित करने की शक्ति नहीं थी।

3. अनुच्छेद-370 (1) (सी) में उल्लेख किया गया था कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 1 अनुच्छेद-370 के माध्यम से कश्मीर पर लागू होता है। अनुच्छेद 1 संघ के राज्यों को सूचीबद्ध करता है। इसका मतलब है कि यह अनुच्छेद-370 है जो जम्मू-कश्मीर राज्य को भारतीय संघ से जोड़ता है।

4. जम्मू और कश्मीर के तत्कालीन संविधान की प्रस्तावना और अनुच्छेद 3 में कहा गया था कि जम्मू और कश्मीर राज्य भारत संघ का अभिन्न अंग है और रहेगा। अनुच्छेद 5 में कहा गया कि राज्य की कार्यपालिका और विधायी शक्ति उन सभी मामलों तक फैली हुई है, जिनके संबंध में संसद को भारत के संविधान के प्रावधानों के तहत राज्य के लिए कानून बनाने की शक्ति है।

जम्मू-कश्मीर का संविधान 17 नवंबर 1956 को अपनाया गया और 26 जनवरी 1957 को लागू हुआ था। 5 अगस्त 2019 को भारत के राष्ट्रपति ने एक आदेश जारी करके जम्मू और कश्मीर के संविधान को निष्प्रभावी बना दिया था। इसे 'संविधान (जम्मू और कश्मीर के लिए आवेदन) आदेश, 2019 (सीओ 272)' नाम दिया गया था।

अनुच्छेद 370 के अलावा आर्टिकल-35ए कहां से आया?
जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के अलावा संविधान का आर्टिकल-35ए भी लागू था। ये भी भारत सरकार की ही देन था। यह आर्टिकल-35ए जम्मू-कश्मीर की विधानसभा को कुछ विशेष शक्तियां प्रदान करता था। कश्मीर के भारत में विलय के बाद शेख अब्दुला को वहां का अंतरिम प्रधानमंत्री बनाया गया था। 1952 में अब्दुला और तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के बीच दिल्ली में एक समझौता हुआ था। इसके बाद तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने अनुच्छेद-370(1)(डी) के तहत 14 मई, 1954 को एक आदेश पारित कर अनुच्छेद-35ए को लागू किया था। अनुच्छेद-35ए के तहत जम्मू-कश्मीर के लोगों को भूमि, कारोबार और रोजगार संरक्षण के विशेषाधिकार भी दिए गए। इससे राज्य में देश के दूसरे राज्यों के लोगों के लिए संपत्ति, कारोबार और रोजगार के अधिकार खत्म हो गए। हालांकि, इसे संसदीय प्रणाली के तहत संविधान संशोधन कर लागू नहीं किया गया था, इसलिए इसकी संवैधानिकता विवादित रही।
जब सिल्वर स्क्रीन पर आई अनुच्छेद 370 से जुड़ी फिल्म

फिल्म 'उरी- द सर्जिकल स्ट्राइक' का निर्देशन कर चुके आदित्य धर ने सत्य घटना पर आधारित एक और फिल्म 'आर्टिकल 370' का निर्माण फरवरी 2024 में किया। जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने की घटनाओं से आम जनता भली भांति परिचित हैं। लेकिन इस धारा को हटाने से पहले क्या-क्या तैयारियां हुई, वह सब इस फिल्म में दिखाया गया है। यह फिल्म जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निरस्त करने, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दोनों को केंद्र शासित प्रदेश घोषित करने के प्रधानमंत्री कार्यालय के टॉप सीक्रेट फैसले पर आधारित है।

Amar Ujala Ltd published this content on August 05, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on August 05, 2026 at 01:35 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]