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07/29/2026 | Press release | Distributed by Public on 07/29/2026 09:27

TMC में विवाद जारी: ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से जल्द फैसला मांगा, ऋतब्रत गुट ने अब तक जवाब क्यों नहीं दिया

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TMC में विवाद जारी: ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से जल्द फैसला मांगा, ऋतब्रत गुट ने अब तक जवाब क्यों नहीं दिया?

Wed, 29 Jul 2026 08:52 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Wed, 29 Jul 2026 08:52 PM IST
सार

तृणमूल कांग्रेस में असली पार्टी को लेकर चल रहे विवाद पर ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से जल्द फैसला लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि उनके गुट ने तय समय पर जवाब दे दिया था, लेकिन ऋतब्रत बनर्जी गुट दो बार समय बढ़ाने के बाद भी अपना पक्ष नहीं रख सका। चुनाव आयोग इस विवाद पर कब फैसला करेगा? दोनों गुटों के दावों में क्या अंतर है? आइए, विस्तार से पूरे मामले को समझते हैं...

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ममता बनर्जी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) में असली पार्टी को लेकर चल रहे विवाद के बीच पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से जांच जल्द पूरी करने की मांग की है। उन्होंने आयोग को नया पत्र भेजकर कहा कि उनके गुट ने तय समय के भीतर अपना जवाब दे दिया था, जबकि ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को दो बार समय बढ़ाने के बावजूद जवाब दाखिल नहीं किया गया। ममता बनर्जी ने आग्रह किया कि अब इस मामले में और देरी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इसका पश्चिम बंगाल की राजनीति पर गंभीर असर पड़ सकता है।

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ममता बनर्जी ने अपने पत्र में कहा कि चुनाव आयोग ने उनके गुट को 6 जुलाई 2026 तक जवाब देने का समय दिया था और उन्होंने समय सीमा के भीतर अपना पक्ष रख दिया। इसके बाद आयोग ने प्रतिद्वंद्वी गुट को पहले 10 जुलाई और फिर 25 जुलाई तक का अतिरिक्त समय दिया। ममता बनर्जी ने कहा कि दो बार समय बढ़ाने के बाद भी यदि कोई जवाब नहीं आया है तो यह माना जा सकता है कि उनके 6 जुलाई के पत्र में दिए गए सभी तथ्यों और दलीलों का प्रतिद्वंद्वी गुट के पास कोई जवाब नहीं है।
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क्या ममता बनर्जी ने प्रतिद्वंद्वी गुट पर गंभीर आरोप लगाए?

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि अतिरिक्त समय मिलने का इस्तेमाल ऋतब्रत बनर्जी और उनके सहयोगी अपने पक्ष को मजबूत दिखाने के लिए कथित तौर पर नए और गलत साक्ष्य तैयार करने में कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके गुट ने पहले ही प्रतिद्वंद्वी पक्ष के आरोपों का मजबूती से खंडन किया है और उन आरोपों में कोई दम नहीं है। इसलिए अब उन्हें और समय देना उचित नहीं होगा।

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चुनाव आयोग से ममता बनर्जी ने क्या मांग की?

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से कहा कि दोनों पक्षों के लिए समान अवसर होना चाहिए। उन्होंने आग्रह किया कि 25 जुलाई के बाद प्रतिद्वंद्वी गुट को कोई और समय नहीं दिया जाए। उनके अनुसार, मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़ा है और इसमें जल्द फैसला होना जरूरी है। उन्होंने पत्र में कहा कि न्याय तभी प्रभावी माना जाएगा, जब लोगों का उस पर भरोसा बना रहे। यदि बार-बार समय बढ़ाया जाएगा तो उस भरोसे पर असर पड़ेगा।

पूरा विवाद कैसे शुरू हुआ?

यह विवाद 2 जुलाई को चुनाव आयोग के पास पहुंचा, जब ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने खुद को तृणमूल कांग्रेस का "वास्तविक" संगठन बताते हुए आयोग से मान्यता देने की मांग की। इस गुट का दावा है कि 22 जून को आयोजित विशेष बैठक में संगठनात्मक बदलाव किए गए थे। इसके बाद चुनाव आयोग ने 2 जुलाई को दोनों पक्षों को पत्र भेजकर 6 जुलाई शाम 5:30 बजे तक जवाब मांगा था। ममता बनर्जी गुट ने समय पर जवाब दाखिल कर दिया, जबकि ऋतब्रत बनर्जी गुट ने पहले 10 जुलाई और फिर 25 जुलाई तक समय मांगा।

ममता बनर्जी गुट ने अपने जवाब में क्या कहा?

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने अपने जवाब में प्रतिद्वंद्वी गुट के दावों को पूरी तरह खारिज किया। गुट ने कहा कि एआईटीसी के संविधान के अनुसार पार्टी की सभी संगठनात्मक समितियां वर्ष 2027 तक वैध हैं। उन्होंने बताया कि आखिरी संगठनात्मक चुनाव वर्ष 2022 में हुए थे। इसलिए यह दावा कि समितियों का कार्यकाल 2025 में समाप्त हो गया, तथ्यात्मक और कानूनी रूप से सही नहीं है।

Amar Ujala Ltd published this content on July 29, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on July 29, 2026 at 15:28 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]