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09/24/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/24/2026 00:47

डोनाल्ड ट्रंप को झटका: व्हाइट हाउस से मीडिया बैन पर कोर्ट ने लगाई रोक, अमेरिकी प्रशासन को क्या आदेश दिया

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डोनाल्ड ट्रंप को झटका: व्हाइट हाउस से मीडिया बैन पर कोर्ट ने लगाई रोक, अमेरिकी प्रशासन को क्या आदेश दिया?

Thu, 24 Sep 2026 12:01 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Thu, 24 Sep 2026 12:01 PM IST
सार

अमेरिकी अदालत ने ट्रंप प्रशासन को सीएनएन, एमएस नाउ और पॉलिटिको के पत्रकारों की व्हाइट हाउस पहुंच बहाल करने का आदेश दिया है। तीनों संस्थानों ने प्रतिबंध को प्रेस की स्वतंत्रता के खिलाफ बताया था। प्रशासन ने राष्ट्रीय सुरक्षा और व्हाइट हाउस में प्रवेश को विशेषाधिकार बताया। आखिर ट्रंप ने इन संस्थानों की पहुंच क्यों रोकी थी? जज ने प्रशासन की कार्रवाई में ऐसी क्या कमी मानी कि पहुंच बहाल करनी पड़ी? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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व्हाइट हाउस में पत्रकारों की एंट्री रोकना ट्रंप प्रशासन को पड़ा भारी? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रंप प्रशासन और मीडिया संस्थानों के बीच चल रही खींचतान में गुरुवार को नया मोड़ आ गया। अमेरिकी संघीय न्यायाधीश टिमोथी केली ने ट्रंप प्रशासन को सीएनएन, एमएस नाउ और पॉलिटिको के पत्रकारों को व्हाइट हाउस में दोबारा प्रवेश देने का आदेश दिया। अदालत ने शुरुआती तौर पर माना कि तीनों मीडिया संस्थानों पर लगाया गया प्रतिबंध असंवैधानिक हो सकता है। यह मामला उस फैसले से जुड़ा है, जिसके तहत ट्रंप प्रशासन ने पिछले सप्ताह इन तीनों संस्थानों के पत्रकारों की व्हाइट हाउस पहुंच रोक दी थी। तीनों संस्थानों ने इसके खिलाफ अदालत का रुख किया था।

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ट्रंप प्रशासन ने इन तीनों मीडिया संस्थानों की पहुंच क्यों रोकी थी?

राष्ट्रपति ट्रंप ने 18 सितंबर को सोशल मीडिया के जरिए सीएनएन, एमएस नाउ और पॉलिटिको पर व्हाइट हाउस से प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। ट्रंप ने इन संस्थानों पर ऐसी खबरें प्रकाशित करने का आरोप लगाया था, जिन्हें वह गलत और झूठी रिपोर्टिंग मानते हैं। इसके बाद तीनों संस्थानों के पत्रकारों को व्हाइट हाउस परिसर में प्रवेश से रोका गया और उनके हार्ड प्रेस बैज निष्क्रिय कर दिए गए। इसके खिलाफ सीएनएन, एमएस नाउ और पॉलिटिको ने संघीय अदालत में मुकदमा दायर किया। उनका कहना था कि प्रशासन की कार्रवाई अमेरिकी संविधान के प्रथम संशोधन में दी गई प्रेस और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन करती है। तीनों संस्थानों ने यह भी कहा कि उनके प्रेस पास वापस लेने से पहले उन्हें उचित कानूनी प्रक्रिया का मौका नहीं दिया गया।

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जज ने प्रशासन की कार्रवाई पर क्या सवाल उठाए?

बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान न्यायाधीश टिमोथी केली ने इस बात पर सवाल उठाया कि पत्रकारों के प्रेस पास रद्द करने से पहले प्रशासन ने उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया था या नहीं। सुनवाई में उन्होंने संकेत दिया कि प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इसके बाद गुरुवार को उन्होंने तीनों संस्थानों के पत्रकारों की व्हाइट हाउस पहुंच बहाल करने का आदेश दिया। मुकदमा इन संस्थानों ने इस आधार पर दायर किया था कि उन्हें बिना उचित प्रक्रिया के व्हाइट हाउस से बाहर किया गया। तीनों मीडिया संस्थानों की ओर से वकील थियोडोर बुट्रॉस ने अदालत से तुरंत प्रेस पास बहाल करने की मांग की थी। उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई को विचारधारा या दृष्टिकोण के आधार पर भेदभाव बताया। दूसरी ओर, न्याय विभाग ने ट्रंप प्रशासन के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि व्हाइट हाउस में प्रवेश पत्रकारों का बिना शर्त अधिकार नहीं है।

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प्रशासन ने अदालत में अपनी कार्रवाई के बचाव में क्या कहा?

ट्रंप प्रशासन की ओर से अमेरिकी न्याय विभाग ने अदालत में कहा कि व्हाइट हाउस में प्रवेश एक विशेषाधिकार है, कोई असीमित अधिकार नहीं। विभाग ने यह भी तर्क दिया कि व्हाइट हाउस राष्ट्रपति का कार्यालय और निवास दोनों है और प्रशासन को वहां प्रवेश पाने वाले पत्रकारों के लिए कुछ मानक तय करने का अधिकार है। प्रशासन ने पत्रकारों की पहुंच सीमित करने के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का भी हवाला दिया। उसका कहना था कि पत्रकारों को दी गई पहुंच का इस्तेमाल संवेदनशील या गोपनीय जानकारी प्रकाशित करने के लिए किया गया। न्याय विभाग ने यह भी तर्क दिया कि राष्ट्रपति ओवल ऑफिस जैसे सीमित और संवेदनशील क्षेत्रों में पत्रकारों की पहुंच नियंत्रित कर सकते हैं। प्रशासन ने इस आरोप को भी खारिज किया कि प्रतिबंध ट्रंप की आलोचना करने वाली खबरों के जवाब में लगाया गया था। उसका कहना था कि अगर संबंधित मीडिया संस्थानों की आलोचनात्मक रिपोर्टिंग भी नहीं होती, तब भी प्रशासन यही कदम उठाता।

मीडिया संस्थानों ने प्रशासन के तर्क पर क्या कहा?

मीडिया संस्थानों की ओर से वकील थियोडोर बुट्रॉस ने प्रशासन के राष्ट्रीय सुरक्षा वाले तर्क पर भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि प्रशासन ने शुरुआत में प्रतिबंध को इन संस्थानों की रिपोर्टिंग और कथित गलत खबरों से जोड़कर बताया था, जबकि अदालत में बाद में राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रमुख वजह के तौर पर पेश किया गया। बुट्रॉस ने अदालत में कहा कि जिन रिपोर्टों को आधार बनाया जा रहा है, वे सामान्य पत्रकारिता के दायरे में आती हैं और केवल राष्ट्रीय सुरक्षा शब्द का इस्तेमाल करके प्रेस की पहुंच पर रोक नहीं लगाई जा सकती। तीनों संस्थानों ने अपने मुकदमे में प्रथम संशोधन के तहत मिले अधिकारों का हवाला दिया है। दूसरी ओर, न्याय विभाग का कहना है कि राष्ट्रपति को व्हाइट हाउस के कुछ हिस्सों में पत्रकारों की पहुंच नियंत्रित करने का अधिकार है। इस विवाद का केंद्र यही है कि सरकार को व्हाइट हाउस में पत्रकारों की पहुंच तय करने का अधिकार कहां तक है और क्या किसी मीडिया संस्थान की रिपोर्टिंग से असहमति के आधार पर उसकी पहले से मिली पहुंच छीनी जा सकती है।

कोर्ट के आदेश से क्या बदला और आगे क्या होगा?

अदालत के आदेश के बाद ट्रंप प्रशासन को सीएनएन, एमएस नाउ और पॉलिटिको के पत्रकारों की व्हाइट हाउस पहुंच बहाल करनी होगी। इस पूरे मामले में मुख्य सवाल प्रेस की स्वतंत्रता, पत्रकारों के संवैधानिक अधिकार और राष्ट्रपति के व्हाइट हाउस पहुंच नियंत्रित करने के अधिकार से जुड़ा है। घटनाक्रम को इस तरह समझा जा सकता है...

  • 18 सितंबर... ट्रंप ने तीनों मीडिया संस्थानों पर व्हाइट हाउस से प्रतिबंध लगाने की घोषणा की।
  • 19 सितंबर... तीनों संस्थानों के पत्रकारों को व्हाइट हाउस परिसर में प्रवेश से रोका गया और प्रेस पास निष्क्रिय किए गए।
  • 21 सितंबर... सीएनएन, एमएस नाउ और पॉलिटिको ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ संघीय अदालत में मुकदमा दायर किया।
  • 23 सितंबर... अदालत में सुनवाई हुई और जज ने पत्रकारों के प्रेस पास वापस लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
  • 24 सितंबर... न्यायाधीश टिमोथी केली ने तीनों संस्थानों के पत्रकारों की व्हाइट हाउस पहुंच बहाल करने का आदेश दिया।


इस आदेश के साथ फिलहाल प्रशासन और तीनों मीडिया संस्थानों के बीच चल रहा कानूनी विवाद एक नए चरण में पहुंच गया है। ट्रंप प्रशासन राष्ट्रीय सुरक्षा और व्हाइट हाउस में प्रवेश के अधिकार को आधार बना रहा है, जबकि मीडिया संस्थान प्रेस की स्वतंत्रता और उचित कानूनी प्रक्रिया के अधिकार की बात कर रहे हैं। अदालत का ताजा आदेश इसी टकराव के बीच आया है।

Amar Ujala Ltd published this content on September 24, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 24, 2026 at 06:47 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]