09/01/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/01/2026 03:30
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लॉगिन करेंराष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने सुभाष चंद्रा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में कार्रवाई की है। पांच न्यायाधीशों की पीठ ने इस व्यक्तिगत दिवाला मामले में शामिल सभी पक्षों को नोटिस जारी किए हैं। न्यायाधिकरण ने सुभाष चंद्रा को कार्यवाही लंबित रहने तक अपनी कोई भी संपत्ति बेचने से रोक दिया है। एनसीएलटी ने इसके साथ ही एस्सेल समूह के चेयरमैन सुभाष चंद्रा से जुड़े दिवालियापन मामले में अपने 25 अगस्त के आदेश पर रोक लगा दी है।
यह मामला एक व्यक्ति की वित्तीय देनदारियों से जुड़ा है। जब कोई व्यक्ति अपने ऋण चुकाने में असमर्थ होता है, तो वह व्यक्तिगत दिवाला प्रक्रिया में जा सकता है। एनसीएलटी ऐसे मामलों की सुनवाई करता है और समाधान प्रक्रिया की निगरानी करता है। इसका उद्देश्य लेनदारों को उनका बकाया दिलाना और देनदार को एक नई शुरुआत का अवसर देना है।
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में प्रमोटर की व्यक्तिगत दिवालिया योजना को लेकर बैंकों और प्रमोटर के बीच असहमति बनी हुई है। इस योजना के तहत वित्तीय लेनदार केवल 6.5 करोड़ रुपये की ही वसूली कर सकेंगे, जबकि बैंकों का कुल दावा 22,006.57 करोड़ रुपये की व्यक्तिगत गारंटियों से जुड़ा हुआ है। एचडीएफसी बैंक और एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस जैसे प्रमुख वित्तीय संस्थानों ने इस योजना का कड़ा विरोध किया है।