Amar Ujala Ltd

09/23/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/23/2026 11:04

ममता बनर्जी ने की दो बड़ी मांग, SIR पर क्या बोले अरविंद केजरीवाल


देश में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर सियासी घमासान और तेज हो गया है। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सीधा हमला बोला है। ममता ने मांग की है कि ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार किया जाना चाहिए और उनके कार्यकाल में SIR के बाद जिन राज्यों में चुनाव कराए गए, वहां चुनावी प्रक्रिया की समीक्षा कर जरूरत पड़ने पर दोबारा मतदान कराया जाना चाहिए।

ममता बनर्जी की यह प्रतिक्रिया उस रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें चुनाव आयोग के दो आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से आयोग की कुछ प्रक्रियाओं पर आपत्तियां उठाए जाने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने मतदाता जोड़ने, नाम हटाने और वोटर डेटा से जुड़े कुछ तकनीकी बदलावों को लेकर सवाल उठाए।

ममता बनर्जी ने वीडियो संदेश जारी कर कहा कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में जिन राज्यों में SIR के बाद चुनाव हुए, उन चुनावों को दोबारा कराया जाना चाहिए।

ममता का आरोप है कि SIR के जरिए मतदाता सूची में गड़बड़ियां की गईं और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हुई। उन्होंने चुनाव आयोग से पूरे मामले पर जवाब देने और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

ममता ने यह भी आरोप लगाया कि चुनावी मशीनरी पर राजनीतिक प्रभाव बढ़ रहा है। उनके मुताबिक, लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक प्रक्रियाओं की रक्षा जरूरी है। हालांकि, ये आरोप ममता बनर्जी के राजनीतिक दावे हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग मामलों में नहीं हुई है।

SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की रिपोर्ट ने राजनीतिक बहस को और बढ़ा दिया है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले करीब 10 महीनों में आयोग की कुछ प्रक्रियाओं पर कई बार आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें नए मतदाताओं को जोड़ने, मतदाता नाम हटाने और चुनावी सॉफ्टवेयर के संचालन से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।

एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आयुक्तों ने नए मतदाताओं के लिए Form 6 में किए गए बदलावों को लेकर भी आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, इस बदलाव में नए मतदाताओं से पिछले SIR से जुड़े परिवार के रिकॉर्ड के बारे में जानकारी मांगी गई थी। दोनों आयुक्तों ने इसे लेकर कानूनी और प्रशासनिक सवाल उठाए।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि मतदाता डेटाबेस और सॉफ्टवेयर से जुड़े अधिकारों के केंद्रीकरण को लेकर दोनों आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव तक अपनी आपत्तियां पहुंचाईं।

वहीं भारतीय जनता पार्टी ने SIR को लेकर विपक्ष के आरोपों पर पलटवार किया है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि वैचारिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने से पहले तथ्यों को देखना चाहिए।

भाजपा का कहना है कि विपक्ष चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक आरोप लगा रहा है। पात्रा ने चुनाव आयोग की ओर से जारी प्रेस नोट का हवाला देते हुए कहा कि आयोग ने अपने पक्ष में तथ्य और स्पष्टीकरण सार्वजनिक किए हैं।

इस पूरे विवाद में चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर विपक्ष और सत्तारूढ़ भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ता दिखाई दे रहा है। वहीं आयोग के भीतर कथित मतभेदों की रिपोर्ट ने बहस को नया आयाम दिया है।

SIR को लेकर ममता बनर्जी पहले भी चुनाव आयोग पर सवाल उठाती रही हैं। दिसंबर 2025 में उन्होंने आयोग से SIR प्रक्रिया में कथित खामियों को दूर करने या प्रक्रिया को रोकने की मांग की थी।

अब ताजा विवाद में ममता के साथ दूसरे विपक्षी नेताओं ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी और हाल के चुनावों को रद्द कर दोबारा चुनाव कराने की मांग की है।

यानी SIR अब सिर्फ मतदाता सूची के पुनरीक्षण का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसके साथ चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता डेटा के प्रबंधन और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

अब नजर इस बात पर है कि चुनाव आयोग इन आरोपों और रिपोर्टों पर क्या जवाब देता है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि चुनाव आयोग के भीतर उठाई गई आपत्तियों पर आगे क्या कार्रवाई होती है और SIR से जुड़े विवाद का न्यायिक या संवैधानिक स्तर पर क्या असर पड़ता है।

फिलहाल एक तरफ विपक्ष चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी तरफ भाजपा इन आरोपों को राजनीतिक हमला बता रही है। ऐसे में SIR विवाद आने वाले दिनों में चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर एक बड़ी राजनीतिक बहस का केंद्र बना रहेगा।

Amar Ujala Ltd published this content on September 23, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 23, 2026 at 17:05 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]