Ministry of Heavy Industries of the Republic of India

01/04/2026 | Press release | Distributed by Public on 01/04/2026 05:58

एडीए का दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्‍ठी ‘एयरोनॉटिक्स 2047’ बेंगलुरु में शुरू हुआ

रक्षा मंत्रालय

एडीए का दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्‍ठी 'एयरोनॉटिक्स 2047' बेंगलुरु में शुरू हुआ

प्रविष्टि तिथि: 04 JAN 2026 3:41PM by PIB Delhi

एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी 'एयरोनॉटिक्स 2047' का शुभारंभ 4 जनवरी, 2026 को बेंगलुरु स्थित सेंटर फॉर एयरबोर्न सिस्टम्स (सीएबीएस) में हुआ। संगोष्ठी का उद्घाटन वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने किया। अपने संबोधन में वायुसेना प्रमुख ने लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस के 25 वर्ष पूरे होने पर एडीए को बधाई दी और आज के निरंतर बदलते समय में भारतीय वायु सेना (आईएएफ) को परिचालन रूप से तैयार रखने के लिए सुपुर्दगी की समयसीमा का पालन करने की आवश्यकता पर बल दिया।

इस अवसर पर बोलते हुए, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए स्वदेशी अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के विकास के महत्व पर जोर दिया जिससे 2047 तक विकसित भारत के परिकल्‍पना को साकार किया जा सके।

इस संगोष्‍ठी में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ, औद्योगिक भागीदार, शिक्षाविद, विमानन क्षेत्र के अग्रणी और एयरोस्पेस क्षेत्र के वक्ता एक साथ आए हैं ताकि वे वैमानिकी के विकास, डिजाइन नवाचार, विनिर्माण और भविष्य की संभावनाओं पर अपने विचार साझा कर सके। एयरोनॉटिक्स-2047 का मुख्य उद्देश्य आधुनिक एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों के विभिन्न पहलुओं का पता लगाना है, जिनमें अगली पीढ़ी के विमानों के लिए विनिर्माण और असेंबली, डिजिटल विनिर्माण, अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के लिए वायुगतिकी, प्रणोदन प्रौद्योगिकियां, उड़ान परीक्षण तकनीकें, डिजिटल ट्विन प्रौद्योगिकी, प्रमाणन चुनौतियां, उड़ान नियंत्रण प्रणाली और एवियोनिक्स, लड़ाकू विमानों में रखरखाव संबंधी चुनौतियां, विमान डिजाइन में एआई और एक्चुएटर्स के लिए सटीक विनिर्माण शामिल हैं।

इस संगोष्‍ठी में भारतीय अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के भविष्य और एलसीए तेजस के प्रारंभिक डिजाइन से लेकर स्क्वाड्रन में शामिल होने तक के सफर पर चर्चा की जाएगी। एडीए ने एलसीए तेजस को डिजाइन और विकसित किया है। इसके 5,600 से अधिक सफल उड़ान परीक्षण हो चुके हैं। इस कार्यक्रम में सरकारी प्रयोगशालाओं, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों सहित 100 से अधिक डिजाइन कार्य केंद्र शामिल थे। एलसीए को चौथी पीढ़ी का लड़ाकू विमान बनाने के लिए कार्बन कंपोजिट, हल्के पदार्थ, फ्लाई-बाय-वायर फ्लाइट कंट्रोल, डिजिटल यूटिलिटी मैनेजमेंट सिस्टम, ग्लास कॉकपिट आदि जैसी कई विशिष्ट प्रौद्योगिकियों का विकास किया गया।

एलसीए एमके1ए स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित लड़ाकू विमान का एक उन्नत संस्करण है और यह भारतीय वायु सेना की परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक शक्तिशाली मंच के रूप में कार्य करेगा। एलसीए एमके II और एलसीए नेवी पर वर्तमान में कार्य चल रहा है। संगोष्‍ठी के दौरान, तेजस कार्यक्रम से जुड़े प्रतिष्ठित और प्रसिद्ध वक्ताओं द्वारा तकनीकी वार्ता की एक श्रृंखला प्रस्तुत की जाएगी।

भारत को एलसीए तेजस के विकास से अपार लाभ हुआ है क्योंकि अब उसके पास स्वदेशी रूप से लड़ाकू विमान बनाने की क्षमता और सामर्थ्य दोनों हैं। एलसीए कार्यक्रम सबसे सफल स्वदेशी रक्षा कार्यक्रमों में से एक है जिसके माध्यम से भारतीय वायु सेना को असाधारण वायु श्रेष्ठता वाला लड़ाकू विमान प्राप्त हुआ। अब तक, 38 विमान (32 लड़ाकू विमान और 6 प्रशिक्षण विमान) भारतीय वायु सेना के दो स्क्वाड्रनों में शामिल किए जा चुके हैं।

संगोष्‍ठी के एक भाग के रूप में, बड़ी संख्या में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू), डीपीएसयू, उद्योग और एमएसएमई अपने स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किए गए उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं जो हवाई अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्त हैं।

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पीके/केसी/पीपी/वीके


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