राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार ने सामाजिक कार्यकर्ता विद्यानंद बापट के समर्थन में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि बापट ने जो मुद्दा उठाया है, वह सही है। वह गलत प्रथाओं के खिलाफ अपनी आवाज उठा रहे हैं। पवार ने बापट पर हुए हमले की भी कड़ी निंदा की। पवार ने कहा कि किसी व्यक्ति को सिर्फ अपनी राय रखने के कारण पीटना लोकतंत्र पर हमला है। उन्होंने यह भी कहा कि अलग राय रखने का मतलब हिंसा नहीं हो सकता।
बापट किस मुद्दे का विरोध कर रहे हैं?
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विद्यानंद बापट सार्वजनिक त्योहारों में तेज आवाज वाले डीजे और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल का खुलकर विरोध कर रहे हैं। इसमें आने वाला गणेशोत्सव भी शामिल है। उनका कहना है कि त्योहारों के दौरान ध्वनि प्रदूषण से जुड़ी समस्या पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
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बापट पिछले महीने पुणे नगर निगम की एक बैठक में भी इस मुद्दे को लेकर मुखर हुए थे। यह बैठक 10 दिन चलने वाले गणेश उत्सव से पहले आयोजित की गई थी। गणेश उत्सव 14 सितंबर से शुरू होना है।
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बापट पर हमला कब और कहां हुआ?
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बापट पर गुरुवार को पुणे के तिलक रोड पर हमला किया गया। उस समय वह एक टेलीविजन समाचार चैनल से बात कर रहे थे। घटना कैमरे में भी रिकॉर्ड हुई। इसके बाद पुलिस ने हमले के आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
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हमले के बाद यह मामला राजनीतिक और सामाजिक चर्चा में आ गया। पवार समेत कई राजनीतिक नेताओं ने घटना की निंदा की है।
शरद पवार ने त्योहारों में तेज आवाज को लेकर क्या कहा?
शरद पवार ने कहा कि त्योहार लोगों के लिए खुशी लेकर आने वाले होने चाहिए। उन्हें लोगों के लिए परेशानी का कारण नहीं बनना चाहिए। उन्होंने कहा, 'त्योहार सुखद होने चाहिए और लोगों के लिए खुशी लेकर आने चाहिए। डीजे की तेज आवाज और सड़कों पर होने वाले कार्यक्रम त्योहार की गंभीरता को खत्म कर देते हैं।'
उन्होंने आगे कहा, 'मैं विद्यानंद बापट को नहीं जानता, लेकिन उन्होंने जो मुद्दा उठाया है, वह सही है। गणेशोत्सव मनाने की एक परंपरा है, लेकिन बापट गलत प्रथाओं के खिलाफ अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं। मैं उनके रुख का समर्थन करता हूं।'
बापट पर हमले को पवार ने लोकतंत्र से क्यों जोड़ा?
शरद पवार ने कहा कि किसी मुद्दे पर किसी व्यक्ति की राय अलग हो सकती है। लेकिन उस राय के कारण उसके साथ मारपीट करना स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, 'किसी व्यक्ति ने किसी मुद्दे पर अपनी राय रखी है। उसके लिए उस पर हमला करना लोकतंत्र पर हमला है।' शरद पवार ने कहा कि वह उन लोगों के साथ हैं, जिन्होंने बापट पर हुए हमले की निंदा की है।
सोलापुर के फैसले का पवार ने क्यों जिक्र किया?
पवार ने सोलापुर में डीजे साउंड सिस्टम और लेजर लाइट पर लगाए गए प्रतिबंध का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दूसरे स्थानों पर भी इसी तरह के फैसलों पर विचार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, 'सोलापुर ने डीजे को लेकर फैसला लिया है। ऐसे फैसले लेने की जरूरत है।' इस तरह पवार ने त्योहारों के दौरान ध्वनि और दूसरे तेज प्रभाव वाले कार्यक्रमों को लेकर प्रशासनिक फैसलों पर विचार की जरूरत बताई।
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बापट अचानक चर्चा में कैसे आए?
बापट पिछले महीने पुणे नगर निगम की बैठक के दौरान चर्चा में आए थे। बैठक गणेश उत्सव की तैयारियों से पहले आयोजित की गई थी। इस दौरान उन्होंने तेज आवाज वाले डीजे संगीत और लाउडस्पीकर पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। उनकी इस मांग के बाद गणेश मंडलों के प्रतिनिधि आक्रामक हो गए। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस बापट को सुरक्षा के बीच नगर निगम की इमारत से बाहर लेकर गई। इस दौरान उनके खिलाफ नारेबाजी और विरोध भी हुआ।
मामला अब केवल बापट के विरोध तक सीमित नहीं रह गया है। एक तरफ त्योहारों की परंपरा और उत्सव का सवाल है, तो दूसरी तरफ तेज आवाज और उससे जुड़ी नागरिक चिंता का मुद्दा उठ रहा है। शरद पवार के बयान ने इस बहस को राजनीतिक समर्थन भी दिया है।