Amar Ujala Ltd

08/20/2026 | Press release | Distributed by Public on 08/19/2026 22:53

Lucknow: श्रावस्ती एनकाउंटर पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख, पुलिस की कहानी पर गंभीर सवाल; सीबीआई जांच के आदेश

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Lucknow: श्रावस्ती एनकाउंटर पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख, पुलिस की कहानी पर गंभीर सवाल; सीबीआई जांच के आदेश

Thu, 20 Aug 2026 03:38 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 20 Aug 2026 03:38 AM IST
सार

अदालत ने पुलिस की कहानी पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी है।

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विस्तार

उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में पिछले साल मई में हुए एक पुलिस एनकाउंटर पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने पुलिस की कहानी पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी है।

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कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि पुलिस की एफआईआर में कई विरोधाभास साफ नजर आ रहे हैं और संबंधित थानाध्यक्ष ने घटना का झूठा विवरण पेश किया प्रतीत होता है, इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने यह आदेश आरोपी छोटकऊ उर्फ अलाउद्दीन की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। पीठ ने कोर्ट ने सीबीआई को तीन महीने के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है, साथ ही श्रावस्ती सत्र अदालत में अलाउद्दीन के खिलाफ चल रही अदालती कार्यवाही पर भी रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।
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पिछले साल का है मामला
एफआईआर के अनुसार, 9 मई, 2025 को अलाउद्दीन के खिलाफ 7 वर्षीय बच्चे के अपहरण के आरोप में इकौना थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। 12 मई, 2025 को तत्कालीन एसएचओ अश्विनी कुमार दुबे ने एक और एफआईआर दर्ज कराई, जिसमें दावा किया गया कि आरोपी अलाउद्दीन नेपाल भागने की फिराक में था। अलाउद्दीन पर इकौना थाने के तत्कालीन एसएचओ अश्विनी कुमार दुबे ने आत्मरक्षा में दो गोलियां चलाई थीं, जो सीधे उसके दोनों पैरों में लगीं। एसएचओ का दावा था कि उन्होंने रात के अंधेरे में केवल हथियार लोड होने की आवाज सुनकर 15 मीटर दूर से अपनी 9 एमएम सर्विस पिस्टल से सटीक फायर किया था।
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उच्च न्यायालय ने एजेंसी को एसएचओ की निशानेबाजी क्षमता जांचने के आदेश दिए
हाईकोर्ट ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि एक ही वाहन में सवार 23 पुलिसकर्मियों से घिरे होने के बावजूद आरोपी ने फायरिंग की, जिसमें एक भी पुलिसकर्मी घायल नहीं हुआ। वहीं, रात के अंधेरे में 15 मीटर दूरी से एसएचओ की ओर से चलाई गई दोनों गोलियां सीधे आरोपी के दोनों पैरों पर लगे। अदालत ने इस दावे पर संदेह जताते हुए सीबीआई को एसएचओ की निशानेबाजी क्षमता की जांच करने को कहा है।

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि 9 एमएम गोली के आकार व आरोपी के पैरों में आए घावों के विवरण में भी भारी अंतर दिख रहा है। अदालत ने यह भी संज्ञान लिया कि इस कथित एनकाउंटर में शामिल सभी 23 पुलिसकर्मियों को फौरन गुड वर्क के नाम पर पुरस्कृत भी कर दिया गया था।
Amar Ujala Ltd published this content on August 20, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on August 20, 2026 at 04:53 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]