अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड यानी अत्यधिक प्रसंस्कृत और पैकेटबंद खाद्य पदार्थों को लेकर लंबे समय से बहस चल रही है। अक्सर यह दावा किया जाता है कि बर्गर, पिज्जा, चिप्स और शुगरी ड्रिंक्स जैसी चीजें तंबाकू उत्पादों की तरह लत लगा सकती हैं। इस मुद्दे पर केंद्र सरकार ने शुक्रवार को लोकसभा में अपना पक्ष स्पष्ट किया।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने एक लिखित प्रश्न के उत्तर में बताया कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने अब तक यह पता लगाने के लिए कोई अध्ययन नहीं किया है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड तंबाकू या अन्य नशीले पदार्थों की तरह लत पैदा करता है या नहीं।
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क्या जंक फूड से गंभीर बीमारियां होती हैं?
सरकार ने बताया कि आईसीएमआर ने माना है दुनिया में हुए कई वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर यह माना गया है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इससे मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग और कुछ मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
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हालांकि, आईसीएमआर के हवाले से सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि इन बीमारियों के पीछे केवल जंक फूड जिम्मेदार नहीं होता। आनुवंशिक कारण, शारीरिक गतिविधि की कमी, जीवनशैली और अन्य कई कारक भी इसके लिए जिम्मेदार होते हैं। सरकार के अनुसार, प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन उन जोखिम कारकों में से एक है, जिसे बदला जा सकता है।
सरकार ने यह भी कहा कि अभी उपलब्ध अधिकांश वैज्ञानिक प्रमाण अवलोकन पर आधारित हैं। इसलिए यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड ही इन बीमारियों का मुख्य कारण है।
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सरकार और FSSAI क्या कर रहे हैं?
स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि लोगों को स्वस्थ खान-पान के प्रति जागरूक करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं।
डायटरी गाइडलाइंस फॉर इंडियंस 2024: आईसीएमआर ने नई आहार गाइडलाइन जारी कर अधिक चीनी और मीठे पेय पदार्थों से बचने की सलाह दी है।
फूड लेबल पढ़ने की सलाह: लोगों को पैकेट पर लिखी पोषण संबंधी जानकारी पढ़कर सही खाद्य पदार्थ चुनने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
'लेट्स फिक्स अवर फूड' अभियान: बच्चों और किशोरों में स्वस्थ खान-पान की आदत विकसित करने के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है।
'ईट राइट इंडिया' और 'आज से थोड़ा कम' अभियान: एफएसएसआई लोगों को कम नमक, कम चीनी और कम वसा वाला भोजन अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है।
सोशल मीडिया जागरूकता अभियान: '#HarLabelKuchKehtaHai' और 'Eat Right Quiz on Obesity' जैसे अभियानों के जरिए लोगों को पोषण संबंधी जानकारी दी जा रही है।
पैकेट पर पोषण संबंधी जानकारी अनिवार्य: खाद्य कंपनियों को अपने उत्पादों पर वसा, चीनी, सोडियम, प्रोटीन और ऊर्जा जैसी जानकारी स्पष्ट रूप से देना अनिवार्य है।
भ्रामक विज्ञापनों पर रोक: बिना वैज्ञानिक प्रमाण के किसी खाद्य पदार्थ को बीमारी ठीक करने वाला बताने वाले विज्ञापनों पर कार्रवाई का प्रावधान है।