Amar Ujala Ltd

09/01/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/01/2026 08:42

बगावत के बाद सांसदी बचाने की जंग: टीएमसी के सांसदों ने लोकसभा सचिवालय से मांगा तीन हफ्ते का समय, अब आगे क्या

{"_id":"6a96e412ef05c3c4470d0e26","slug":"twenty-rebel-tmc-mps-sought-three-weeks-time-from-lok-sabha-secretariat-to-respond-to-issue-switching-sides-2026-09-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"बगावत के बाद सांसदी बचाने की जंग: टीएमसी के सांसदों ने लोकसभा सचिवालय से मांगा तीन हफ्ते का समय, अब आगे क्या?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}

बगावत के बाद सांसदी बचाने की जंग: टीएमसी के सांसदों ने लोकसभा सचिवालय से मांगा तीन हफ्ते का समय, अब आगे क्या?

Tue, 01 Sep 2026 08:11 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता Published by: प्रशांत तिवारी Updated Tue, 01 Sep 2026 08:11 PM IST
सार

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) के साथ जाने वाले लोकसभा के 20 सांसदों ने अपने खिलाफ दायर अयोग्यता याचिका पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से जारी नोटिस का जवाब देने के लिए तीन हफ्ते का समय मांगा है। एनसीपीआई के वरिष्ठ नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

विज्ञापन
अमर उजाला ग्राफिक्स - फोटो : अमर उजाला
  • Link Copied

खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें

यह खबर एप पर पढ़ें

या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें

संक्षिप्त विज्ञापन देखें विज्ञापन लोड हो रहा है

अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो

लॉगिन करें

विस्तार

टीएमसी छोड़कर एनसीपीआई के साथ जाने वाले 20 लोकसभा सांसदों ने अपने खिलाफ चल रही दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता की कार्यवाही में जवाब देने के लिए तीन सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा है। लोकसभा सचिवालय ने पहले उन्हें सात दिन में जवाब देने को कहा था। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है, जिसने लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष चल रही कार्यवाही में तेजी लाने का निर्देश दिया है। बागी सांसद कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेकर अपना पक्ष तैयार कर रहे हैं। इस बीच, टीएमसी और असंतुष्ट खेमे के बीच जारी राजनीतिक टकराव ने मामले को पश्चिम बंगाल के बदलते राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण बना दिया है।

विज्ञापन


लोकसभा सचिवालय ने सात दिन में मांगा था जवाब
लोकसभा सचिवालय ने 26 अगस्त को टीएमसी के 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी कर सात दिन के भीतर जवाब मांगा था। ये नोटिस टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी की ओर से दायर उन याचिकाओं के बाद जारी किए गए थे, जिनमें इन सांसदों को दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराने की मांग की गई है। सूत्रों के मुताबिक, 25 अगस्त का नोटिस सांसदों को अभिषेक बनर्जी की 18 जून की याचिका की प्रति के साथ भेजा गया था।
विज्ञापन


तीन सप्ताह का समय देने का अनुरोध
एनसीपीआई के लोकसभा में सदन के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने पीटीआई से कहा कि हमें 26 अगस्त को लोकसभा सचिवालय की ओर से एक पत्र मिला, जिसमें अभिषेक बनर्जी के उस पत्र के संबंध में जवाब मांगा गया था, जिसमें उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से 20 एनसीपीआई सांसदों की सदस्यता रद्द करने का अनुरोध किया है। हमने लोकसभा सचिवालय को पत्र लिखकर जवाब देने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


कानूनी सलाह ले रहे बागी सांसद
एनसीपीआई के एक अन्य सांसद ने बताया कि बागी सांसद अपने जवाब को अंतिम रूप देने से पहले वकीलों से सलाह-मशविरा कर रहे हैं। इससे संकेत मिलता है कि सांसद शुरुआती सात दिन की समयसीमा में जल्दबाजी में जवाब देने के बजाय अपना विस्तृत कानूनी पक्ष तैयार कर रहे हैं।

राजनीतिक रूप से अहम मोड़ पर पहुंचा मामला
अतिरिक्त समय मांगने का यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब अयोग्यता को लेकर जारी विवाद राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील दौर में पहुंच चुका है। दल-बदल के इस मामले की सुनवाई अब टीएमसी नेतृत्व और असंतुष्ट खेमे के बीच चल रहे व्यापक संगठनात्मक और विधायी टकराव के समानांतर आगे बढ़ रही है।

सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंच चुका है मामला
लोकसभा अध्यक्ष से बागी सांसदों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला कराने की मांग को लेकर टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 25 अगस्त को सुनवाई के लिए सहमति जताई थी। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष की ओर से सांसदों को नोटिस जारी किए गए।

सुप्रीम कोर्ट ने कार्यवाही में तेजी लाने को कहा
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे। पीठ ने अभिषेक बनर्जी की याचिका पर 20 सांसदों को नोटिस जारी किया और निर्देश दिया कि लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष चल रही अयोग्यता संबंधी कार्यवाही पर तेजी से कार्रवाई की जाए।

जून में अध्यक्ष के समक्ष दायर की गई थीं याचिकाएं
अभिषेक बनर्जी ने जून में लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष अलग-अलग याचिकाएं दायर कर उन 20 सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग की थी, जिन्होंने टीएमसी छोड़कर एनसीपीआई के साथ जाने का फैसला किया। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष की ओर से जारी नोटिस में सांसदों से सात दिन के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा गया था।

बागी खेमे को मिला तैयारी का अतिरिक्त समय
एक बागी टीएमसी सांसद ने कहा कि अतिरिक्त समय मांगने के फैसले से असंतुष्ट खेमे को अब कानूनी और राजनीतिक पहलुओं पर विचार करने के लिए कुछ और समय मिल जाएगा। सांसदों के खिलाफ चल रही अयोग्यता की कार्यवाही के संभावित परिणामों को देखते हुए यह अतिरिक्त समय उनके लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दल-बदल कानून की धाराओं पर कानूनी राय
बताया जा रहा है कि सांसद दल-बदल विरोधी कानून के प्रावधानों की अपने मामले में लागू होने की स्थिति को लेकर भी कानूनी राय ले रहे हैं। इसके साथ ही वे यह तय करने में जुटे हैं कि लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष किन कानूनी दलीलों को प्रमुखता से रखा जाए।

विधानसभा चुनाव में हार के बाद बढ़ा आंतरिक संकट
20 लोकसभा सीटों को लेकर शुरू हुआ यह विवाद टीएमसी के भीतर चल रहे उस बड़े राजनीतिक संकट की अगली कड़ी है, जिसने मई में हुए विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार के बाद संगठनात्मक मतभेदों को और गहरा कर दिया। अब यही आंतरिक संकट पार्टी के भीतर से निकलकर सीधे राजनीतिक और संस्थागत टकराव का रूप ले चुका है।

टीएमसी के 80 में से 65 विधायकों ने किया था समर्थन
असंतुष्ट खेमे ने पहले ही यह दिखाने की कोशिश की है कि पार्टी के निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच उसे पर्याप्त समर्थन हासिल है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में टीएमसी के 80 विधायकों में से 65 ने नेता प्रतिपक्ष पद के लिए रितब्रत बनर्जी के दावे का समर्थन किया था। इन विधायकों ने ममता बनर्जी खेमे के समर्थन वाले उम्मीदवार को नकार दिया था।

बागी खेमे ने बुलाई विशेष बैठक
इसके बाद बागी विधायकों ने विशेष सत्र बुलाया, जिसमें वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को अध्यक्ष चुना गया। साथ ही उन्होंने समानांतर राष्ट्रीय नेतृत्व ढांचे की घोषणा भी की। असंतुष्ट खेमे ने तर्क दिया कि मौजूदा नेतृत्व को निर्वाचित प्रतिनिधियों के बहुमत का भरोसा हासिल नहीं रह गया है।

विवाद अब संसद तक पहुंचा
इसके बाद यह टकराव संसद तक पहुंच गया। लोकसभा के 20 सांसदों ने खुद को नवगठित एनसीपीआई के साथ जोड़ लिया और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल हो गए।

टीएमसी ने बताया बीजेपी की ओर संगठित राजनीतिक बदलाव
टीएमसी नेतृत्व ने इन संसदीय दलबदल को बीजेपी की ओर एक समन्वित राजनीतिक बदलाव के प्रमाण के तौर पर पेश किया है। वहीं, असंतुष्ट खेमे का कहना है कि उसके राजनीतिक और संगठनात्मक फैसले मौजूदा टीएमसी नेतृत्व से विश्वास उठने के कारण लिए गए हैं।

ये भी पढ़ें: ओबीसी क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट में घमासान: सीएसई 2025 के अफसरों का सेवा आवंटन अटका, जानें पूरा मामला

20 सांसदों की सदस्यता पर टिकी नजर
इसलिए इन सांसदों के खिलाफ चल रही अयोग्यता की कार्यवाही अब केवल व्यक्तिगत सांसदों की सदस्यता तक सीमित मामला नहीं रह गई है। दोनों खेमे इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि लोकसभा अध्यक्ष का फैसला पश्चिम बंगाल में बदलते राजनीतिक समीकरणों और दोनों पक्षों की ताकत के संतुलन को किस हद तक प्रभावित कर सकता है।
Amar Ujala Ltd published this content on September 01, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 01, 2026 at 14:42 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]