Amar Ujala Ltd

07/25/2026 | Press release | Distributed by Public on 07/25/2026 00:12

Abhijeet Dipke Sick: CJP के लिए बुरी खबर! दिपके को हुई ये बीमारी! Dipke diagnosed with typhoid


26 दिन तक चले अनशन के बाद सोनम वांगचुक ने आंदोलन की मशाल अपने साथियों को सौंप दी लेकिन अब उसी आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अभिजीत दिपके बीमार पड़ गए हैं।

टाइफाइड की पुष्टि हो चुकी है फिर भी उनका दावा है "बीमारी मुझे रोक सकती है, लेकिन आंदोलन नहीं।" ऐसे में सवाल है क्या सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव खत्म होगा, या धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग आंदोलन को और लंबा खींचेगी? देखिए ये रिपोर्ट।

नीट-यूजी पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके की तबीयत बिगड़ गई है। मेडिकल जांच में उन्हें टाइफाइड होने की पुष्टि हुई है। दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो संदेश जारी कर कहा कि वह बीमार जरूर हैं, लेकिन उनका संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते।

अभिजीत दिपके भी पहले जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे थे। हालांकि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आग्रह पर उन्होंने जूस पीकर अपना अनशन समाप्त कर दिया था। वांगचुक ने भी 26 दिन की भूख हड़ताल खत्म करते हुए संदेश भेजा था कि आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए साथियों को अपनी ऊर्जा बचानी चाहिए। लेकिन अब आंदोलन की जिम्मेदारी संभाल रहे दिपके खुद बीमारी की चपेट में आ गए हैं।

इसके बावजूद सीजेपी ने साफ कर दिया है कि आंदोलन में कोई ढील नहीं दी जाएगी। संगठन का कहना है कि जंतर-मंतर पर नीट-यूजी पेपर लीक के खिलाफ शुरू हुआ अनिश्चितकालीन धरना अब 36वें दिन में प्रवेश कर चुका है और जब तक प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं, प्रदर्शन जारी रहेगा। सीजेपी का कहना है कि यह सिर्फ एक परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे परीक्षा तंत्र में जवाबदेही तय करने की लड़ाई है।

शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने सीजेपी के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। बैठक में प्रदर्शनकारियों ने अपनी तीन प्रमुख मांगें सरकार के सामने दोहराईं। पहली, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। दूसरी, नीट-यूजी विवाद से प्रभावित परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा। और तीसरी, आंदोलन में शामिल छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई न की जाए। सरकार ने शनिवार को अपना रुख स्पष्ट करने का आश्वासन दिया है।

इस बीच प्रदर्शनकारियों का कहना है कि संसद चलो मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के बाद आंदोलन और तेज हुआ है। उनका आरोप है कि लाठीचार्ज और आंसू गैस के बावजूद छात्रों का हौसला नहीं टूटा। अब देश के अलग-अलग हिस्सों से छात्र और युवा जंतर-मंतर पहुंच रहे हैं। संगठन का दावा है कि जब तक परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

एक तरफ आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अभिजीत दिपके बीमारी से जूझ रहे हैं दूसरी तरफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है। अब सबकी नजर सरकार के अगले कदम पर है। क्या बातचीत से समाधान निकलेगा, या धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग इस आंदोलन को और लंबा खींचेगी? इसका जवाब आने वाले दिनों में देश की सबसे बड़ी छात्र लड़ाई की दिशा तय करेगा।

Amar Ujala Ltd published this content on July 25, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on July 25, 2026 at 06:12 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]