09/11/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/11/2026 00:06
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स्कूल लंबे समय तक बंद हों तो बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए महंगी ऑनलाइन कक्षाएं ही जरूरी नहीं हैं। शिक्षक की हर सप्ताह महज 20 मिनट की फोन कॉल भी बच्चों की सीखने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार कर सकती है। खासकर तब, जब कॉल के साथ पढ़ाई से जुड़े छोटे टेक्स्ट मैसेज भी भेजे जाएं। नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन से यह बात सामने आई है। नेचर में प्रकाशित अध्ययन में भारत समेत पांच देशों के 16 हजार से अधिक परिवारों को शामिल किया गया। भारत, केन्या, नेपाल, फिलीपींस और युगांडा में किए गए अलग-अलग रैंडमाइज्ड ट्रायल में अधिकांश बच्चे तीसरी से पांचवीं कक्षा के थे। केन्या में पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों को भी शामिल किया गया।
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शिक्षा शोधकर्ता और अध्ययन के सह-लेखक नोआम एंग्रिस्ट के मुताबिक, महामारी, प्राकृतिक आपदा या अन्य आपात स्थिति में स्कूल लंबे समय तक बंद रहने पर यह कम लागत वाला विकल्प हो सकता है। अध्ययन में मुख्य रूप से छोटे बच्चों और गणित सीखने पर ध्यान दिया गया था। शिक्षक की नियमित कॉल को गंभीरता से लेना और बच्चे को उसमें सक्रिय रूप से शामिल कराना पढ़ाई के नुकसान को कम करने का सरल और कम खर्चीला तरीका हो सकता है।
अध्ययन का एक व्यावहारिक संदेश अभिभावकों के लिए भी है। स्कूल बंद होने या नियमित कक्षाएं बाधित होने की स्थिति में शिक्षक की फोन कॉल को महज एक औपचारिक बातचीत न समझें। बच्चे को कॉल के समय उपलब्ध कराना, शिक्षक से बात करने देना और जरूरत हो तो बताए गए अभ्यास को पूरा करवाना इस तरह की सहायता का लाभ बढ़ा सकता है। यह तरीका विशेष रूप से उन परिवारों के लिए उपयोगी हो सकता है जिनके पास तेज इंटरनेट, कंप्यूटर या महंगी ऑनलाइन कक्षाओं की सुविधा नहीं है। मोबाइल फोन की व्यापक उपलब्धता के कारण शिक्षक बच्चे से सीधे जुड़ सकता है और उसकी समस्या के अनुसार मदद कर सकता है।