प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के गुवाहाटी जोनल ऑफिस ने 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002' के तहत गोमिलियन (GoMillions LLP) के प्रमोटरों - ऋषिराज गोगोई, जॉय मोदक और उनके साथियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में लगभग 15.25 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है। इसमें बैंक बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉजिट, स्टॉक ट्रेडिंग अकाउंट, गाड़ियां और कैश शामिल है। यह मामला बिना रेगुलेशन वाली डिपॉजिट कलेक्शन स्कीम से जुड़ा है। गोमिलियन के प्रमोटरों ने 25 हजार से ज्यादा निवेशकों को रोजाना रिटर्न देने और 6 माह में पैसा डबल करने का झूठा वादा किया था।
मल्टी-लेवल मार्केटिंग से लोगों को बहकाया
ईडी ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन की एंटी-करप्शन ब्रांच, गुवाहाटी द्वारा दर्ज केस (जो मूल रूप से गीता नगर पुलिस स्टेशन केस नंबर 174/2024 के तौर पर दर्ज किया गया था) के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की है। यह केस 'भारतीय न्याय संहिता, 2023' और 'बैनिंग ऑफ़ अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स एक्ट, 2019' के तहत अपराधों के लिए दर्ज किया गया था। एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि GoMillions LLP के पार्टनर ऋषिराज गोगोई और जॉय मोदक ने "TradeBull" नाम से एक प्रोडक्ट-बेस्ड मल्टी-लेवल मार्केटिंग कंपनी की आड़ में, गुवाहाटी और असम के आस-पास के ज़िलों में लोगों से डिपॉजिट एकत्रित किया।
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रोजाना 0.85% फिक्स्ड रिटर्न देने का वादा
उन्होंने निवेशकों को रोजाना 0.85% फिक्स्ड रिटर्न देने और लगभग छह महीने में निवेश की गई रकम को दोगुना करने का झूठा वादा किया। खास बात यह है कि उनके पास लोगों से डिपॉजिट लेने के लिए किसी रेगुलेटर से कोई रजिस्ट्रेशन या मंज़ूरी नहीं थी। जांच से पता चला कि आरोपियों ने एक खास ऑनलाइन पोर्टल और मोबाइल ऐप के ज़रिए आम जनता के हज़ारों सदस्यों से पैसे जमा किए थे। कंपनी के सर्वर से मिले डेटा से 25,410 से ज़्यादा अलग-अलग निवेशकों की पहचान हुई है। लगभग 34.93 करोड़ रुपये की कुल पेमेंट देनदारी का पता चला है।
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प्रमोटरों और उनके परिजनों के खातों में निवेश का पैसा
जांच में आगे यह भी पता चला है कि GoMillions LLP के मुख्य बैंक खातों में लगभग 63.41 करोड़ रुपये जमा हुए थे। इसके बाद, अपराध से हुई इस कमाई को जुड़ी हुई कंपनियों -Rightway Infocom Pvt. Ltd., Carely Solutions Pvt. Ltd. और एक पार्टनरशिप फर्म Lotus Corporation - के ज़रिए घुमाया गया। निवेशकों के पैसे को प्रमोटरों व उनके परिवार के सदस्यों के पर्सनल खातों में भेज दिया गया।
महंगी गाड़ियां खरीदी और शेयरों में लगाया पैसा
जांच के दौरान यह भी पाया गया कि अपराध से हुई इस कमाई का इस्तेमाल महंगी गाड़ियां खरीदने, स्टॉक मार्केट ट्रेडिंग अकाउंट और फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करने में किया गया था। साथ ही मुख्य आरोपी के पास से बिना हिसाब-किताब वाला कैश भी बरामद हुआ था। इसलिए, ईडी ने संबंधित कंपनियों और व्यक्तियों के बैंक बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉजिट, स्टॉक-ब्रोकिंग फर्म के साथ ट्रेडिंग अकाउंट, तीन गाड़ियां (जिनमें एक पोर्श और एक मर्सिडीज-बेंज शामिल हैं) और कैश को अस्थायी रूप से ज़ब्त कर लिया है, जिनकी कुल कीमत लगभग 15.25 करोड़ रुपये है।