Ministry of Heavy Industries of the Republic of India

08/08/2026 | Press release | Distributed by Public on 08/08/2026 07:56

केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने ‘ एआई इन मेडटेक: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के ज़रिए स्वास्थ्य सेवा में क्रांति’ पर नॉलेज पेपर जारी किया

औषधि विभाग

केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने ' एआई इन मेडटेक: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के ज़रिए स्वास्थ्य सेवा में क्रांति' पर नॉलेज पेपर जारी किया


रिपोर्ट में स्वास्थ्य सेवा में ज़िम्मेदार एआई को अपनाने की गति बढ़ाने के लिए पांच मुख्य प्राथमिकताओं की रूपरेखा दी गई है

प्रविष्टि तिथि: 08 AUG 2026 5:52PM by PIB Delhi

रसायन और उर्वरक तथा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में "एआई इन मेडटेक: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के ज़रिए हेल्थकेयर में क्रांति" विषय पर नॉलेज पेपर जारी किया। इसे फिक्की के सहयोग से फार्मास्युटिकल्स विभाग द्वारा आयोजित 'इंडिया मेडिकल डिवाइस 2026' के 9वें संस्करण में जारी किया गया। इस रिपोर्ट में नए अवसर पैदा करने से लेकर उभरती चुनौतियों का समाधान करने तक स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की बढ़ती भूमिका की जानकारी दी गई है।

फिक्की के सहयोग से Praxis Global Alliance द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किया गया यह नॉलेज पेपर भारत के बदलते एआई-सक्षम मेडटेक परिदृश्य की समीक्षा करता है। इसमें स्वास्थ्य सेवा में ज़िम्मेदार एआई को अपनाने की गति बढ़ाने के लिए ज़रूरी रणनीतिक कदमों की रूपरेखा बताई गई है। यह डायग्नोस्टिक्स, क्लिनिकल निर्णय सहायता, परिचालन दक्षता और मेडिकल डिवाइस इनोवेशन में एआई की भूमिका का पता लगाता है, साथ ही बड़े पैमाने पर इसे अपनाने में सक्षम बनाने के लिए ज़रूरी रेगुलेटरी, पॉलिसी और इकोसिस्टम से जुड़े उपायों की पहचान करता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम), IndiaAI मिशन, SAHI, BODH और राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति, 2023 के माध्यम से पहले ही महत्वपूर्ण आधार तैयार कर लिया है, लेकिन एआई समाधानों को सफल पायलट प्रोजेक्ट्स से बड़े पैमाने पर क्लिनिकल उपयोग तक ले जाना बड़ी चुनौती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बदलाव के लिए बिखरे हुए स्वास्थ्य डेटा और सीमित सबूतों की समस्या को हल करने, एडेप्टिव एआई के लिए अनुमानित जीवन-चक्र आधारित नियम विकसित करने और सहायक रीइम्बर्समेंट (भुगतान वापसी) और खरीद तंत्र बनाने की आवश्यकता है। इसमें कहा गया है कि भारत के पास अपनी सॉफ्टवेयर क्षमताओं, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लिनिकल विविधता और बढ़ते मेडटेक मैन्युफैक्चरिंग बेस का लाभ उठाकर एआई-सक्षम चिकित्सा तकनीकों के ज़िम्मेदार विकास, निर्माण और उपयोग में वैश्विक लीडर बनने का अनूठा अवसर भी है।

इस अवसर पर फार्मास्यूटिकल्स विभाग के सचिव श्री मनोज जोशी; नीति आयोग के सदस्य डॉ. एम. श्रीनिवास; स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव और आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल; स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग की सचिव श्रीमती पुण्य सलिला श्रीवास्तव; उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव श्री अमरदीप सिंह भाटिया; राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सीईओ श्री सुनील कुमार बरनवाल; फिक्की के महासचिव श्री अनंत स्वरूप और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, उद्योग जगत के नेता और मेडटेक क्षेत्र के हितधारक उपस्थित थे।

नॉलेज पेपर की खास बातें

रिपोर्ट में भारत में एआई-इनेबल्ड मेडटेक को तेज़ी से अपनाने के लिए पाँच ज़रूरी बातों पर ज़ोर दिया गया है:

• मेडटेक भारत का सबसे तुरंत और स्केलेबल एआई मौका है, जिससे स्पेशलिस्ट एक्सपर्टीज़ को सीधे मेडिकल डिवाइस में शामिल किया जा सकता है और अच्छी हेल्थकेयर तक पहुँच बढ़ाई जा सकती है

• भारत के पास एआई लीडरशिप के लिए नींव है, लेकिन अभी तक स्केल के लिए इकोसिस्टम नहीं है। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, नवाचार और डॉक्टरों की स्वीकार्यता तेज़ी से आगे बढ़ी है, लेकिन एआई को अपनाना अब भी बिखरे हुए डेटा, बदलते रेगुलेशन और सीमित रीइंबर्समेंट रास्तों की वजह से मुश्किल बना हुआ है।

• भारत को सफल पायलट प्रोजेक्ट से आगे बढ़कर रूटीन क्लिनिकल अपनाने की दिशा में चलना होगा। इसके लिए उसे तीन इकोसिस्टम की कमियों को दूर करना होगा: एआई-रेडी डेटा और सबूत, लाइफसाइकल-बेस्ड रेगुलेशन, और खरीद और रीइंबर्समेंट के तरीके जो एआई-इनेबल्ड वैल्यू को पहचानते हैं।

• एआई-इनेबल्ड डायग्नोस्टिक्स के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने की उम्मीद है, जो प्राइमरी और सेकेंडरी केयर में स्पेशलिस्ट की विशेषज्ञता बढ़ाने, उत्पादकता में सुधार करने और हेल्थकेयर एक्सेस में असमानताओं को कम करने में सहायता करेगा।

• सरकार, रेगुलेटर, हेल्थकेयर प्रोवाइडर, पेयर, इंडस्ट्री और एकेडेमिया में मिलकर काम करना ज़रूरी होगा ताकि भारत को ज़िम्मेदार एआई-इनेबल्ड मेडटेक में ग्लोबल लीडर बनाया जा सके।

पूरी रिपोर्ट यहां देखी जा सकती है।

*******

पीके/केसी/पीके /डीए


(रिलीज़ आईडी: 2296611) आगंतुक पटल : 13
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English
Ministry of Heavy Industries of the Republic of India published this content on August 08, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on August 08, 2026 at 13:56 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]