09/01/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/01/2026 11:35
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लॉगिन करेंनेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बीच 41 वर्षीय प्रिया अधिकारी राहत और बचाव अभियान का अहम चेहरा बनकर सामने आई हैं। नेपाल की पहली महिला हेलीकॉप्टर कैप्टन प्रिया अधिकारी ने महज छह दिनों में करीब 100 बचाव मिशन पूरे किए हैं। वह हिमालय के बेहद कठिन इलाकों में हेलीकॉप्टर उड़ाकर लोगों को सुरक्षित निकालने और शवों को बरामद करने के अभियान में जुटी हैं। रासुवा जिले के बाढ़ प्रभावित तिमुरे इलाके में उनका अभियान सबसे चुनौतीपूर्ण रहा है।
प्रिया अधिकारी लंबे समय से ऊंचाई वाले हिमालयी इलाकों में बचाव अभियान चलाने वाली अनुभवी हेलीकॉप्टर पायलट हैं। वह करीब 6,200 मीटर की ऊंचाई तक जाकर घायल पर्वतारोहियों को बचाने जैसे अभियान कर चुकी हैं। हालांकि उनका विमानन करियर सीधे तौर पर शुरू नहीं हुआ था। उन्होंने पर्यावरण विज्ञान की पढ़ाई की और शुरुआत में केबिन क्रू के रूप में काम किया। एक हेलीकॉप्टर की सवारी के बाद उनकी उड़ान में रुचि बढ़ी और वह प्रशिक्षण के लिए फिलीपींस चली गईं। जरूरी उड़ान घंटे पूरे करने के बाद 2017 में वह पूर्णकालिक हेलीकॉप्टर पायलट बनीं और बाद में ऊंचाई वाले बचाव अभियानों में विशेषज्ञता हासिल की।
तिमुरे में बचाव अभियान के दौरान करीब 20 हेलीकॉप्टर लगाए गए हैं। कई बार पांच से छह हेलीकॉप्टरों को लगभग एक साथ उतरना पड़ता है। ऐसे में पायलट रेडियो के जरिए लगातार एक-दूसरे से संपर्क में रहते हैं, ताकि किसी तरह की टक्कर न हो और सभी हेलीकॉप्टर एक ही जगह न पहुंच जाएं। बाढ़ और भूस्खलन के बाद जमीन पर मोटी और अस्थिर मिट्टी जमा हो गई है। ऊपर से जमीन मजबूत दिखती है, लेकिन पायलट यह तय नहीं कर सकते कि वह हेलीकॉप्टर का भार सह पाएगी या नहीं। कई जगह इंजन बंद करना भी सुरक्षित नहीं होता, इसलिए यात्रियों को निकालते समय हेलीकॉप्टर चालू रखना पड़ता है।
प्रिया अधिकारी ने बताया कि तिमुरे के ऊपर से उड़ान के दौरान उन्होंने बाढ़ से तबाह इलाकों में शव बिखरे देखे और दूसरी ओर हेलीकॉप्टर का इंतजार कर रहे लोगों को भी देखा। अभियान के शुरुआती दो दिनों में तिमुरे से 200 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया। नेपाल सेना के अगस्ता हेलीकॉप्टर भी इस अभियान में शामिल रहे। प्रिया अधिकारी के लिए जमीन पर हाथ हिलाते बचे लोगों को देखना हौसला देने वाला रहा। उन्होंने बताया कि वह लोगों से बस यही कहती थीं कि आप बच गए हैं।
प्रिया अधिकारी ने उन लोगों की तलाश भी की जो इस त्रासदी में लापता हो गए। उन्होंने राधिका नाम की अमेरिकी-भारतीय महिला के माता-पिता को खोजने की कोशिश की, जिनका परिवार आपदा में फंस गया था। इसके अलावा तिमुरे में ईशा फाउंडेशन से जुड़े एक नेपाली व्यक्ति और बैंक में काम करने वाले एक अन्य नेपाली व्यक्ति की भी तलाश की गई। उन्होंने कहा कि ये लोग उनके रिश्तेदार नहीं थे, लेकिन आसमान से तबाही और शवों को देखने के बाद उनसे भावनात्मक जुड़ाव हो गया। उन्होंने यह भी बताया कि प्रभावित इलाकों में शवों को रखने के लिए बॉडी बैग की जरूरत सबसे ज्यादा महसूस हो रही है।
लगातार उड़ानों के कारण प्रिया अधिकारी और उनके साथ काम कर रहे दूसरे पायलट बेहद थक चुके हैं। इसके बावजूद उन्होंने बचाव अभियान जारी रखा। प्रिया अधिकारी के मुताबिक, ऐसे हालात के लिए उन्हें प्रशिक्षण दिया गया है और यही उनका काम है। उन्होंने बताया कि बाढ़ और भूस्खलन के बीच काम करना 2015 के नेपाल भूकंप से भी ज्यादा मुश्किल लगा, क्योंकि इस बार तबाही एक संकरी घाटी में केंद्रित थी। उनके छह दिनों के करीब 100 मिशन दिखाते हैं कि बेहद खतरनाक हालात में भी बचाव अभियान किस तरह लगातार जारी रखा गया।