Ministry of Heavy Industries of the Republic of India

07/30/2026 | Press release | Distributed by Public on 07/30/2026 00:47

टीडीबी-डीएसटी ने स्वदेशी कार्यात्मक और संरचित सोया प्रोटीन कंसंट्रेट्स के व्यावसायीकरण के लिए इंदौर स्थित मेसर्स सोनिक बायोकेम एक्सट्रैक्शन्स प्राइवेट लिमिटेड को सहायता प्रदान की

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय

टीडीबी-डीएसटी ने स्वदेशी कार्यात्मक और संरचित सोया प्रोटीन कंसंट्रेट्स के व्यावसायीकरण के लिए इंदौर स्थित मेसर्स सोनिक बायोकेम एक्सट्रैक्शन्स प्राइवेट लिमिटेड को सहायता प्रदान की

प्रविष्टि तिथि: 30 JUL 2026 10:57AM by PIB Delhi

मूल्यवर्धित खाद्य प्रसंस्करण और पौध आधारित पोषण में आत्मनिर्भरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हुए, भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के अंतर्गत प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने "कार्यात्मक और संरचित सोया प्रोटीन कंसंट्रेट्स का विकास एवं व्यावसायीकरण" नामक परियोजना के लिए इंदौर (मध्य प्रदेश) स्थित मेसर्स सोनिक बायोकेम एक्सट्रैक्शन्स प्राइवेट लिमिटेड को वित्तीय सहायता प्रदान की है। इस परियोजना का उद्देश्य कंपनी द्वारा विकसित स्वदेशी तकनीक का उपयोग करके कार्यात्मक सोया प्रोटीन कंसंट्रेट्स (एफएसपीसी) और संरचित सोया प्रोटीन कंसंट्रेट्स (टीएसपीसी) के व्यावसायिक उत्पादन के लिए अत्याधुनिक विनिर्माण सुविधा स्थापित करना है।

यह पहल स्वस्थ, टिकाऊ और स्वच्छ लेबल वाले खाद्य उत्पादों के प्रति उपभोक्ताओं की बढ़ती पसंद के कारण उच्च गुणवत्ता वाले, गैर-जीएमओ (नॉन-जीएमओ) पादप-आधारित प्रोटीन अवयवों की बढ़ती वैश्विक मांग को पूरा करती है। यह भारत सरकार के घरेलू खाद्य प्रसंस्करण क्षमताओं को सुदृढ़ करने, कृषि में मूल्यवर्धन को बढ़ावा देने और आयात प्रतिस्थापन तथा निर्यात-उन्मुख विनिर्माण के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत को आगे बढ़ाने के विज़न के अनुरूप भी है।

गैर-जीएमओ सोया खाद्य सामग्री के निर्माण और निर्यात में दो दशकों से अधिक के अनुभव के साथ, सोनिक बायोकेम ने सोया प्रोटीन कंसंट्रेट (एसपीसी) को प्राथमिक कच्चे माल के रूप में उपयोग करके एफएसपीसी और टीएसपीसी दोनों के उत्पादन के लिए एक स्वदेशी प्रक्रिया विकसित की है। पारंपरिक निर्माण प्रक्रियाओं के विपरीत, जो अपेक्षाकृत महंगे सोया प्रोटीन आइसोलेट (एसपीआई) पर निर्भर करती हैं, मुख्य रूप से चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों से आयात किया जाता है जबकि कंपनी की तकनीक स्वदेशी रूप से विकसित और निर्मित एसपीसी का उपयोग करती है, जबकि समान कार्यात्मक गुण प्रदान करती है। यह नवाचार उत्पादन लागत में अत्‍यधिक कमी लाता है, प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाता है और पादप प्रोटीन क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करता है।

इस परियोजना के माध्यम से इन उन्नत प्रोटीन अवयवों के लिए वाणिज्यिक स्तर पर उत्पादन क्षमता स्थापित की जाएगी, जिनका उपयोग प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों, पौधों पर आधारित मांस विकल्पों, पोषण पूरकों और कार्यात्मक खाद्य उत्पादों में व्यापक रूप से होता है। उम्मीद है कि यह प्रौद्योगिकी आयात पर निर्भरता कम करेगी, निर्यात के नए अवसर सृजित करेगी और मूल्यवर्धित पादप प्रोटीन के तेजी से बढ़ते वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करेगी।

स्वदेशी तकनीक और स्थानीय स्तर पर उत्पादित गैर-जीएमओ सोयाबीन का उपयोग करके, यह परियोजना उच्च मूल्य वाले प्रोटीन अवयवों के लिए एक मजबूत घरेलू मूल्य श्रृंखला का निर्माण करेगी, साथ ही भारतीय खाद्य निर्माताओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कच्चे माल तक किफायती पहुंच प्रदान करेगी। इस पहल से कृषि क्षेत्र के लिए उच्च मूल्य प्राप्ति में योगदान मिलने और देश को टिकाऊ खाद्य प्रणालियों की ओर अग्रसर होने में सहायता मिलने की भी उम्मीद है।

इस अवसर पर टीडीबी सचिव श्री राजेश कुमार पाठक ने कहा, "उन्नत पादप प्रोटीन अवयवों के लिए स्वदेशी विनिर्माण क्षमताओं का विकास भारत के खाद्य प्रसंस्करण सेक्‍टर को सुदृढ़ करने और वैश्विक बाजारों में हमारी उपस्थिति का विस्तार करने के लिए कार्यनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। टीडीबी आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना के तहत मूल्यवर्धन को बढ़ावा देने, आयात पर निर्भरता कम करने और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी उत्पाद बनाने वाली प्रौद्योगिकियों की सहायता करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस पहल से महत्वपूर्ण विदेशी मुद्रा की बचत होने के साथ-साथ भारत के लिए निर्यात के नए अवसर भी सृजित होने की उम्मीद है।"

मेसर्स सोनिक बायोकेम एक्सट्रैक्शन्स प्राइवेट लिमिटेड के नेतृत्व ने सहायता के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि टीडीबी से मिली सहायता कंपनी को अपनी स्वदेशी रूप से विकसित प्रौद्योगिकी का व्‍यापक स्‍तर पर व्यावसायीकरण करने, गैर-जीएमओ सोया प्रोटीन सामग्री में भारत के नेतृत्व को सुदृढ़ करने और टिकाऊ, उच्च गुणवत्ता वाले पौधे-आधारित पोषण समाधानों की बढ़ती घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मांग को पूरा करने में सक्षम बनाएगी।

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पीके/केसी/एसकेजे/वाईबी


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