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Amar Ujala Ltd

09/11/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/10/2026 23:34

‘ब्रिक्स सिर्फ बड़े बाजार नहीं, आर्थिक नेटवर्क’: जय श्रॉफ बोले- एक की ताकत दूसरे के काम आएगी

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'ब्रिक्स सिर्फ बड़े बाजार नहीं, आर्थिक नेटवर्क': जय श्रॉफ बोले- एक की ताकत दूसरे के काम आएगी

Fri, 11 Sep 2026 10:43 AM IST
राकेश कुमार एएनआई, नई दिल्ली।
एएनआई, नई दिल्ली। Published by: राकेश कुमार Updated Fri, 11 Sep 2026 10:43 AM IST
सार

नई दिल्ली में ब्रिक्स बिजनेस फोरम की शुरुआत हो गई है, जिसमें सदस्य देशों के कारोबारी और सरकारों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। जय श्रॉफ ने ब्रिक्स को सिर्फ बड़े बाजारों का समूह न मानकर एक ऐसे आर्थिक नेटवर्क के रूप में देखने की बात कही, जहां सदस्य देशों की ताकत एक-दूसरे के काम आ सके। 12 सितंबर से मुख्य शिखर सम्मेलन शुरू होगा, जिसमें व्यापार, वित्त, ऊर्जा, डिजिटल तकनीक और वैश्विक संस्थानों में सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

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ब्रिक्स बिजनेस फोरम - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

नई दिल्ली में शुक्रवार को ब्रिक्स बिजनेस फोरम की शुरुआत हो गई। यह आयोजन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के तहत हो रहा है। इसमें सदस्य देशों के कारोबारी और सरकारों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल भी कार्यक्रम में वक्ताओं में शामिल हैं। ब्रिक्स बिजनेस फोरम हर साल उस देश में होता है, जहां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाता है। नेताओं की बैठक से ठीक पहले होने वाले इस मंच का मकसद कारोबार, निवेश, वित्त, तकनीक और टिकाऊ आर्थिक विकास जैसे मुद्दों पर सरकार और निजी क्षेत्र के बीच चर्चा करना है।
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सात अहम बातें जो समझनी जरूरी हैं:-
  • चार प्राथमिकताएं: भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता को प्रमुख प्राथमिकताओं में रखा गया है।
  • कारोबार की भागीदारी: फोरम में ब्रिक्स देशों के प्रमुख कारोबारी प्रतिनिधियों के साथ सरकारों के मंत्री और नेता भी विचार साझा करते हैं।
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  • आर्थिक नेटवर्क: जय श्रॉफ ने ब्रिक्स को सिर्फ बड़े बाजारों का समूह मानने के बजाय एक-दूसरे की ताकत बढ़ाने वाला आर्थिक नेटवर्क बताया।
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  • संसाधनों का इस्तेमाल: एक ब्रिक्स देश में उपलब्ध संसाधन दूसरे सदस्य देश के विनिर्माण क्षेत्र को सहारा दे सकते हैं।
  • तकनीक को बड़ा बाजार: एक देश में विकसित तकनीक को दूसरे ब्रिक्स बाजार में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने का रास्ता खुल सकता है।
  • पूंजी और कारोबार: निवेश के लिए परियोजनाएं और कारोबार के लिए नए साझेदार व ग्राहक तलाशने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
  • नीतियों पर असर: बिजनेस काउंसिल की सिफारिशें और फोरम के नतीजे ब्रिक्स की आर्थिक प्राथमिकताओं और आगे के कार्यक्रमों को प्रभावित कर सकते हैं।

जय श्रॉफ ने ब्रिक्स को लेकर क्या कहा?
ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल के अध्यक्ष जय श्रॉफ ने कहा कि भारत की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चार प्राथमिकताओं- लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता पर आधारित है। उन्होंने कहा कि ये प्राथमिकताएं केवल सरकारों के लिए महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि कारोबार के लिए भी उतनी ही प्रासंगिक हैं। श्रॉफ ने कहा कि ब्रिक्स को केवल बड़े बाजारों के समूह के रूप में देखने के बजाय ऐसे आर्थिक नेटवर्क के तौर पर देखना चाहिए, जहां सदस्य देशों की ताकत एक-दूसरे को मजबूत कर सके। उनके मुताबिक, एक अर्थव्यवस्था का संसाधन दूसरे देश के विनिर्माण को सहारा दे सकता है, एक बाजार में विकसित तकनीक दूसरे बाजार में विस्तार पा सकती है और पूंजी को नई परियोजनाएं मिल सकती हैं।



ब्रिक्स बिजनेस फोरम से किन क्षेत्रों को फायदा पहुंचाने की कोशिश है?
यह फोरम ब्रिक्स के निजी क्षेत्र से जुड़ाव का प्रमुख मंच है। यहां बिजनेस काउंसिल की ओर से तैयार सुझाव और सिफारिशें नीति निर्माताओं के सामने रखी जाती हैं। इन चर्चाओं से ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने, डिजिटल अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने, छोटे और मझोले कारोबार को मजबूत करने, साझा मानकों पर सहयोग और आपूर्ति श्रृंखला को बेहतर बनाने जैसी पहलों को दिशा मिल सकती है। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में व्यापार, डिजिटल तकनीक, वित्त, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक शासन में सुधार जैसे क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने पर जोर रहा है।

12 सितंबर से शुरू होने वाले मुख्य ब्रिक्स सम्मेलन में क्या मुद्दे रहेंगे?
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का मुख्य कार्यक्रम 12 सितंबर से शुरू होगा। इसमें सदस्य देशों के नेता भारत की अध्यक्षता के दौरान शुरू की गई पहलों और ब्रिक्स की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। सम्मेलन में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक मजबूत बनाने, सीमा पार भुगतान व्यवस्था को बेहतर करने, राष्ट्रीय मुद्राओं के अधिक इस्तेमाल, छोटे और मझोले कारोबार के विकास, डिजिटल व्यापार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। इसके अलावा ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु संबंधी चुनौतियों से निपटने, विकास वित्त, न्यू डेवलपमेंट बैंक के विस्तार और वैश्विक वित्तीय व राजनीतिक संस्थानों में सुधार भी प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकते हैं।
Amar Ujala Ltd published this content on September 11, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 11, 2026 at 05:34 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]