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08/11/2026 | Press release | Distributed by Public on 08/11/2026 01:07

IFGE: स्वच्छ मोबिलिटी के लिए भारत को इथेनॉल और ईवी दोनों की जरूरत, IFGE ने कहा- E20 से माइलेज पर मामूली असर

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IFGE: स्वच्छ मोबिलिटी के लिए भारत को इथेनॉल और ईवी दोनों की जरूरत, IFGE ने कहा- E20 से माइलेज पर मामूली असर

Tue, 11 Aug 2026 12:03 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Tue, 11 Aug 2026 12:03 PM IST
सार

इथेनॉल और इलेक्ट्रिक वाहनों के बीच चल रही बहस के बीच इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी (IFGE) ने स्पष्ट किया है कि भारत की स्वच्छ मोबिलिटी यात्रा में इथेनॉल और ईवी एक-दूसरे के प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि पूरक तकनीकें हैं।

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Ethanol And EV - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

भारत के क्लीन मोबिलिटी ट्रांजिशन को लेकर इथेनॉल और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) को आमने-सामने खड़ा करने के बजाय दोनों को एक-दूसरे का पूरक माना जाना चाहिए। इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी (IFGE) ने कहा है कि भारत को स्वच्छ और सुरक्षित ऊर्जा व्यवस्था की ओर बढ़ने के लिए अलग-अलग तकनीकों और ईंधनों का संतुलित इस्तेमाल करना होगा।

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यह बयान ऐसे समय आया है जब E20 पेट्रोल से वाहनों की माइलेज और इंजन की अनुकूलता को लेकर चर्चाएं और चिंताएं बनी हुई हैं।

क्या भारत को इथेनॉल और EV में से किसी एक को चुनना होगा?

IFGE के मुताबिक, भारत के लिए इथेनॉल और EV (ईवी) के बीच चुनाव करने की जरूरत नहीं है। देश को इथेनॉल, ईवी, हाइब्रिड, सीएनजी और हाइड्रोजन जैसी अलग-अलग तकनीकों को साथ लेकर चलना होगा।

इसकी एक बड़ी वजह देश की सड़कों पर मौजूद करीब 30 करोड़ इंटरनल कंब्शन इंजन (ICE) वाहन हैं। इन वाहनों के रहते अचानक पूरी तरह इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ना व्यावहारिक विकल्प नहीं है।

IFGE-वेस्ट, पुणे के क्षेत्रीय निदेशक दिलीप पाटिल ने कहा कि बहस को "इथेनॉल बनाम ईवी" के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। भारत को दोनों की जरूरत है।

उनके मुताबिक, E20 पेट्रोल कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता कम करने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने का तत्काल रास्ता देता है। जबकि ईवी, हाइब्रिड और दूसरी तकनीकें धीरे-धीरे अपना विस्तार जारी रखेंगी।

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E20 पेट्रोल से माइलेज कितनी कम हो सकती है?

E20 को लेकर सबसे बड़ी चिंताओं में से एक वाहन की फ्यूल एफिशिएंसी यानी माइलेज में संभावित कमी है।

IFGE ने बताया कि ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), इंडियन ऑयल और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के अध्ययनों के अनुसार, E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से E10 की तुलना में माइलेज में करीब 2 से 6 प्रतिशत की कमी देखी गई है।

यानी E20 से माइलेज पर असर पड़ सकता है, लेकिन IFGE के अनुसार यह प्रभाव सीमित दायरे में है।


क्या E20 से इंजन को नुकसान पहुंचने का खतरा है?

IFGE ने कहा कि अब तक किए गए परीक्षणों में व्यापक स्तर पर इंजन को नुकसान के संकेत नहीं मिले हैं।

संगठन के मुताबिक, नए वाहनों में इथेनॉल के अनुकूल सामग्री का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। जिससे वे अधिक इथेनॉल मिश्रित ईंधन के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो रहे हैं।

हालांकि, चिंता मुख्य रूप से पुराने वाहनों के ट्रांजिशन को लेकर है। यानी जिन वाहनों को पहले कम इथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल के लिए डिजाइन किया गया था, उनके लिए बदलाव अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।

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भारत में E20 पेट्रोल कब लागू हुआ?

IFGE के अनुसार, भारत ने अप्रैल 2025 तक देशभर में E20 की तैनाती पूरी कर ली थी।

अब देश में इथेनॉल की अधिक मात्रा वाले मिश्रणों, फ्लेक्स-फ्यूल वाहन (FFVs) और सेंकड जेनरेशन इथेनॉल के विस्तार पर ध्यान दिया जा रहा है।

इससे सरकार की दीर्घकालिक रणनीति भी स्पष्ट होती है। जिसमें घरेलू स्तर पर उत्पादित ईंधन का इस्तेमाल बढ़ाकर आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने का प्रयास किया जा रहा है।


इथेनॉल मिश्रण से भारत को कितना आर्थिक फायदा हुआ?

पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के कार्यक्रम का असर सिर्फ ईंधन के स्तर पर नहीं, बल्कि भारत के विदेशी मुद्रा भंडार और कच्चे तेल के आयात पर भी पड़ा है।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से जारी नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के चलते भारत ने इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2014-15 से अब तक 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत की है।

इसी अवधि में करीब 316 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल की जगह इथेनॉल के इस्तेमाल से कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की खपत को प्रतिस्थापित किया गया है।

भारत इथेनॉल मिश्रण पर इतना जोर क्यों दे रहा है?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर उपलब्ध ईंधन स्रोतों का इस्तेमाल बढ़ाना देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

सरकार इथेनॉल मिश्रण को इसी रणनीति के हिस्से के रूप में आगे बढ़ा रही है। इसका उद्देश्य आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना और देश में उत्पादित ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ाना है।

IFGE का मानना है कि भारत की स्वच्छ गतिशीलता की ओर बदलाव एक ही तकनीक पर निर्भर रहने के बजाय कई विकल्पों को साथ लेकर आगे बढ़ेगी। इथेनॉल मौजूदा ICE वाहनों के लिए तत्काल समाधान उपलब्ध करा सकता है। जबकि ईवी, हाइब्रिड, सीएनजी और हाइड्रोजन जैसी तकनीकें भविष्य की मोबिलिटी व्यवस्था को आकार देने में अपनी भूमिका निभाती रहेंगी।

Amar Ujala Ltd published this content on August 11, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on August 11, 2026 at 07:08 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]