09/18/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/18/2026 09:44
पेट्रोल भरवाने से पहले जेब में रखें कैश: एमपी में 2000 से अधिक बिल पर यूपीआई नहीं लेंगे पंप, इस दिन से लागू
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पेट्रोल भरवाने से पहले जेब में रखें कैश: एमपी में 2000 से अधिक बिल पर यूपीआई नहीं लेंगे पंप, इस दिन से लागू
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Fri, 18 Sep 2026 02:57 PM IST
सार
मध्य प्रदेश के 4700 पेट्रोल पंपों पर 16 अक्टूबर से 2000 रुपयेसे अधिक के भुगतान के लिए यूपीआई स्वीकार नहीं करने का फैसला किया गया है। एसोसिएशन का दावा है कि एमडीआर और जीएसटी से हर पंप पर करीब 17,400 रुपये महीना अतिरिक्त खर्च आएगा। पढ़ें पूरी खबर
मध्य प्रदेश में पेट्रोल पंपों पर 2000 रुपये से अधिक के ईंधन भुगतान को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। एमपी पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन ने ऐसे भुगतानों में यूपीआई स्वीकार नहीं करने का फैसला किया है। एसोसिएशन के मुताबिक यह व्यवस्था 16 अक्तूबर से प्रदेश के करीब 4700 पेट्रोल पंपों पर लागू की जाएगी।
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इसके बाद 2000 रुपये से ज्यादा के बिल का भुगतान ग्राहकों को नकद या अन्य उपलब्ध माध्यम से करना होगा। एसोसिएशन का कहना है कि 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर लागू होने से पंप संचालकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। एसोसिएशन अध्यक्ष अजय सिंह के मुताबिक ईंधन को रियायती श्रेणी में रखा गया है। 2000 रुपये की सीमा पार होने पर प्रत्येक लेन-देन पर 5 रुपये एमडीआर और उस पर 18 प्रतिशत जीएसटी मिलाकर करीब 5.90 रुपये का खर्च आता है।
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हर दिन 100 से ज्यादा बड़े यूपीआई लेन-देन का दावा
एसोसिएशन के अनुसार एक पेट्रोल पंप पर औसतन रोज 100 ऐसे लेन-देन होते हैं, जिनकी राशि 2000 रुपये से अधिक होती है। इस हिसाब से रोज करीब 500 रुपए एमडीआर और 90 रुपए जीएसटी के रूप में अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है। यानी प्रतिदिन करीब 590 रुपए और महीने में करीब 17 हजार 400 रुपये का अतिरिक्त खर्च पंप संचालक पर आता है। एसोसिएशन का दावा है कि प्रदेश के 4700 पेट्रोल पंपों को मिलाकर यह राशि करीब 8.17 करोड़ रुपये महीना बैठती है। संचालकों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल कारोबार में मार्जिन सीमित है और ऐसे में अतिरिक्त शुल्क का भार उठाना मुश्किल है।
नकद लेने से रोक नहीं, डिजिटल भुगतान अलग मामला
पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन का कहना है कि किसी को मुद्रा स्वीकार करने से रोकना कानूनी रूप से अलग विषय है, लेकिन डिजिटल भुगतान के संबंध में पंप संचालकों पर ऐसा कोई दबाव नहीं है। इसी आधार पर एसोसिएशन ने 2000 रुपए से अधिक के यूपीआई भुगतान को स्वीकार नहीं करने का निर्णय लिया है। एसोसिएशन के उपाध्यक्ष बृजेंद्र सिंह रघुवंशी ने कहा कि पंप संचालकों का खर्च लगातार बढ़ रहा है।
कर्मचारियों का वेतन, बिजली और दूसरे संचालन खर्च पहले से हैं। ऐसे में यूपीआई लेन-देन पर एमडीआर का अतिरिक्त खर्च पंप मालिकों के लिए परेशानी बढ़ा रहा है। उनका कहना है कि यह शुल्क पंप संचालकों के बजाय तेल कंपनियों को वहन करना चाहिए। एसोसिएशन का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में पेट्रोल पंप चलाना लगातार मुश्किल हो रहा है। संचालकों ने तेल कंपनियों और सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए हैं।
Amar Ujala Ltd published this content on September 18, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 18, 2026 at 15:44 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]