01/23/2026 | Press release | Distributed by Public on 01/23/2026 06:49
भूमिका
भारत में तेजी से हो रहे डिजिटल बदलावों ने शासन, वाणिज्य और नागरिक सेवाओं को अभूतपूर्व पैमाने पर बदल दिया है। डिजिटल पेमेंट व ई-कॉमर्स से लेकर ऑनलाइन सार्वजनिक सेवाओं की आपूर्ति तक, डिजिटल तकनीक रोजमर्रा की जिंदगी का एक जरूरी हिस्सा बन गई है। जैसे-जैसे डिजिटल सुविधाओं को अपनाने की गति तेज हो रही है, साइबरस्पेस की सुरक्षा एक राष्ट्रीय प्राथमिकता बन गई है।
ऑनलाइन धोखाधड़ी, फिशिंग, रैंसमवेयर के हमलों, एआई-आधारित घोटालों और जरूरी डिजिटल अवसंरचना पर बढ़ते खतरों को देखते हुए, एक समन्वित एवं सुदृढ़ साइबर सुरक्षा ढांचे की जरूरत पहले से कहीं अधिक हो गई है। इस चुनौती को समझते हुए, भारत सरकार ने एक सुरक्षित, भरोसेमंद और संरक्षित डिजिटल माहौल सुनिश्चित करने हेतु ठोस नीतियां, संस्थागत व्यवस्थाएं और संचालन संबंधी क्षमताएं लागू की हैं।
भारत के साइबर सुरक्षा संरचना के केन्द्र में इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (सीईआरटी-इन) है, जो इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के तहत काम करती है और जिसे सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 द्वारा अनिवार्य किया गया है। सीईआरटी-इन घटना प्रबंधन की देखरेख करके, प्रणालीगत मजबूती को बढ़ाकर और सरकार, उद्योग एवं समाज में सुरक्षित डिजिटल तरीकों को बढ़ावा देकर राष्ट्रीय साइबर रक्षा के लिए संस्थागत गहराई प्रदान करती है। इसका काम भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल इकोसिस्टम की सुरक्षा को मजबूत करना और डिजिटल प्लेटफॉर्म एवं सेवाओं में विश्वास को बढ़ावा देना है।
आज के आपस में जुड़े डिजिटल माहौल में, साइबर सुरक्षा अब महज एक तकनीकी चिंता भर नहीं रह गई है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और जनता के भरोसे का एक बुनियादी स्तंभ बन गई है। डिजिटल प्रणाली के बड़े पैमाने और उसकी जटिलताओं को देखते हुए निरंतर सतर्कता, मिलकर काम करने और मजबूत संस्थागत नेतृत्व की जरूरत है। नीतिगत निर्देशों को संचालन संबंधी तैयारियों के साथ मिलाकर, सीईआरटी-इन न सिर्फ उभरते हुए साइबर खतरों का जवाब देता है, बल्कि जोखिमों का अनुमान भी लगाता है, सुदृढ़ता का निर्माण करता है और भारत की डिजिटल प्रगति का सुरक्षित, समावेशी एवं टिकाऊ बने रहना सुनिश्चित करता है।
भारत का फैलता डिजिटल परिदृश्य
पिछले एक दशक में, भारत में डिजिटल प्रसार तेजी से बढ़ा है। इस प्रसार की वजह इंटरनेट का बढ़ते उपयोग, स्मार्टफोन का बड़े पैमाने पर अपनाए जाने और डिजिटल सार्वजनिक सेवाओं में हुए तेज विस्तार में निहित है। वर्ष 2025 तक, भारत में इंटरनेट कनेक्शन 100 करोड़ का आंकड़ा पार करते हुए मार्च 2014 के 25.15 करोड़ की तुलना में 100.29 करोड़ तक पहुंच गया। प्रति वायरलेस डेटा ग्राहक औसत मासिक डेटा खपत लगभग 399 गुना बढ़ गई, जो 2014 में 61.66 एमबी से बढ़कर 2025 में 24.01 जीबी हो गई। यह दुनिया में सबसे अधिक खपतों में से एक है।
इस ठोस डिजिटल बुनियाद ने डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में जबरदस्त वृद्धि को संभव बनाया है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) भारत के डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम का मुख्य स्तंभ बनकर उभरा है। अकेले दिसंबर 2025 में, यूपीआई ने 27 लाख करोड़ रुपये से अधिक के 21 बिलियन से अधिक लेन-देन किए। इस डिजिटल प्रसार से सुविधा एवं समावेशन काफी बढ़ा तो है, लेकिन इसने साइबर खतरों के लिए हमले की सतह को भी फैला दिया है। इन जोखिमों से निपटने हेतु, केन्द्रीय बजट 2025-26 में साइबर सुरक्षा के लिए 782 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जो भारत की डिजिटल अवसंरचना को सुरक्षित करने पर सरकार के ठोस ध्यान को दर्शाता है।
इस संदर्भ में, सीईआरटी-इनकी भूमिका भारत के साइबर सुरक्षा ढांचे की बुनियाद के तौर पर बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। सीईआरटी-इनके तहत काम करने वाली सीएसआईआरटी-फिन यानी कंप्यूटर सिक्योरिटी इंसिडेंट रिस्पॉन्स टीम फॉर फाइनेंशियल सेक्टर घटनाओं का समन्वित जवाब देकर, जानकारी साझा करके और बैंकिंग, वित्तीय सेवा एवं बीमा (बीएफएसआई) क्षेत्र को मार्गदर्शन व सहायता प्रदान कर वित्तीय क्षेत्र में साइबर सुरक्षा को मजबूत करती है। इसी तरह, सीईआरटी-इनके एक विस्तारित अंग के रूप में काम करने वाला सीएसआईआरटी-पावर साइबर घटनाओं का समन्वय व विश्लेषण करके, सीईआरटी-इनसे प्राप्त साइबर खतरे की खुफिया जानकारी पर कार्रवाई करके, सीईआरटी-इनद्वारा प्रदान किए गए स्थितिजन्य जागरूकता विवरण के आधार पर रोकथाम के सक्रिय उपाय करके, साइबर सुरक्षा मूल्यांकन सुनिश्चित करके एवं सीईआरटी-इनके साइबर स्वच्छता केन्द्र (सीएसके) द्वारा रिपोर्ट की गई कमजोरियों को कम करके ऊर्जा क्षेत्र में साइबर सुरक्षा की स्थिति को सुदृढ़ करता है।
राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा हेतु सीईआरटी-इन के मुख्य कार्य
सीईआरटी-इन भारत में साइबर घटनाओं पर जवाबी कार्रवाई करने वाली राष्ट्रीय एजेंसी है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 70बी के तहत इसके कार्योंमें साइबर हमलों को रोकना, साइबर खतरों की वास्तविक समय में निगरानी और साइबर घटनाओं को कम करने व रोकने हेतु विभन्न हितधारकों के साथ तेजी से समन्वय स्थापित करना शामिल है।
सीईआरटी-इन के मुख्य कार्यों में शामिल हैं:
संचालन संबंधी निरंतर जुड़ाव और समन्वित प्रतिक्रिया तंत्र के जरिए, सीईआरटी-इन साइबर घटनाओं को तेजी से नियंत्रित करना सुनिश्चित करता है और सभी क्षेत्रों में प्रभावित प्रणालियों को ठीक करने में मदद करता है। इसकी कार्रवाई योग्य खुफिया जानकारियों एवं मार्गदर्शन का निरंतर प्रवाह हितधारकों को तैयारियों को सुदृढ़ करने, प्रणालीगत जोखिम को कम करने और बदलते खतरों का प्रभावी ढंग से जवाब देने में सक्षम बनाता है। संयुक्त रूप से, ये प्रयास व्यवधानों को कम करने, सामान्य स्थिति में लौटने में तेजी लाने और भारत के डिजिटल इकोसिस्टम में विश्वास को मजबूत करने में योगदान करते हैं।
भारत की साइबर सुदृढ़ता रणनीति के केंद्र में सीईआरटी-इन
सीईआरटी-इन खतरों की सक्रियता से पहचान, घटनाओं के विरुद्ध तेज प्रतिक्रिया और बड़े पैमाने पर क्षमता के विकास के जरिए भारत की राष्ट्रीय साइबर रक्षा संरचना का आधारस्तंभ बना हुआ है। वर्ष 2025 में इसकी उपलब्धियां संस्थागत मजबूती को बढ़ाने, जरूरी डिजिटल अवसंरचना को सुरक्षित करने और भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल इकोसिस्टम में विश्वास को मजबूत करने के इसके निरंतर एवं व्यवस्थित प्रयासों को दर्शाती हैं।
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सीईआरटी-इन की 2025 की मुख्य उपलब्धियों का एक अवलोकन
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वर्ष 2025 में, सीईआरटी-इन ने रिपोर्ट, श्वेत-पत्र, दिशा-निर्देश, परामर्शी और भेद्यता संबंधी विवरण (वल्नरेबिलिटी नोट्स)का एक पूरा सेट भी प्रकाशित किया, जो संगठनों और हितधारकों को साइबर जोखिम को कम करने व मज़बूती बनाने के लिए समय पर तथा काम आने वाले मार्गदर्शन देता है।
वर्ष 2025 में प्रकाशित रिपोर्ट और दिशानिर्देश
वर्ष 2025 में सीईआरटी-इन की उपलब्धियां भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल इकोसिस्टम की सुरक्षा में उसकी अहम भूमिका को दर्शाती हैं। बड़े पैमाने पर क्षमता विकास, सख्त मूल्यांकन, जागरूकता की निरंतर कोशिशों और भविष्योन्मुखी दिशा-निर्देश एवं तकनीकी रूपरेखा जारी करके, सीईआरटी-इन ने सरकार, उद्योग जगत और समाज में संस्थागत तैयारियों को मजबूत किया है।
सीईआरटी-इन द्वारा समर्थित संस्थागत ढांचे
राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति को लागू करने और रणनीतिक इरादों को जमीनी कार्रवाई में बदलने हेतु, सीईआरटी-इन कुछ खास संस्थागत ढांचे को संभालता है। ये तंत्र सभी क्षेत्रों, राज्यों और नागरिकों के बीच व्यवस्थित समन्वय, बचाव के उपाय और तेजी से प्रतिक्रिया करने की क्षमता प्रदान करते हैं।
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दिसंबर 2025 तक, सीएसके भारत की 98प्रतिशत डिजिटल आबादी को कवर करता है और बॉटनेट एवं मैलवेयर संक्रमण के बारे में बड़े पैमाने पर नोटिफिकेशन भेजता है। यह प्रमुख क्षेत्रों के 1,427 संगठनों के साथ मिलकर मैलवेयर का पता लगाने और उसे ठीक करने में मदद करता है, जबकि इसके फ्री बॉटनेट-रिमूवल टूल्स के 89.55 लाख डाउनलोड एक नागरिक-केन्द्रित निवारक साइबर सुरक्षा पहल के रूप में इसकी भूमिका को दर्शाते हैं। |
कुल मिलाकर, ये संस्थागत ढांचे साइबर सुरक्षा के लिए संपूर्ण सरकार एवं संपूर्ण समाज वाले दृष्टिकोण को संभव बनाते हैं। रोकथाम, तैयारी, प्रतिक्रिया और रिकवरी को एकीकृत करके। यह बदलते साइबर खतरों के बीच भारत के डिजिटल इकोसिस्टम का सुदृढ़, अनुकूल और सुरक्षित बना रहना सुनिश्चित करता है। विभिन्न परतों वाला यह संस्थागत डिजाइन राष्ट्रीय तैयारियों को मजबूत करने के साथ-साथ महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं तथा नागरिकों, दोनों की सुरक्षा भी करता है।
साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में भारत के नेतृत्व को वैश्विक मान्यता
घरेलू मोर्चे पर सीईआरटी-इन की निरंतर कोशिशों का प्रभाव अब वैश्विक स्तर पर भी दिख रहा है। इसके संचालन के पैमाने, तकनीक-आधारित तरीके और सहयोगी साइबर शासन पर जोर ने भारत को अंतरराष्ट्रीय साइबर सुरक्षा व्यवस्था में एक भरोसेमंद एवं जिम्मेदार हिस्सेदार के तौर पर स्थापित किया है।
कुल मिलाकर, ये मान्यताएं वैश्विक साइबर सुरक्षा और एआई संबंधी जोखिम के प्रशासन को आकार देने में सीईआरटी-इन के बढ़ते प्रभाव एवं नेतृत्व को दर्शाती हैं। ये साइबर सुदृढ़ता, खतरों से जुड़ी खुफिया जानकारियों के साझाकरण और एआई संबंधी जोखिम के जिम्मेदार प्रशासन से संबंधित वैश्विक चर्चाओं को आकार देने में सीईआरटी-इन की उभरती भूमिका को रेखांकित करती हैं।
निष्कर्ष
साइबर खतरों की बढ़ती जटिलता और पैमाने के बीच, सीईआरटी-इन भारत के साइबर सुरक्षा इकोसिस्टम को मजबूती प्रदान कर रहा है। साइबर जोखिमों की निरंतर पहचान करके व उन्हें कम करके, सीईआरटी-इन ने राष्ट्रीय साइबर सुदृढ़ता को काफी मजबूत किया है। संस्थागत ढांचे और क्षेत्र-विशिष्ट एवं राज्य सीएसआईआरटी से लेकर नागरिक-केन्द्रित जागरूकता कार्यक्रमों तक, इसकी विभिन्न पहलें भारत की आईसीटी अवसंरचना को सुरक्षित करने और उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा हेतु एक व्यापक एवं दूरदर्शी दृष्टिकोण का प्रदर्शन करती हैं। सीईआरटी-इन के एआई-आधारित नवाचारों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलना साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में भारत के नेतृत्व को और भी मजबूत करता है। कुल मिलाकर, ये निरंतर प्रयास साइबरस्पेस की सुरक्षा करने और सभी नागरिकों के लिए एक सुरक्षित, भरोसेमंद एवं सुरक्षित डिजिटल भविष्य सुनिश्चित करने के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं।
संदर्भ
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
दूरसंचार मंत्रालय
गृह मंत्रालय
पीआईबी मुख्यालय:
द420.इन
पीआईबी शोध
सीईआरटी-इन: साइबर खतरों के विरुद्ध भारत का अग्रिम पंक्ति का रक्षक
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पीके/केसी/आर