वैदिक ज्योतिष में केतु को विरक्ति, आध्यात्म, रहस्य और कर्म से जुड़े परिणामों का कारक ग्रह माना जाता है। केतु राहु की तरह एक राशि में 18 महीनों तक एक राशि में रहते हैं। साल 2026 के अंत में केतु चंद्रमा के स्वामित्व वाली राशि कर्क में प्रवेश करेंगे। केतु 5 दिसंबर 2026 को कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। केतु के 18 महीने बाद राशि परिवर्तन करने से इसका प्रभाव सभी 12 राशियों के जातकों के ऊपर देखने को मिलेगा। लेकिन कुछ राशियां ऐसी होंगी जिनके ऊपर ज्यादा प्रभाव देखने को मिलेगा।
वृषभ राशि - फोटो : amar ujala
वृषभ राशि
वृषभ राशि वालों के लिए कर्क राशि में केतु का गोचर आपके तीसरे भाव में होगा। कुंडली का तीसरा भाव साहस, प्रयास, पराक्रम और संचार से संबंधित होता है। ऐसे में इस दौरान आपके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी और नई उपलब्धियां हासिल होंगी। करियर में नई तरह की जिम्मेदारी मिल सकती है। कारोबार में नए-नए लोगों से संपर्क स्थापित होगा। आपको अचानक धन लाभ के साथ-साथ कोई नया मुकाम हासिल हो सकता है। आने वाले समय में आपको आर्थिक मोर्चे पर मजबूती मिलेगी।
तुला राशि - फोटो : amar ujala
तुला राशि
तुला राशि वालों पर कर्क राशि में केतु का गोचर आपके कर्म भाव यानी दशम में होगा। यह भाव आपके नौकरी, करियर, पद-प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ होता है। इससे आपको कार्यक्षेत्र में बड़ा बदलाव और जिम्मेदारी मिलने के योग बन सकते हैं। जो लोग लंबे समय में करियर में बदलाव की प्रतिक्षा कर रहे हैं उनको कोई नया अवसर मिल सकता है। कार्यक्षेत्र में नई उपलब्धि हासिल हो सकती है।
कुंभ राशि - फोटो : amar ujala
कुंभ राशि
कर्क राशि में केतु का गोचर कुंभ राशि वालों के लिए छठे भाव में होने वाला है। ज्योतिष में छठा भाव नौकरी, शत्रु कर्ज और प्रतियोगिता से संबंधित होता है। ऐसे में आपको इस दौरान एक साथ कई तरह की मुश्किल परिस्थितियों का सामना आपको करना पड़ सकता है। जिसमें आपको अच्छी सफलता मिल सकती है। नौकरी में नई तरह की जिम्मेदारियों का सामना करना पड़ सकता है। आपको अपनी मेहनत का फल मिलेगा।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।