01/21/2026 | Press release | Distributed by Public on 01/21/2026 06:55
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी, रेल और सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने दावोस में विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक 2026 के दौरान विभिन्न वार्ताओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर और डीप टेक इनोवेशन के प्रति भारत के व्यापक दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला।
एआई इम्पैक्ट समिट में एआई के प्रभाव, विकासशील देशों और सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
श्री वैष्णव ने कहा कि आगामी एआई इम्पैक्ट समिट को परिणामों पर स्पष्ट ध्यान केंद्रित करते हुए डिजाइन किया गया है। उन्होंने कहा कि समिट का पहला उद्देश्य प्रभाव है। इसका अर्थ यह है कि एआई मॉडल, एप्लिकेशन और समग्र एआई इकोसिस्टम का उपयोग दक्षता में सुधार, उत्पादकता बढ़ाने और अर्थव्यवस्था के लिए गुणक प्रभाव पैदा करने के लिए कैसे किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि दूसरा उद्देश्य विशेष रूप से भारत और विकासशील देशों के लिए सुलभता है। यूपीआई और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) स्टैक के निर्माण में भारत की सफलता का उदाहरण देते हुए, श्री वैष्णव ने कहा कि अब दुनिया भारत की ओर देख रही है कि क्या एआई के लिए भी इसी तरह का विस्तार योग्य और किफायती स्टैक बनाया जा सकता है।
श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि एआई इम्पैक्ट समिट का तीसरा उद्देश्य सुरक्षा है। उन्होंने समुचित सुरक्षा उपायों, दिशा-निर्देशों और सुरक्षा संबंधी उपायों का निर्माण करके एआई से संबंधित आशंकाओं को दूर करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि एआई के लिए नियामक और सुरक्षा ढांचा भी भारत में ही बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि शिखर सम्मेलन में वैश्विक दिग्गज और प्रौद्योगिकी क्षेत्र की अग्रणी हस्तियां भाग लेंगी, साथ ही निवेश की घोषणाएं की जाएंगी और भारत के एआई मॉडल को लॉन्च किया जाएगा।
स्टार्टअप की वृद्धि और डीप टेक की गति
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत में अब लगभग 200,000 स्टार्टअप हैं और यह वैश्विक स्तर पर शीर्ष तीन स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में इसमें मूलभूत बदलाव आया है, जो डीप टेक पर विशेष तौर पर ध्यान केंद्रित करने से संभव हुआ है।
उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि 24 भारतीय स्टार्टअप चिप्स डिजाइन कर रहे हैं, जो स्टार्टअप के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में से एक है, और उनमें से 18 को पहले ही वेंचर कैपिटल फंडिंग मिल चुकी है, जो भारत की डीप-टेक क्षमताओं में मजबूत विश्वास को दर्शाता है।
सेमीकंडक्टरों के लिए रोडमैप
श्री वैष्णव ने भारत की सेमीकंडक्टर रणनीति की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि वैश्विक चिप वॉल्यूम का लगभग 75 प्रतिशत 28नैनोमीटर से 90नैनोमीटर रेंज में आता है, जिसमें इलेक्ट्रिक वाहन, ऑटोमोबाइल, रेल, रक्षा प्रणाली, दूरसंचार उपकरण और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स का एक बड़ा हिस्सा शामिल है।
उन्होंने कहा कि भारत उन्नत स्तर पर आगे बढ़ने से पहले इस क्षेत्र में विनिर्माण में महारत हासिल करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। आईबीएम सहित उद्योगजगत के भागीदारों के साथ मिलकर काम करते हुए, भारत ने 2030 तक 28नैनोमीटर से 7नैनोमीटर और 2032 तक 3नैनोमीटर तक पहुंचने का एक स्पष्ट मार्ग निर्धारित किया है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर शीर्ष चार या पांच सेमीकंडक्टर उत्पादक देशों में शामिल होगा। यह उपलब्धि भारत के विशाल प्रतिभा भंडार, संपूर्ण डिजाइन क्षमताएं, विस्तारित विनिर्माण आधार और तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार के बल पर संभव होगी।
श्री वैष्णव ने दावोस में गूगल क्लाउड के सीईओ थॉमस कुरियन से भी मुलाकात की। गूगल भारत के एआई इकोसिस्टम के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत कर रहा है, जिसमें आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में 15 बिलियन डॉलर का एआई डेटा सेंटर और भारतीय स्टार्टअप के साथ साझेदारी शामिल है। उन्होंने दावोस में मेटा के मुख्य वैश्विक मामलों के अधिकारी जोएल कपलान से भी मुलाकात की और डीपफेक और एआई द्वारा निर्मित सामग्री से सोशल मीडिया के उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा पर चर्चा की। मेटा ने श्री वैष्णव को उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के लिए किए जा रहे अपने प्रयासों की जानकारी दी।
▪️Bharat is building a complete semiconductor ecosystem covering design, fabrication, packaging, materials, gases and equipment.
▪️Global industry sees Bharat as an increasingly reliable supply-chain partner.
▪️Google is strengthening its commitment to India's AI ecosystem,… pic.twitter.com/IL3ZC5Bjl4
The world looks at Bharat as a key driver of global innovation.
Met Mr. Arvind Krishna, CEO, @IBM and Mr. Joel Kaplan, Chief Global Affairs Officer, @Meta.
WEF, Davos pic.twitter.com/Mz0C8C64xx
भारत संपूर्ण एआई स्टैक पर काम कर रहा है
श्री वैष्णव ने बताया कि एआई इकोसिस्टम में पांच स्तर यानी एप्लिकेशन स्तर, मॉडल स्तर, सेमीकंडक्टर या चिप स्तर, डेटा सेंटर जैसे बुनियादी ढांचे और ऊर्जा स्तर होते हैं। उन्होंने कहा कि भारत अपनी अर्थव्यवस्था के आकार, प्रौद्योगिकी-प्रेमी आबादी और भारतीय आईटी सेवा कंपनियों की वैश्विक उपस्थिति को देखते हुए इन सभी पांच स्तरों पर काम कर रहा है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अनुप्रयोग और उपयोग स्तर निवेश पर उच्चतम प्रतिफल प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि भारत को उद्यम कार्यप्रवाहों को शीघ्रता से समझकर और एआई प्रौद्योगिकियों को प्रभावी ढंग से लागू करके एआई अनुप्रयोगों में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने बताया कि भारतीय आईटी सेवा कंपनियां पहले ही इस दिशा में आगे बढ़ चुकी हैं और एआई क्षेत्र में नियुक्तियों में लगभग 33 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
छोटे मॉडल, संप्रभु क्षमता और दक्षता
श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि आज लगभग 95 प्रतिशत एआई कार्यभार छोटे मॉडलों द्वारा संभाला जाता है और अधिकांश उद्यमों की आवश्यकताओं के लिए 50 अरब पैरामीटर वाला मॉडल पर्याप्त है। उन्होंने कहा कि भारत लगभग 12 विशिष्ट एआई मॉडलों का एक समूह विकसित कर रहा है, जो छोटे जीपीयू क्लस्टरों पर चल सकते हैं और बहुत बड़ी आबादी को कम लागत पर एआई सेवाएं प्रदान कर सकते हैं।
उन्होंने संप्रभु एआई मॉडलों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि वैश्विक एआई संसाधनों तक पहुंच प्रतिबंधित होने की स्थिति में लचीलापन सुनिश्चित करने के लिए ऐसे मॉडल आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि दक्षता, वहनीयता और संप्रभुता पर केंद्रित यह दृष्टिकोण भारत को वैश्विक एआई प्रतिस्पर्धा में प्रभावी ढंग से भाग लेने के लिए तैयार करता है।
श्री वैष्णव ने कहा कि इनमें से कई मॉडलों का विभिन्न मापदंडों पर और वास्तविक जीवन के उपयोग के मामलों में परीक्षण किया गया है और भारत जल्द ही मॉडलों की पूरी श्रृंखला को लॉन्च करने की स्थिति में होगा।
एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा तत्परता
इंफ्रास्ट्रक्चर के विषय पर श्री वैष्णव ने कहा कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में लगभग 70 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश पहले ही स्वीकृत हो चुका है और इसे लागू किया जा रहा है। उन्होंने एआई इको-सिस्टम के लिए ऊर्जा क्षेत्र को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भारत ने शक्ति अधिनियम के माध्यम से निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए परमाणु ऊर्जा के द्वार खोल दिए हैं, जो संपूर्ण एआई प्रणाली को सहयोग प्रदान करेगा।
कई दशकों का एआई सफर और नवाचार की क्षमता
श्री वैष्णव ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता की क्रांति कई दशकों में घटेगी और दुनिया अभी भी प्रारंभिक अवस्था में है। उन्होंने केवल कुछ वाट बिजली पर काम करने वाले मानव मस्तिष्क की तुलना, जो है, सैकड़ों मेगावाट बिजली की खपत करने वाले कृत्रिम बुद्धिमत्ता के डेटा केंद्रों से की। उन्होंने कहा कि यह अंतर भविष्य में नवाचार की अपार संभावनाओं को उजागर करता है।
उन्होंने कहा कि कई भारतीय स्टार्टअप अगली पीढ़ी के एआई मॉडल बनाने के लिए इंजीनियरिंग और दक्षता में अभूतपूर्व प्रगति पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिससे देश के लिए महत्वपूर्ण अवसर खुल रहे हैं।
मांग सृजनकर्ता के रूप में सरकार और फोकस क्षेत्र
श्री वैष्णव ने कहा कि सरकार पहले से ही एआई की मांग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां स्पष्ट वाणिज्यिक मॉडल मौजूद नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार मौसम पूर्वानुमान, कृषि और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों के लिए एआई के कई उपयोगों पर काम कर रही है, जिसमें भविष्यसूचक और निवारक स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जहां भारत के पास वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करने का अवसर है।
उन्होंने कहा कि सरकार संप्रभु एआई मॉडल का उपयोग करके अनुप्रयोगों के विकास के लिए धन देगी और बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से उनका समर्थन करेगी, जिससे एआई प्रौद्योगिकियों का व्यापक प्रसार संभव होगा और प्रतिभाओं की आपूर्ति में मजबूती आएगी।
उद्योग जगत का सहयोग और कौशल विकास
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत का एआई मिशन, सेमीकंडक्टर कार्यक्रम की तरह ही, उद्योग जगत के साथ गहन परामर्श के बाद तैयार किया गया है। उन्होंने उद्योग जगत के दिग्गजों से मुख्य रूप से अनुरोध किया कि वे एआई-अनुकूल पाठ्यक्रम विकसित करने में सहयोग दें, ताकि कॉलेजों से स्नातक होने वाले छात्र, सेमीकंडक्टर और 5जी के क्षेत्र में पहले किए गए प्रयासों की तरह ही, एआई-आधारित औद्योगिक परिवर्तन के लिए अच्छी तरह से तैयार हों।
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