अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस की वरिष्ठ अधिकारी डॉ. हेइडी ओवरटन को खाद्य एवं औषधि प्रशासन यानी FDA का अगला आयुक्त बनाने के लिए नामित किया है। अगर अमेरिकी सीनेट उनकी नियुक्ति को मंजूरी देती है, तो वह इस बेहद महत्वपूर्ण संस्था की जिम्मेदारी संभालेंगी। FDA अमेरिका में दवाओं, वैक्सीन, चिकित्सा उपकरणों और खाद्य पदार्थों की सुरक्षा और नियमन से जुड़े बड़े फैसले करता है। ओवरटन फिलहाल व्हाइट हाउस के घरेलू नीति परिषद में उपनिदेशक के पद पर हैं और ट्रंप प्रशासन की स्वास्थ्य नीतियों को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं।
ओवरटन की पढ़ाई और करियर कितना मजबूत?
हेइडी ओवरटन मेडिकल डॉक्टर हैं। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू मैक्सिको से मेडिकल की पढ़ाई की। इसके बाद जॉन्स हॉपकिन्स में जनरल सर्जरी का प्रशिक्षण लिया और क्लिनिकल जांच से जुड़ी उच्च शिक्षा भी हासिल की। ट्रंप प्रशासन में आने से पहले वह कंजर्वेटिव थिंक टैंक अमेरिका फर्स्ट पॉलिसी इंस्टीट्यूट में मुख्य नीति अधिकारी के रूप में काम कर चुकी हैं। यानी उनका अनुभव केवल चिकित्सा तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य नीति और राजनीतिक प्रशासन से भी जुड़ा रहा है।
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ट्रंप के भरोसेमंद लोगों में कैसे शामिल हुईं?
दूसरे कार्यकाल में ओवरटन ट्रंप की कई स्वास्थ्य योजनाओं में उनके साथ दिखाई दी हैं। दवा की कीमत कम करने, नई दवाओं को तेजी से मंजूरी देने और स्वास्थ्य नीति में बदलाव से जुड़े कई कार्यक्रमों में उन्होंने भूमिका निभाई है। ट्रंप ने उनके नाम की घोषणा करते हुए उन्हें बेहद सक्षम और भरोसेमंद अधिकारी बताया तथा तेज इलाज, चिकित्सा नवाचार और दवाओं की कम कीमत जैसे लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की उम्मीद जताई। स्वास्थ्य मंत्री रॉबर्ट एफ. कैनेडी जूनियर ने भी ओवरटन के फैसले लेने की क्षमता और प्रशासनिक अनुशासन की तारीफ की है।
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वैक्सीन नीति को लेकर क्यों उठे सवाल?
ओवरटन की नियुक्ति का सबसे विवादित पक्ष उनकी वैक्सीन नीति से जुड़ी भूमिका है। हाल में वह उस कार्यक्रम में ट्रंप के साथ खड़ी थीं, जिसमें बच्चों के टीकाकरण से जुड़ी नीति में बड़े बदलावों की घोषणा की गई थी। इसमें खसरा, कण्ठमाला और रूबेला यानी एमएमआर वैक्सीन को अलग-अलग टीकों में बांटने की योजना भी शामिल थी। चिकित्सा जगत के कई लोगों ने इस नीति पर सवाल उठाए हैं। इसी वजह से ओवरटन की FDA में संभावित भूमिका को लेकर वैज्ञानिक और स्वास्थ्य क्षेत्र में बहस तेज हो गई है।
गर्भपात की दवाओं पर क्या है ओवरटन का रुख?
ओवरटन गर्भपात की दवाओं को लेकर भी सख्त रुख रखती हैं। वह ऐसी दवाओं की उपलब्धता और ऑनलाइन इस्तेमाल से जुड़ी मौजूदा व्यवस्था की आलोचना कर चुकी हैं। अगर सीनेट से उनकी नियुक्ति मंजूर होती है, तो FDA के सामने गर्भपात की दवाओं से जुड़े नियमों की समीक्षा भी एक बड़ा मुद्दा हो सकता है। अमेरिका में गर्भपात को लेकर पहले से ही राजनीतिक और कानूनी विवाद चल रहा है। इसलिए इस मुद्दे पर ओवरटन के फैसलों पर खास नजर रहेगी।
FDA को संभालते ही किन बड़ी चुनौतियों का सामना होगा?
ओवरटन ऐसे समय FDA की कमान संभाल सकती हैं, जब संस्था पहले ही नेतृत्व और कर्मचारियों से जुड़ी बड़ी चुनौतियों से गुजर रही है। पूर्व आयुक्त डॉ. मार्टी मकारी ने मई में पद छोड़ दिया था। उनके कार्यकाल में ई-सिगरेट, गर्भपात की दवाओं और नई दवाओं की मंजूरी जैसे मुद्दों पर विवाद रहे। FDA में बड़ी संख्या में कर्मचारियों के जाने से भी संस्था पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में नई प्रमुख से प्रशासनिक स्थिरता और जनता का भरोसा बहाल करने की उम्मीद होगी।
क्या दवाओं की मंजूरी का तरीका भी बदल सकता है?
FDA की एक बड़ी जिम्मेदारी नई दवाओं और चिकित्सा उत्पादों की जांच तथा मंजूरी देना है। ट्रंप प्रशासन तेज मंजूरी और चिकित्सा नवाचार को बढ़ावा देने की बात करता रहा है। दूसरी ओर, FDA से जुड़े वैज्ञानिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ सुरक्षा मानकों को लेकर सतर्क रहने की जरूरत पर जोर देते हैं। ओवरटन को इन दोनों के बीच संतुलन बनाना होगा। खासकर दुर्लभ बीमारियों की दवाओं, जैव-तकनीकी उत्पादों और नई चिकित्सा तकनीकों से जुड़े फैसले उनके सामने महत्वपूर्ण चुनौती होंगे।
खाद्य पदार्थों और अल्ट्राप्रोसेस्ड फूड पर भी नजर क्यों होगी?
FDA केवल दवाओं और वैक्सीन तक सीमित नहीं है। खाद्य सुरक्षा भी उसकी जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ट्रंप प्रशासन में स्वास्थ्य मंत्री रॉबर्ट एफ. कैनेडी जूनियर ने अल्ट्राप्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों को लेकर लगातार सवाल उठाए हैं। ऐसे खाद्य पदार्थों की पहचान और उनके नियमन को लेकर नई नीति तैयार करने की कोशिश चल रही है। इसलिए ओवरटन के सामने खाद्य कंपनियों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के हितों के बीच संतुलन बनाना भी अहम होगा।
पेप्टाइड और दूसरी नई दवाओं पर क्या फैसला होगा?
FDA के सामने पेप्टाइड जैसी नई और तेजी से लोकप्रिय हो रही चिकित्सा सामग्री का नियमन भी एक बड़ा मुद्दा है। स्वास्थ्य क्षेत्र के कुछ सलाहकारों ने कई पेप्टाइड उत्पादों तक पहुंच आसान बनाने की सिफारिश की है, जबकि FDA के वैज्ञानिकों ने इनके सुरक्षित और प्रभावी होने के पर्याप्त प्रमाणों को लेकर सावधानी बरती है। ओवरटन को यह तय करना होगा कि ऐसे उत्पादों के लिए नियम कितने सख्त रखे जाएं और नए उपचारों को बाजार में आने का रास्ता कितना आसान बनाया जाए।
क्या सीनेट में ओवरटन की राह आसान होगी?
ओवरटन अभी FDA की स्थायी प्रमुख नहीं बनी हैं। उनके नामांकन को अमेरिकी सीनेट से मंजूरी मिलना जरूरी है। सीनेट की स्वास्थ्य, शिक्षा, श्रम और पेंशन समिति में उनसे उनकी नीतियों और स्वास्थ्य से जुड़े रुख पर सवाल पूछे जा सकते हैं। समिति के अध्यक्ष रिपब्लिकन सीनेटर बिल कैसिडी खुद ट्रंप प्रशासन की कुछ वैक्सीन नीतियों के आलोचक रहे हैं। इसलिए ओवरटन के लिए पुष्टि की प्रक्रिया पूरी तरह आसान नहीं मानी जा रही है।
डेमोक्रेट्स क्यों कर रहे विरोध?
ओवरटन के नामांकन पर डेमोक्रेटिक सांसदों ने कड़ी आपत्ति जताई है। आलोचकों का कहना है कि उनका स्वास्थ्य नीति को लेकर राजनीतिक रुख FDA जैसी वैज्ञानिक संस्था के लिए चिंता का विषय हो सकता है। कुछ डेमोक्रेट नेताओं ने उन्हें गर्भपात विरोधी और कट्टरपंथी विचारों वाली उम्मीदवार बताया है। दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ओवरटन उनकी स्वास्थ्य नीतियों को लागू करने के लिए सक्षम और भरोसेमंद अधिकारी हैं।
FDA के लिए ओवरटन की नियुक्ति क्यों महत्वपूर्ण?
FDA अमेरिका की स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे प्रभावशाली संस्थाओं में से एक है। इसके फैसलों का असर केवल अमेरिका में रहने वाले लोगों पर नहीं पड़ता, बल्कि दुनिया भर की दवा कंपनियों, चिकित्सा अनुसंधान और वैक्सीन बाजार पर भी पड़ता है। ओवरटन की नियुक्ति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह ऐसे समय संस्था में आ सकती हैं, जब ट्रंप प्रशासन नियमन में बदलाव, दवा की कीमत कम करने और स्वास्थ्य नीति को नए तरीके से लागू करने पर जोर दे रहा है।