Amar Ujala Ltd

10/23/2026 | Press release | Distributed by Public on 10/22/2026 18:11

अब जमीन पर बदलेंगे जंग के मायने: सेना आज लाएगी नई डॉक्ट्रिन, ड्रोन से लेकर डिजिटल युद्ध तक का नया ब्लूप्रिंट

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अब जमीन पर बदलेंगे जंग के मायने: सेना आज लाएगी नई डॉक्ट्रिन, ड्रोन से लेकर डिजिटल युद्ध तक का नया ब्लूप्रिंट

Fri, 23 Oct 2026 05:18 AM IST
देवेश त्रिपाठी अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: देवेश त्रिपाठी Updated Fri, 23 Oct 2026 05:18 AM IST
सार

भारतीय सेना आधुनिक युद्ध की बदलती चुनौतियों से निपटने के लिए अपनी रणनीतिक रूपरेखा में बदलाव करने जा रही है। नई लैंड वॉरफेयर डॉक्ट्रिन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन, रोबोटिक्स, साइबर हमलों और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध जैसी तकनीकों पर जोर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य सैन्य कमांडरों को स्पष्ट दिशा देना और तीनों सेनाओं के बीच संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।

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भविष्य के युद्धों के लिए सेना की नई तैयारी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/प्रिंट
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विस्तार

सेना अपनी नई लैंड वॉरफेयर डॉक्ट्रिन को अमलीजामा पहनाने जा रही है। राजधानी में चल रहे सेना के कमांडर सम्मेलन में शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह यह दस्तावेज जारी करेंगे। इस डॉक्ट्रिन से तय होगा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), आसमान में मंडराते ड्रोन्स, साइबर हमले और अंतरिक्ष से पैदा होते खतरों के बीच भविष्य का युद्ध कैसे लड़ा जाएगा।
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पुरानी रणनीतियों से आगे
सेना ने आखिरी बार 2018 में अपनी लैंड वॉरफेयर डॉक्ट्रिन जारी की थी। पिछले छह-सात वर्षों में युद्ध की परिभाषा तेजी से बदली है। यूक्रेन और पश्चिम एशिया के संघर्षों ने यह साबित कर दिया है कि पारंपरिक युद्ध पद्धतियां अब अकेली काफी नहीं हैं। अधिकारी ने कहा कि परिस्थितियां बदलने के साथ चुनौतियां नई शक्ल लेती हैं, नया सैन्य साजो-सामान भी शामिल होता है, लिहाजा रणनीतिक गाइडलाइंस को भी अपडेट करना पड़ता है।
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डॉक्ट्रिन से कमांडरों में आती है स्पष्टता
सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक ऐसी डॉक्ट्रिन से मैदानी कमांडरों को साफ दिशा मिलती है कि उन्हें क्या करना चाहिए और क्या नहीं। इसमें मुख्य रूप से जनरल गाइडलाइंस दी जाती हैं कि सीनियर लीडरशिप का विजन क्या है और बाकी सेनाएं कैसे सोचती हैं। यह दस्तावेज एक शार्प एरो नहीं, बल्कि एक ब्रॉड एरो (व्यापक दिशा देने वाला) होगा। इससे 13 लाख से ज्यादा जवानों वाली सेना को एक स्पष्ट विजन मिलेगा।
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चार मुख्य स्तंभ
नई डॉक्ट्रिन में साफ तौर पर बताया गया है कि भविष्य के युद्धों में एल्गोरिदम, रोबोटिक्स, मानवरहित हथियार प्रणालियों और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध की भूमिका सबसे अहम होगी। सेना अपनी युद्धक इकाइयों में इन तकनीकों को नीचे के स्तर तक शामिल कर रही है। तीनों सेनाओं के बीच तालमेल को अब कागजों से निकालकर जमीनी हकीकत बनाया जा रहा है। यह डॉक्ट्रिन तीनों सेनाओं के संसाधनों के साझा इस्तेमाल का रोडमैप देती है।

हर हालात के लिए तैयार होगी सेना
इससे थिएटर कमांड के गठन की प्रक्रिया को गति मिलेगी। सेना मरुस्थल की तपिश से सियाचिन के ग्लेशियर्स तक कठिन चुनौतियों के बीच काम करती है। चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर लगातार बदलते सुरक्षा समीकरणों के बीच, यह डॉक्ट्रिन सेना को हर हालात के लिए तैयार करेगी। साथ ही इस डॉक्ट्रिन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह स्वदेशी हथियारों को सीधे तौर पर सेना की ऑपरेशनल प्लानिंग में फिट कर सके।
Amar Ujala Ltd published this content on October 23, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on October 23, 2026 at 00:12 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]