08/29/2026 | Press release | Distributed by Public on 08/29/2026 11:06
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लॉगिन करेंपश्चिम बंगाल सरकार ने स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री शरद्वत मुखर्जी ने शनिवार को कहा कि डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा से जुड़े मौजूदा कानून को पूरी तरह और सख्ती से लागू किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने वोट की राजनीति के कारण इस कानून को प्रभावी तरीके से लागू नहीं किया।
कोलकाता में फोरम फॉर बिजनेस, सोशल एंड कल्चरल इनिशिएटिव्स (FBSC) की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार स्वास्थ्य पेशेवरों की सुरक्षा से जुड़े कानून को उसके मूल उद्देश्य के अनुरूप लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।
मंत्री ने कहा कि डॉक्टरों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों पर होने वाले हमलों को अब अनदेखा नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा से संबंधित कानून पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के कार्यकाल में बनाया गया था, लेकिन इसे प्रभावी तरीके से लागू नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार आने वाली सरकारें वोट की राजनीति के चलते इस तरह के प्रावधानों को लागू करने से बचती रही हैं। हालांकि, उन्होंने कानून के किन विशेष प्रावधानों को किस तरीके से लागू किया जाएगा, इसका विस्तृत ब्योरा नहीं दिया।
शरद्वत मुखर्जी ने कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले की घटनाओं को अब बिना कार्रवाई के नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने इस संबंध में सरकार की प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि मौजूदा कानून को पूरी तरह लागू किया जाएगा। मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब अस्पतालों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर देशभर में बहस होती रही है।
कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने अंगदान और देहदान को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि ब्रेन डेड घोषित व्यक्ति अपने महत्वपूर्ण अंगों का दान कर सकता है। इसे अंगदान माना जाएगा। वहीं, मेडिकल शिक्षा और शोध के लिए पूरे शरीर का दान व्यक्ति की पूर्ण मृत्यु के बाद किया जाता है। उन्होंने दोनों प्रक्रियाओं को अलग बताते हुए लोगों से इनके बीच का अंतर समझने की अपील की।
मंत्री ने दक्षिण भारत के राज्यों की कार्यप्रणाली की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि वहां योग्यता और प्रदर्शन पर अपेक्षाकृत अधिक जोर दिया जाता है और देश के अन्य हिस्से इन राज्यों से काफी कुछ सीख सकते हैं। हल्के-फुल्के अंदाज में उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के लोगों ने पांच साल में सरकार बदलने की कला में 'महारत' हासिल कर ली है। उनके मुताबिक, नियमित चुनावी प्रतिस्पर्धा से सरकारों पर बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव बना रहता है। उन्होंने कहा कि सत्ता से हटने का खतरा सरकारों को जवाबदेह रहने और अपने वादों को पूरा करने के लिए प्रेरित करता है।