07/24/2026 | Press release | Distributed by Public on 07/23/2026 19:39
Link Copied
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
यह खबर एप पर पढ़ें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लॉगिन करेंयूसी नहीं मिलने से बढ़ी जवाबदेही पर चिंता
कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि विभिन्न योजनाओं और विकास कार्यों के लिए जारी धनराशि का उपयोग प्रमाणित करने के लिए समय पर उपयोगिता प्रमाण पत्र देना अनिवार्य है। बिहार कोषागार संहिता-2011 के नियमों के अनुसार बजट आवंटन के 18 महीने के भीतर यूसी जमा किया जाना चाहिए, लेकिन बड़ी संख्या में प्रमाण पत्र अब भी लंबित हैं। रिपोर्ट के मुताबिक लंबित यूसी का मूल्य पिछले वर्ष के मुकाबले करीब 26 प्रतिशत बढ़ गया है, जिससे सार्वजनिक धन के उपयोग की निगरानी और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए हैं।
इन विभागों पर सबसे ज्यादा सवाल
रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अधिक लंबित उपयोगिता प्रमाण पत्र पंचायती राज विभाग के हैं, जहां लगभग 32 हजार करोड़ रुपये का हिसाब लंबित है। इसके बाद शिक्षा विभाग के करीब 19 हजार करोड़ रुपये, नगर विकास एवं आवास विभाग के लगभग 17.8 हजार करोड़ रुपये, ग्रामीण विकास विभाग के 6.4 हजार करोड़ रुपये और स्वास्थ्य विभाग के करीब 3 हजार करोड़ रुपये से संबंधित उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा नहीं किए गए हैं।
बजट बढ़ा, लेकिन पूरा खर्च नहीं हो सका
कैग की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2024-25 में बिहार का कुल बजट बढ़कर 3.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया, लेकिन सरकार केवल 2.87 लाख करोड़ रुपये ही खर्च कर सकी। यानी कुल बजट का करीब 21.22 प्रतिशत, लगभग 77,340 करोड़ रुपये, उपयोग में नहीं लाया जा सका। रिपोर्ट के अनुसार यह स्थिति बजट अनुमान और वास्तविक जरूरतों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता को दर्शाती है।
वित्त विभाग से मांगा गया जवाब, नहीं मिला स्पष्टीकरण
कैग ने रिपोर्ट में बताया कि लंबित उपयोगिता प्रमाण पत्रों को लेकर वित्त विभाग से स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन जनवरी 2026 तक विभाग की ओर से कोई जवाब उपलब्ध नहीं कराया गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि समय पर यूसी जमा नहीं होने से सरकारी निधियों के उपयोग की प्रभावी निगरानी प्रभावित होती है और वित्तीय जोखिम बढ़ सकता है।
केंद्र प्रायोजित योजनाओं पर भी टिप्पणी
सीएजी रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2024-25 के दौरान केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए अपेक्षित केंद्रीय हिस्सेदारी की तुलना में 441.29 करोड़ रुपये कम राशि स्थानांतरित की गई। साथ ही राज्य की कुल राजस्व प्राप्तियों का लगभग 48 प्रतिशत हिस्सा प्रतिबद्ध व्यय और सब्सिडी पर खर्च होने की बात कही गई है, जिसके कारण विकास योजनाओं और पूंजीगत परियोजनाओं के लिए अपेक्षाकृत कम संसाधन उपलब्ध रहे।