09/01/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/01/2026 05:52
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लॉगिन करेंसुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट का खुद से मामले का संज्ञान लेना सही था। जुलाई में ठाणे जिले के एक नगर निगम अस्पताल में डॉक्टरों के साथ मारपीट के आरोपी शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे को ट्रायल कोर्ट से मिली जमानत पर रोक लगाना को सही ठहराया है।
सुनवाई के दौरान बेंच ने क्या कहा?
जस्टिस विक्रम नाथ, ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और संदीप मेहता की पीठ ने यह भी कहा कि डॉक्टरों पर हमला करने वाले जमानत के हकदार नहीं हैं। यह टिप्पणी उस बेंच ने की जो हाईकोर्ट के आदेशों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें म्हात्रे की याचिका भी शामिल थी।
बेंच ने कहा, 'यह एक ऐसा मामला है, जिसमें हाईकोर्ट का खुद संज्ञान लेना और जमानत पर रोक लगाना पूरी तरह से सही था। जो लोग मेडिकल क्षेत्र के लोगों का सम्मान नहीं करते, वे इसके हकदार नहीं हैं।' कोर्ट ने आगे कहा कि डॉक्टरों (जिनमें एक महिला डॉक्टर भी शामिल थीं) के साथ मारपीट की गई थी और घटना का वीडियो वायरल हो गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या सवाल पूछा?
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, 'जरा उस व्यक्ति के सदमे की कल्पना कीजिए जब भीड़ हमला करती है। आप अस्पताल के अंदर जाकर किसी भी व्यक्ति को मार सकते हैं।' महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि वे भी जमानत दिए जाने को चुनौती देने वाली याचिका दायर करेंगे। बेंच ने मामले की सुनवाई के लिए 7 सितंबर की तारीख तय की।
कब की है यह घटना?
6 जुलाई को, म्हात्रे और अन्य आरोपी अस्पताल में जमा हुए और एक महिला मरीज के इलाज में कथित देरी को लेकर बहस के बाद डॉक्टरों के साथ मारपीट की। यह घटना शास्त्री नगर अस्पताल में हुई, जब गर्भवती महिला के परिवार वालों ने अस्पताल के कर्मचारियों पर इलाज में देरी का आरोप लगाया।