यूक्रेन, रूस और अमेरिका के बीच संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में होने वाली चौथे दौर की अहम शांति वार्ता से ठीक पहले रूस ने शनिवार तड़के राजधानी कीव पर भीषण मिसाइल हमले को अंजाम दिया है। इन हमलों की चपेट में आने से कम से कम पांच नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जबकि कई रिहायशी इलाकों और कमर्शियल संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है।
रूस की इन ताबड़तोड़ एयर स्ट्राइक्स के बाद निप्रो नदी पर बना अहम नॉर्दर्न ब्रिज यातायात के लिए पूरी तरह बंद करना पड़ा है। कीव के मेयर विताली क्लिट्स्को ने जानकारी दी है कि इस अचानक हुए हमले से कीव और जिटोमिर क्षेत्रों का ऊर्जा बुनियादी ढांचा बुरी तरह चरमरा गया है, जिससे राजधानी के भीतर हीटिंग और जलापूर्ति व्यवस्था बेहद संकट में आ गई है।
विज्ञापन
रूसी सेना ने क्यों बनाया फ्लेमिंगो मिसाइल संयंत्र और नॉर्दर्न ब्रिज को निशाना?
मॉस्को स्थित रक्षा मंत्रालय ने इस बात की आधिकारिक पुष्टि कर दी है कि शनिवार को किए गए इन हमलों के दौरान यूक्रेनी सेना के सैन्य और साजो-सामान के ट्रांसपोर्ट रूट को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए नॉर्दर्न ब्रिज पर सटीक प्रहार किया गया था। रूसी सैन्य अधिकारियों का दावा है कि इस पुल का इस्तेमाल यूक्रेनी सशस्त्र बलों के लिए हथियार, सैन्य हार्डवेयर और विशेष उपकरण पहुंचाने के वास्ते लगातार किया जा रहा था। इसके अलावा, रूसी रणनीतिक हमलों के दायरे में कीव का वह औद्योगिक परिसर भी आया जहां घातक 'फ्लेमिंगो' मिसाइलों का उत्पादन किया जाता है। साथ ही, कीव क्षेत्र में स्थित एक पावर स्टेशन, इलेक्ट्रिकल सब-स्टेशन, गोला-बारूद निर्माण संयंत्र, विस्फोटकों और बारूद की फैक्ट्रियों के साथ-साथ जिटोमिर के एक प्रमुख इलेक्ट्रिकल सब-स्टेशन को भी नेस्तनाबूद कर दिया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
कमिशुवाखा राहत केंद्र पर गिरे तीन-टन बम
दक्षिणी यूक्रेन के जारोपिज्जिया क्षेत्र के पास फ्रंटलाइन पर बसे कमिशुवाखा गांव में मानवीय सहायता पाने के लिए कतार में खड़े बेसहारा लोगों पर रूसी गाइडेड बमों से बरपाए गए कहर के बाद अब भी राहत और बचाव अभियान जारी है। सोमवार को एक पूर्व स्कूल और शेल्टर हाउस पर गिराए गए तीन-टन वजनी भारी बम के मलबे से पिछले चौबीस घंटों के भीतर नौ और शव बरामद किए गए हैं, जिससे इस खौफनाक हादसे में मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर शनिवार सुबह तक 55 तक पहुंच गई है।
इस विनाशकारी तबाही में दर्जनों ग्रामीण अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश में इमरजेंसी सर्विसेज और स्थानीय बचाव दल लगातार जुटे हुए हैं। गांव के ही 72 वर्षीय बुजुर्ग मायकोला क्रास्नोव ने टूटे मन से बताया कि वे अपनी पत्नी की तलाश में भटक रहे हैं, जो राहत सामग्री लेने गईं थीं लेकिन न तो वे घर लौटीं और न ही उनका कोई पता चल सका है।
यह भी पढ़ें: बांग्लादेश में इतिहास से छेड़छाड़ पर विवाद: 'जय बांग्ला' समेत पांच जहाजों के नाम बदले; अवामी लीग ने क्या कहा?
बेलगोरोद और ओरयोल पर यूक्रेनी ड्रोन हमलों से कैसे मची खलबली?
एक तरफ जहां यूक्रेन के विभिन्न शहर रूसी मिसाइलों से दहल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यूक्रेनी सेना ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए रूस के भीतर ड्रोन हमलों की रफ्तार तेज कर दी है। रूस के सीमावर्ती बेलगोरोद क्षेत्र के ग्रेवोरॉन शहर में एक रिहायशी निजी मकान पर यूक्रेनी ड्रोन के सीधे टकराने से एक नागरिक की दर्दनाक मौत हो गई, जिससे स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
रूसी रक्षा मंत्रालय के दावों के मुताबिक, उनकी एयर डिफेंस प्रणालियों ने रातभर में बेलगोरोद, क्रीमिया प्रायद्वीप और काला तथा अजोव सागर के ऊपर से गुजर रहे कुल 411 यूक्रेनी ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया है। इसके बावजूद, सारातोव क्षेत्र के गवर्नर रोमन बुसार्गिन ने स्वीकार किया है कि ड्रोन हमलों से नागरिक बुनियादी ढांचे को क्षति पहुंची है, जबकि रूसी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सारातोव ऑयल रिफाइनरी और ओरयोल शहर के 'प्रोटॉन-इलेक्ट्रोटेक्स' सैन्य उपकरण कलपुर्जा संयंत्र में भीषण आग भड़क उठी है।
अबू धाबी में होने वाली चौथे दौर की शांति वार्ता से क्यों बंधी हैं उम्मीदें?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की मध्यस्थता में रूस, यूक्रेन और अमेरिका के शीर्ष वार्ताकार आने वाले मंगलवार को अबू धाबी में आमने-सामने बैठकर जंग को थमाने के उपायों पर मंथन करेंगे। जिनेवा में फरवरी के महीने में हुई पिछली उच्चस्तरीय बैठकों के बाद कूटनीतिक मोर्चे पर यह चौथा मौका होगा जब तीनों देशों के प्रतिनिधि शांति का नया रास्ता तलाशने के लिए एक मंच पर जुटेंगे। पश्चिमी देशों की सरकारें इस चल रहे गंभीर गतिरोध को तोड़ने के लिए लगातार किसी नए फॉर्मूले और समझौते की रूपरेखा तैयार करने में जुटी हुई हैं, हालांकि वे इस कड़वी सच्चाई से भी पूरी तरह वाकिफ हैं कि यूक्रेन संघर्ष के दौरान पैदा हुए तमाम जटिल क्षेत्रीय और सुरक्षा संबंधी अनसुलझे सवाल अभी भी जस के तस बने हुए हैं।