Amar Ujala Ltd

09/12/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/12/2026 11:00

सीबीआई: सिम बॉक्स ऑपरेशन, साइबर फ्रॉड के लिए सिम कार्ड की गैर-कानूनी बिक्री के लिए डिस्ट्रीब्यूटर गिरफ्तार

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सीबीआई: सिम बॉक्स ऑपरेशन, साइबर फ्रॉड के लिए सिम कार्ड की गैर-कानूनी बिक्री के लिए डिस्ट्रीब्यूटर गिरफ्तार

Sat, 12 Sep 2026 10:19 PM IST
पवन पांडेय डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Sat, 12 Sep 2026 10:19 PM IST
सार

सीबीआई ने बिहार के वैशाली और ओडिशा के जगतसिंहपुर में 10 ठिकानों पर छापेमारी कर अवैध सिम बॉक्स नेटवर्क का पर्दाफाश किया। एक एयरटेल एरिया डिस्ट्रीब्यूटर गिरफ्तार हुआ। जांच में 1300 से अधिक सिम और देशभर के 73 साइबर अपराधों का लिंक मिला। इनमें डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामले भी शामिल हैं।

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सीबीआई - फोटो : ANI
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विस्तार

सीबीआई ने बिहार के वैशाली जिले और ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले में 10 जगहों पर छापेमारी की है। साइबर फ्रॉड के लिए इस्तेमाल हो रहे गैर-कानूनी सिम बॉक्स ऑपरेशन के सिलसिले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। दस जगहों पर तलाशी के दौरान, मोबाइल फोन, लैपटॉप और सिम कार्ड जैसे कई डिजिटल डिवाइस से आपत्तिजनक सामान मिला है। महुआ, वैशाली के एयरटेल एरिया डिस्ट्रीब्यूटर को बड़ी संख्या में धोखाधड़ी से सिम कार्ड जारी करने और उन्हें गैर-कानूनी सिम बॉक्स ऑपरेशन में इस्तेमाल के लिए आगे भेजने में उसकी भूमिका के लिए गिरफ्तार किया गया है।
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सीबीआई गैर-कानूनी सिम बॉक्स ऑपरेशन के एक मामले की जांच कर रही है, जिसका पता पिछले साल बिहार के सुपौल जिले में चला था। बाद में यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया। जिस घर में सिम बॉक्स चलाया जा रहा था, वहां 1300 से ज्यादा सिम कार्ड मिले थे। सीबीआई ने ऐसा डेटा भी इकट्ठा किया है, जिससे पता चलता है कि यह सिम बॉक्स ऑपरेशन पूरे भारत में साइबर क्राइम के कम से कम 73 मामलों से जुड़ा था। इसमें 'डिजिटल अरेस्ट' के तरीके से किए गए अपराध भी शामिल हैं।
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1300 से ज्यादा सिम कार्ड से जुड़े डेटा का बारीकी से विश्लेषण किया गया और कुछ संदिग्ध 'पॉइंट्स ऑफ सेल' (सिम बेचने वाली जगहों) की पहचान की गई। पता चला कि ज्यादातर सिम कार्ड बिहार और ओडिशा से जारी किए गए थे। इनमें से 700 से ज्यादा सिम कार्ड एयरटेल के एक एरिया डिस्ट्रीब्यूटर ने बिहार के वैशाली जिले में सिम कार्ड बेचने वाले एक दर्जन से ज्यादा 'पॉइंट्स ऑफ सेल' की जानकारी (क्रेडेंशियल्स) का गलत इस्तेमाल करके जारी किए थे।
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जांच के दौरान कई ग्राहकों ने यह भी बताया है कि उन्हें पता ही नहीं था कि उनके नाम पर कोई सिम कार्ड जारी किया गया है। ऐसा या तो उन्हें धोखा देकर किया गया (जैसे जब वे किसी असली काम से सिम कार्ड प्रोवाइडर के पास गए तो उनसे कई बार ई-केवाईसी के लिए मंजूरी ले ली गई) या फिर किसी और मकसद से लिए गए उनके बायोमेट्रिक डेटा का गलत इस्तेमाल करके किया गया। बिहार सरकार द्वारा यह मामला सीबीआई को सौंपा गया। इसमें धोखाधड़ी, जालसाजी, जबरन वसूली (बीएनएस के तहत), पहचान की चोरी, कंप्यूटर से जुड़े अपराध (आईटी एक्ट के तहत) और टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2022 के तहत अन्य अपराधों की जांच शामिल है।

सीबीआई उन लोगों और संस्थाओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के अपने संकल्प को दोहराती है जो टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर का गलत इस्तेमाल करके साइबर धोखाधड़ी में मदद करते हैं। यह नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह भी देती है और आगाह करती है कि 'डिजिटल अरेस्ट' जैसा कोई कॉन्सेप्ट नहीं होता है। आम लोगों से अपील की जाती है कि वे कानून लागू करने वाली एजेंसियों के नाम पर पैसे मांगने वाले कॉल या धोखाधड़ी वाली निवेश योजनाओं के झांसे में न आएं।
Amar Ujala Ltd published this content on September 12, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 12, 2026 at 17:00 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]