08/02/2026 | Press release | Distributed by Public on 08/02/2026 06:52
Link Copied
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
यह खबर एप पर पढ़ें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लॉगिन करेंदतिया विधानसभा उपचुनाव का परिणाम सोमवार को सामने आएगा। मतगणना सुबह 8 बजे से 20 टेबलों पर 15 राउंड में होगी। यह चुनाव केवल एक सीट का नहीं, बल्कि भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए राजनीतिक संदेश देने वाला माना जा रहा है। कम मतदान, शहर में वोटिंग की सुस्ती, महिलाओं की घटती भागीदारी, भाजपा में भीतरघात की चर्चा और कांग्रेस की गुटबाजी ने मुकाबले को पूरी तरह खुला बना दिया है। 30 जुलाई को हुए मतदान में 71.42 प्रतिशत वोट पड़े, जो 2023 विधानसभा चुनाव के मुकाबले 8.86 प्रतिशत अंक कम है। कुल 19,528 वोट कम पड़े। इनमें सबसे ज्यादा कमी महिला मतदान में रही। महिला मतदाताओं के 9,495 और पुरुषों के 7,754 वोट कम पड़े। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कम मतदान का फायदा किसे मिलेगा, इसका जवाब अब ईवीएम से ही मिलेगा।
भाजपा की चिंता
कांग्रेस के पक्ष में
कांग्रेस की चिंता
आजाद समाज पार्टी क्या बिगाड़ सकती है?
दामोदर यादव लंबे समय से क्षेत्र में किसान, सड़क, बिजली और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे उठाते रहे हैं। माना जा रहा है कि उन्हें दलित, ओबीसी और कुछ ग्रामीण मतदाताओं का समर्थन मिल सकता है। हालांकि पार्टी का मजबूत संगठन नहीं होने से उनके लिए जीत की राह आसान नहीं मानी जा रही। लेकिन वे कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं।
पढ़ें: दतिया उपचुनाव: नरोत्तम मिश्रा के राजनीतिक भविष्य के लिए क्यों अहम? जीत और हार के अलग-अलग मायने
नरोत्तम मिश्रा की साख पर भी नजर
दतिया लंबे समय तक पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का मजबूत राजनीतिक गढ़ रहा है। टिकट बदलने के बाद भी उन्होंने भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में पूरी सक्रियता दिखाई। ऐसे में परिणाम को उनके प्रभाव और संगठन पर पकड़ के नजरिये से भी देखा जाएगा। इस चुनाव के परिणाम नरोत्तम मिश्रा की आगे की राजनीतिक भविष्य तय करने वाला माना जा रहा हैं।
सबसे कम मतदान वाले 10 बूथ
दतिया शहर के कई मतदान केंद्रों पर मतदान सबसे कम दर्ज हुआ। इनमें अधिकांश मतदान केंद्र दतिया शहर क्षेत्र के हैं। यानी की शहरी क्षेत्र के मतदाताओं ने चुनाव में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई। इसमें बूथ 110-43.20%, बूथ 100- 53.04%, बूथ 102-53.56%, बूथ 92-53.97%, बूथ 122-54.98%,
बूथ 136-54.86%, बूथ 106-55.49%, बूथ 105-56.18%, बूथ 104-57.90% और बूथ 124-58.41% बूथ शामिल है।
सबसे ज्यादा मतदान वाले 10 बूथ
शहर में ग्रामीण क्षेत्रों के कई मतदान केंद्रों ने रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया। इनमें बूथ 62-92.19%, बूथ 84-89.04%, बूथ 275- 88.94%, बूथ 67-88.34%, बूथ 251-87.50%, बूथ 18- 87.82%, बूथ 290-86.46%, बूथ 235-86.26%, बूथ 236 - 85.86%, बूथ 231 - 85.47% बूथ शामिल हैं।
जहां महिलाओं ने पुरुषों को पीछे छोड़ा
पूरे विधानसभा में भले ही महिलाओं का मतदान प्रतिशत कम रहा है, लेकिन 59 बूथों पर महिलाओं ने पुरुषों को मतदान करने में पीछे छोड़ दिया। इनमें
बूथ 18 - पुरुष 86.81%, महिला 88.98%, बूथ 24 - पुरुष 79.74%, महिला 85.51%, बूथ 35 - पुरुष 80.95%, महिला 85.58%, बूथ 37 - पुरुष 67.11%, महिला 83.39%, बूथ 74 - पुरुष 76.91%, महिला 78.71%, बूथ 84 - पुरुष 86.76%, महिला 91.76%, बूथ 190 - पुरुष 81.00%, महिला 87.87%, बूथ 231 - पुरुष 81.45%, महिला 89.80% और बूथ 234 - पुरुष 72.90%, महिला 90.27% शामिल हैं।
55 प्रतिशत से कम मतदान वाले प्रमुख बूथ
38 बूथों पर 80 प्रतिशत से अधिक मतदान
पूरे विधानसभा क्षेत्र में दर्जनों मतदान केंद्र ऐसे रहे जहां मतदान 80 प्रतिशत से ऊपर पहुंचा। इनमें बूथ 12, 18, 23,24,35,45, 62, 63, 67,76, 77,81, 84, 87, 88, 89,153, 190, 210, 228, 231,232, 234, 235, 236,237, 245, 246, 251,254,261, 263,264,271,275, 284, 289 और 290 प्रमुख रहे। इससे स्पष्ट है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान को लेकर उत्साह शहरी इलाकों की तुलना में कहीं अधिक रहा।
आंकड़ों में उपचुनाव