07/09/2026 | Press release | Distributed by Public on 07/09/2026 02:54
भारत और ऑस्ट्रेलिया ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी, साइबर और साइबर सक्षम महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी सहयोग पर 2020 प्रारूप व्यवस्था (2020 प्रारूप) और दो दशकों के सहयोगात्मक अनुसंधान, परिचालन समन्वय तथा नीतिगत जुड़ाव के आधार पर साइबर और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में एक स्थायी साझेदारी का निर्माण किया है।
आपूर्ति श्रृंखलाएं, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी और साइबर सुरक्षा आर्थिक विकास को गति प्रदान करने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए केंद्रीय महत्व रखती हैं और मूल्यों तथा वैश्विक मानदंडों को आकार देने में सहायक हो सकती हैं, इस उद्देश्य के साथ ऑस्ट्रेलिया और भारत अपनी पूर्व-वर्तमान आधारशिला पर आगे बढ़ते हुए 'साइबर, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर ऑस्ट्रेलिया-भारत साझेदारी (पीएसीटीएस)' के अंतर्गत अपनी द्विपक्षीय महत्वाकांक्षा को और आगे बढ़ाएंगे और यह 2020 प्रारूप का स्थान लेगी।
पीएसीटीएस का उद्देश्य राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा में हमारे साझा हितों का समर्थन करना, हमारे साझेदारों को अधिक डिजिटल विकल्प प्रदान करना, महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक अनुकूल बनाना और वैश्विक साइबर स्थिति को मजबूत करना है। सुरक्षा, संरक्षा, अनुकूलता, सभी के लिए समावेशिता और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों को साझेदारी के अंतर्गत हमारे प्रयासों के हर चरण में शामिल किया जाएगा और यह जिम्मेदार प्रौद्योगिकी प्रमुखों के रूप में हमारे देशों की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। एक समग्र एकीकृत रणनीतिक दृष्टिकोण के अंतर्गत इन प्रयासों को सुव्यवस्थित करने से हमें सहयोग के पांच स्तंभों के अंतर्गत लक्षित गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी।
सहयोग के स्तंभ:
प्रत्येक परस्पर संबंधित स्तंभ के अंतर्गत, भारत और ऑस्ट्रेलिया निजी क्षेत्र, विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और सरकारी एजेंसियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए अवसरों और विशिष्ट परियोजनाओं की पहचान करेंगे। इससे सरकार-से-सरकार सहयोग को मजबूती मिलेगी और उसका विस्तार होगा, नई प्रौद्योगिकियों में दोतरफा निवेश बढ़ेगा और बौद्धिक संपदा को आर्थिक विकास प्रदान करने वाले उत्पादों में परिवर्तित करने में सहायता मिलेगी।
स्तंभ 1: आपूर्ति श्रृंखला उदारता और विविधीकरण:
ऑस्ट्रेलिया और भारत अपने बढ़ते तकनीकी उद्योगों को समर्थन देने के लिए सुरक्षित, अनुकूल और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखलाओं की दिशा में कार्य करेंगे, जिसमें डिज़ाइन द्वारा सुरक्षा और संरक्षा को बढ़ावा देना तथा सुरक्षात्मक नियामक प्रारूप बनाना और नियम-आधारित द्विपक्षीय प्रौद्योगिकी व्यापार एवं आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करना शामिल है।
• भारत-ऑस्ट्रेलिया सहयोग को बढ़ावा देना, जिसमें केबल कनेक्टिविटी और अनुकूलता के लिए क्वाड साझेदारी भी शामिल है, ताकि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षित, विश्वसनीय और अनुकूल समुद्री केबल कनेक्टिविटी को बढ़ावा दिया जा सके। हम सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करने, सूचना साझाकरण एवं समन्वय को बढ़ाने और खतरे और तोड़फोड़ से संबंधित समुद्री केबल अवसंरचना के जोखिमों से निपटने के लिए सहयोग को मजबूत करेंगे।
• अर्धचालक आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा पर केंद्रित ऑस्ट्रेलिया और भारतीय अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग विकसित करेंगे और उनके प्रयासों को बल देने के लिए सह-विकास और अनुसंधान को बढ़ावा देंगे।
• समन्वित निवेश, नियामक संरेखण और पुनर्चक्रण एवं पुनर्प्राप्ति सहित सुरक्षित महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं के विकास पर सहयोग करेंगे।
स्तंभ 2: महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी
ऑस्ट्रेलिया और भारत प्राथमिकता वाली महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों की सुरक्षा, अनुकूलता और अखंडता को मजबूत करने तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों, दूरसंचार, जैव प्रौद्योगिकी और उन्नत सामग्री जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नई प्रौद्योगिकियों का नवाचार करने के लिए मिलकर कार्य करेंगे। हम आवश्यक डिजिटल और भौतिक अवसंरचना की रक्षा करने, नवाचार और अनुसंधान में तेजी लाने तथा अंतरसंचालनीय, सर्वसम्मति-संचालित अंतरराष्ट्रीय मानकों को आकार देने का प्रयास करेंगे, ताकि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को समर्थन मिल सके।
• उन्नत सामग्री, दूरसंचार और जैव प्रौद्योगिकी सहित प्राथमिकताओं को लक्षित करने के लिए ऑस्ट्रेलिया-भारत अनुसंधान, नवाचार और निवेश साझेदारी को पुनर्केंद्रित और गति प्रदान करना, जिसमें द्विपक्षीय रूप से और व्यापक हिंद-प्रशांत के लिए ठोस लाभ प्रदान करने वाली अनुसंधान परियोजनाओं को वित्त पोषित करने के लिए वर्तमान व्यवस्थाओं के भीतर स्थापित कार्यक्रमों को पुनर्व्यवस्थित करना शामिल है।
स्तंभ 3: साइबर सुरक्षा
ऑस्ट्रेलिया और भारत साइबर तथा डिजिटल क्षेत्र की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करेंगे। इसमें साइबर अपराध का मुकाबला करना, दुर्भावनापूर्ण साइबर गतिविधि को रोकना, साइबर और प्रौद्योगिकी सुरक्षा मानदंडों से संबंधित ज्ञान तथा अनुभवों का आदान-प्रदान करना एवं महत्वपूर्ण राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे की रक्षा करना शामिल है।
• संयुक्त राष्ट्र द्वारा अनिवार्य साइबर संबंधी प्रक्रियाओं में सहयोग को सुदृढ़ करना और दूरसंचार क्षेत्र में साइबर सुरक्षा से निपटने के लिए डेटा गवर्नेंस आर्किटेक्चर और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग पर संवाद को बढ़ावा देना।
• साइबर सुरक्षा और प्रौद्योगिकी परियोजनाओं में ऑस्ट्रेलिया और भारतीय व्यवसायों के बीच पहुंच और व्यापार एवं निवेश के अवसरों को बढ़ाना।
स्तंभ 4: डिजिटल अनुकूलता
ऑस्ट्रेलिया और भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अर्थव्यवस्थाओं के डिजिटलीकरण का समर्थन करने के लिए विश्वसनीय और स्केलेबल प्रौद्योगिकी समाधान प्रदान करने का प्रयास करेंगे। हम क्षेत्रीय क्षमताओं को मजबूत करने वाली विशिष्ट परियोजनाओं की पहचान करके विकास चुनौतियों का समाधान करने वाले समाधान बनाने के लिए मिलकर काम करेंगे।
• स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा, मजबूत महत्वपूर्ण अवसंरचना, कनेक्टिविटी, डिजिटल परिवर्तन, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास, शिक्षा और अनुसंधान जैसे क्षेत्रों सहित, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में किफायती डीपीआई समाधानों का विस्तार और प्रसार करना।
स्तंभ 5: रक्षा अनुसंधान सहयोग
ऑस्ट्रेलिया और भारत बहु-क्षेत्रीय रक्षा चुनौतियों और क्षमताओं की साझा समझ को आगे बढ़ाने के लिए रक्षा अनुसंधान साझेदारियों का लाभ उठाने के लिए मिलकर काम करेंगे। हम पिछले संयुक्त अनुसंधान पर आगे बढ़ेंगे, अपने साझा हितों के अनुसार भविष्य की परियोजनाओं को डिजाइन करेंगे और रक्षा सहयोग पर समझौता ज्ञापन के लिए रक्षा विज्ञान और प्रौद्योगिकी में सहयोग से संबंधित कार्यान्वयन व्यवस्था के तहत हमारे रक्षा विज्ञान संगठनों के बीच आदान-प्रदान बढ़ाएंगे।
• ऑस्ट्रेलिया के रक्षा विज्ञान और प्रौद्योगिकी समूह तथा भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन के बीच संस्थागत संबंध स्थापित करना और अनुसंधान सहयोग को गति देने के लिए कार्यकारी स्तर पर आदान-प्रदान को नियमित करना।
• व्यावसायिक स्तर पर सहयोग सहित, संबंधित रक्षा नवाचार और स्टार्टअप प्रणालियों के बीच गहरे संबंध स्थापित करना।
संरचना और शासन
द्विपक्षीय समीक्षा:
इस साझेदारी की अध्यक्षता वरिष्ठ स्तर पर ऑस्ट्रेलिया के उप-सचिव, अंतर्राष्ट्रीय और सुरक्षा समूह, प्रधानमंत्री एवं मंत्रिमंडल विभाग और भारत के उप-राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार करेंगे। अध्यक्ष प्राथमिकता वाले क्षेत्रों का निर्धारण करेंगे और साइबर एवं महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग के अवसरों की पहचान करेंगे।
वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक (वार्षिक): जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारी प्रत्येक स्तंभ के अंतर्गत समन्वय करेंगे और अध्यक्षों को रिपोर्ट करेंगे तथा प्राथमिकताओं की समीक्षा करेंगे, अब तक की प्रगति की समीक्षा करेंगे, साइबर एवं महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी परिदृश्य के लिए नए और उभरते जोखिमों का आकलन करेंगे तथा सहयोग के प्रत्येक स्तंभ के अंतर्गत विशिष्ट परियोजनाओं की पारस्परिक पहचान की दिशा में कार्य करेंगे।
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स्तंभ |
भारतीय नेतृत्व |
ऑस्ट्रेलिया नेतृत्व |
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1 |
आपूर्ति श्रृंखला अनुकूलता |
राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (एनएससीएस) |
साइबर मामलों और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी के लिए राजदूत के कार्यालय द्वारा समन्वित |
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2 |
महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी |
राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (एनएससीएस) |
साइबर मामलों और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी के लिए राजदूत का कार्यालय |
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3 |
साइबर सुरक्षा |
विदेश मंत्रालय का साइबर कूटनीति प्रभाग |
साइबर मामलों और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी के लिए राजदूत का कार्यालय |
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4 |
डिजिटल अनुकूलता |
विदेश मंत्रालय का ओशिनिया प्रभाग |
साइबर मामलों और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी के लिए राजदूत का कार्यालय |
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5 |
रक्षा अनुसंधान और सहयोग |
रक्षा मंत्रालय |
रक्षा विभाग |
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