Amar Ujala Ltd

10/03/2026 | Press release | Distributed by Public on 10/02/2026 20:02

कुत्तों के हमले बढ़े: प्रतिबंधित नस्लों की बिक्री जारी; नियम तो हैं फिर निगरानी क्यों नहीं

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कुत्तों के हमले बढ़े: प्रतिबंधित नस्लों की बिक्री जारी; नियम तो हैं फिर निगरानी क्यों नहीं?

हिमांशु अरविंद मिश्र
Updated Sat, 03 Oct 2026 05:30 AM IST
सार

देश में कुत्तों के काटने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। प्रतिबंधित नस्लों की बिक्री पर रोक के बावजूद निगरानी की व्यवस्था कमजोर दिख रही है। आखिर नियम होने के बाद भी कुत्तों और उनकी नस्लों पर नजर क्यों नहीं रखी जा रही? पढ़िए इस रिपोर्ट में।

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dog bite, dog attack - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

देश में कुत्तों के काटने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन पालतू कुत्तों और उनकी नस्लों की निगरानी का कोई राष्ट्रीय तंत्र नहीं है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2023 में 30.43 लाख, 2024 में 37.17 लाख और 2025 में 47.48 लाख डॉग बाइट के मामले दर्ज हुए। यानी करीब 17 लाख मामलों की बढ़ोतरी हुई। वहीं, कई शहरों और राज्यों में प्रतिबंधित नस्लों की खरीद-बिक्री पर रोक के बावजूद इनकी उपलब्धता सामने आ रही है। मार्च 2024 में केंद्र ने करीब 23 खतरनाक मानी गई नस्लों के आयात, प्रजनन और बिक्री पर रोक लगाने का निर्देश दिया था।
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लापरवाही पर मालिक की जिम्मेदारी
कुत्ते के मालिक की लापरवाही से किसी व्यक्ति की जान या सुरक्षा खतरे में पड़ने पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 291 के तहत कार्रवाई हो सकती है। इसमें छह महीने तक की सजा, पांच हजार रुपये तक जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
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डॉग बाइट के मामले
  • 2025 : 47.48 लाख
  • 2024 : 37.17 लाख
  • 2023 : 30.43 लाख
  • 2019 घरेलू कुत्ते : 94.3 लाख
  • 2019 लावारिस कुत्ते : 1.53 करोड़
  • नस्लवार हमलों का राष्ट्रीय आंकड़ा : उपलब्ध नहीं
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अलग-अलग राज्यों में अलग नियम
उत्तर प्रदेश : लखनऊ में 10 हजार पालतू कुत्ते हैं। अप्रैल से अब तक 3,400 पंजीकृत हुए जिनका लाइसेंस बना। पिछले साल 8200 कुत्तों के लाइसेंस बने थे। लावारिस कुत्ते 86 हजार है। सात वर्षों में महज एक लाख कुत्तों का ही बधिया हो पाया। 23 हजार अब भी बाकी है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कुत्तों की नसबंदी की बेहतर प्रगति मानते हुए सराहना की थी।

उत्तराखंड : प्रदेश में कुत्ते अनगिनत हैं। पंजीयन केवल 100 का, एक मामले में 50 हजार का जुर्माना, एक महीने में 2446 को काटा, हर दिन औसतन 6-7 पीड़ित एंटी रैबीज लगवाने अस्पतालों में पहुंच रहे हैं।

हरियाणा : प्रदेश में 9 विक्रेताओं का ही पंजीयन है। 87 निकायों के पास इनका कोई आंकड़ा नहीं है।

पंजाब : यहां 30 हजार कुत्तों के बधियाकरण के लिए करीब 5 करोड़ का प्रस्ताव है। 2025 में कुत्तों के काटने की संख्या 3.34 लाख पहुंच गई थी।
Amar Ujala Ltd published this content on October 03, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on October 03, 2026 at 02:02 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]