Amar Ujala Ltd

08/21/2026 | Press release | Distributed by Public on 08/21/2026 07:09

चीन की हिस्सेदारी नियम में ढील: भारत को मिले 4,895 करोड़ रुपये के 29 एफडीआई प्रस्ताव, जानिए क्या है अपडेट

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चीन की हिस्सेदारी नियम में ढील: भारत को मिले 4,895 करोड़ रुपये के 29 एफडीआई प्रस्ताव, जानिए क्या है अपडेट

Fri, 21 Aug 2026 06:17 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Fri, 21 Aug 2026 06:17 PM IST
सार

भारत सरकार ने मई 2026 में विदेशी निवेश नियमों में ढील दी, जिसके बाद 20 अगस्त, 2026 तक 4,895.65 करोड़ रुपये के 29 एफडीआई प्रस्तावों की सूचना मिली है। इन नियमों से 10 फीसदी तक चीनी हिस्सेदारी वाली कंपनियों को स्वचालित मार्ग से निवेश की अनुमति मिली है, जिससे कारोबार में आसानी बढ़ी है।

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एफडीआई को मोर्चे पर अच्छी खबर - फोटो : amarujala.com
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विस्तार

भारत सरकार के एक महत्वपूर्ण निर्णय के बाद देश में विदेशी निवेश में तेजी आई है। मई 2026 में नियमों में ढील दिए जाने के बाद 20 अगस्त, 2026 तक 29 एफडीआई प्रस्तावों की सूचना मिली है। इन प्रस्तावों के तहत कुल 4,895.65 करोड़ रुपये, जो 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है, का प्रस्तावित निवेश भारत में आएगा। यह जानकारी वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान में दी।

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पहले, भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले किसी भी देश की मामूली हिस्सेदारी वाली विदेशी कंपनियों को निवेश के लिए सरकारी मंजूरी लेनी पड़ती थी। हितधारकों की मांग पर सरकार ने इन नियमों में संशोधन किया। संशोधित नियमों के अनुसार, जिन विदेशी कंपनियों में चीन या हांगकांग की 10 फीसदी तक हिस्सेदारी है, वे स्वचालित मार्ग से भारत में निवेश कर सकती हैं, बशर्ते वे क्षेत्रीय शर्तों का पालन करें। हालांकि, यह छूट चीन, हांगकांग या भारत से भूमि सीमा साझा करने वाले अन्य देशों में पंजीकृत संस्थाओं पर लागू नहीं होगी। भारत से भूमि सीमा साझा करने वाले देशों में चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार और अफगानिस्तान शामिल हैं। वित्त मंत्रालय ने 1 मई, 2026 को फेमा के तहत इन बदलावों को अधिसूचित किया था।
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किन क्षेत्रों और देशों से आया यह निवेश?

ये 29 निवेश विभिन्न क्षेत्रों में फैले हुए हैं। इनमें सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सूचना और संचार, विनिर्माण, फार्मास्यूटिकल्स, डेटा केंद्र और परिवहन सेवाएं जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। इन निवेशों की रिपोर्ट मॉरीशस, संयुक्त राज्य अमेरिका, कोरिया, जापान, सिंगापुर, लक्ज़मबर्ग और केमैन आइलैंड्स जैसे देशों के निवेशकों या संस्थाओं से मिली है। यह दर्शाता है कि भारत वैश्विक निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बना हुआ है। सरकार की नीतिगत बदलावों ने विदेशी पूंजी को आकर्षित करने में मदद की है।

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नियमों में बदलाव से क्या लाभ हुआ?

मई में अधिसूचित संशोधित ढांचे ने भारत में विदेशी निवेश के प्रवाह को काफी सुगम और तेज किया है। इसने ऐसे मामलों में पूर्व सरकारी मंजूरी की आवश्यकता को समाप्त कर दिया है। निवेशक इकाई अब स्वचालित मार्ग से आगे बढ़ सकती है, बशर्ते वे लागू रिपोर्टिंग आवश्यकताओं का पालन करें। यह सुधार निवेशकों को अधिक निश्चितता प्रदान करता है। इससे लेनदेन का समय कम होता है और भारत में कारोबार करने में आसानी और मजबूत होती है। सरकार का लक्ष्य निवेश प्रक्रिया को सरल बनाना है।

क्या है नए नियमों का आधार?

प्रेस नोट 2 ऑफ 2026 और फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट (नॉन-डेट इंस्ट्रूमेंट्स) रूल्स, 2019 में 1 मई, 2026 को हुए संशोधन के साथ, लाभार्थी स्वामित्व परीक्षण अब निवेशक इकाई के स्तर पर लागू होता है। निवेशक इकाई सरकार को प्रासंगिक जानकारी की रिपोर्ट करने के बाद किसी अन्य मंजूरी के बिना निवेश के साथ आगे बढ़ सकती है। यह ढांचा भूमि सीमा साझा करने वाले देशों के गैर-नियंत्रक स्वामित्व (10 फीसदी तक) वाले मामलों में पूर्व सरकारी मंजूरी की आवश्यकता को हटाता है। इससे निवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति आई है।

Amar Ujala Ltd published this content on August 21, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on August 21, 2026 at 13:09 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]