04/16/2026 | Press release | Distributed by Public on 04/16/2026 10:26
केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज यहाँ कहा कि भारत नीतिगत समर्थन, तकनीकी नवाचार और उद्योग की भागीदारी के एक नपे-तुले मिश्रण के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा के परिदृश्य में खुद को लगातार एक वैश्विक खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर रहा है।
मंत्री ने कहा कि देश साथ-साथ ग्रीन हाइड्रोजन को आगे बढ़ा रहा है, परमाणु ऊर्जा क्षमता का विस्तार कर रहा है और नवीकरणीय स्रोतों को मजबूत कर रहा है, साथ ही इलेक्ट्रोलाइज़र जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों में स्वदेशी क्षमताओं का निर्माण कर रहा है। सार्वजनिक-निजी सहभागिता के जरिए विस्तार की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भारत का दृष्टिकोण बेहतर अनुसंधान वित्तपोषण और नवाचार-आधारित विकास द्वारा समर्थित एक मजबूत और आत्मनिर्भर इकोसिस्टम बनाने पर केंद्रित है।
डॉ. जितेंद्र सिंह एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर, नई दिल्ली में वर्ल्ड पेट्रोकोल कांग्रेस के साथ आयोजित वर्ल्ड हाइड्रोजन एनर्जी समिट को संबोधित कर रहे थे। इस सम्मेलन ने भविष्य के ऊर्जा मार्गों पर विचार-विमर्श के लिए एक मंच प्रदान करते हुए नीति निर्माताओं, वैश्विक उद्योग जगत के नेताओं, विषय विशेषज्ञों और पेट्रोलियम, कोयला, गैस तथा उभरते हाइड्रोजन क्षेत्रों के हितधारकों को एक साथ लाया।
भारत के विकसित होते ऊर्जा रोडमैप का संदर्भ देते हुए मंत्री ने कहा कि देश एक बहुआयामी रणनीति अपना रहा है जो ऊर्जा सुरक्षा को स्थिरता के साथ जोड़ती है। उन्होंने कहा कि भारत तेल और गैस निवेश में लगभग 100 अरब अमेरिकी डॉलर, अन्वेषण क्षेत्रों का 10 लाख वर्ग किलोमीटर तक विस्तार और ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने का लक्ष्य रख रहा है। साथ ही, भारत की रिफाइनिंग क्षमता का विस्तार जारी है, जो इसे विश्व स्तर पर अग्रणी देशों में रखता है।
स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि 19,744 करोड़ रुपये के परिव्यय वाले राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन ने भारत को वैकल्पिक ईंधन पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने में अग्रदूतों के बीच खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन स्टील और सीमेंट जैसे कठिन-से-कठिन क्षेत्रों को कार्बन मुक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जबकि घरेलू विनिर्माण और नवाचार के माध्यम से उत्पादन लागत को कम करने के प्रयास जारी हैं।
मंत्री ने भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में प्रगति को भी साझा किया और कहा कि हाल ही में घोषित परमाणु ऊर्जा मिशन का लक्ष्य 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करना है। उन्होंने कहा कि भारत स्वदेशी तकनीकी प्रगति के साथ अपने परमाणु कार्यक्रम के अगले चरण में प्रवेश कर चुका है, जो इसे देशों के एक चुनिंदा समूह में रखता है।
छोटे रिएक्टरों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की योजना 2033 तक पांच छोटे मॉड्यूलर/छोटे रिएक्टर विकसित करने की है, जिनमें से तीन पर काम पहले से ही चल रहा है। इनमें एक भारत स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर), स्थापित भारी जल तकनीक पर आधारित एक भारत स्मॉल रिएक्टर (बीएसआर) और कुछ मेगावाट क्षमता का हाइड्रोजन से जुड़ा एक छोटे पैमाने का रिएक्टर शामिल है। उन्होंने कहा कि ऐसे रिएक्टर लचीले, स्केलेबल और विकेंद्रीकृत स्वच्छ ऊर्जा समाधान सक्षम करेंगे, साथ ही उभरते हुए हाइड्रोजन एप्लीकेशन्स को भी सहायता प्रदान करेंगे।
मंत्री ने कहा कि हाल के नीतिगत सुधारों ने निजी भागीदारी के लिए परमाणु क्षेत्र को खोल दिया है, साथ ही व्यापक उद्योग जुड़ाव को सुविधाजनक बनाने के लिए देयता प्रावधानों को तर्कसंगत बनाया गया है। उन्होंने कहा कि ये कदम स्टार्टअप्स, एमएसएमई और निजी कंपनियों को स्वच्छ ऊर्जा बुनियादी ढांचे के विस्तार में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने हरित नौकरियों और नवाचार में उभरते अवसरों के बारे में भी बात की, और उल्लेख किया कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, बैटरी रीसाइक्लिंग, ग्रिड प्रबंधन और नवीकरणीय विनिर्माण जैसे क्षेत्र आजीविका के नए रास्ते पैदा कर रहे हैं। उन्होंने सर्कुलर इकोनॉमी में चल रही पहलों का भी उल्लेख किया, जिसमें खाना पकाने के इस्तेमाल किए गए तेल और कृषि अवशेषों को जैव ईंधन में बदलना, साथ ही डीप ओशन मिशन के तहत महासागरीय ऊर्जा जैसे नए क्षेत्र शामिल हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की जनसांख्यिकीय शक्ति, तकनीकी क्षमताएं और नीतिगत दिशा उसे वैश्विक डीकार्बोनाइजेशन प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार करती है, साथ ही अपनी आबादी के लिए टिकाऊ विकास और ऊर्जा पहुंच भी सुनिश्चित करती है।
***
पीके/केसी/एसके/एसएस