यूट्यूब पर वीडियो देखकर रिमोट डेस्कटॉप और वर्चुअल प्राइवेट सर्वर (VPS) बनाना सीखा और इसी तकनीकी जानकारी को साइबर अपराधियों के लिए कमाई का जरिया बना लिया। मुंबई की साउथ रीजन साइबर पुलिस ने ऐसे ही एक मामले में हरियाणा के भिवानी खेड़ा से 32 वर्षीय प्रवीण हुकुम चंद को गिरफ्तार किया है। महज 10वीं पास प्रवीण पर आरोप है कि उसने 'rdpwale.in' नाम से वेबसाइट बनाकर बिना किसी पहचान पत्र और केवाईसी वेरिफिकेशन के करीब 1,100 लोगों को सर्वर उपलब्ध कराए। पुलिस की जांच में सामने आया है कि उसके दिए गए सर्वरों का इस्तेमाल साइबर ठग बैंकिंग फ्रॉड, फर्जी APK फाइलें चलाने और लोगों के मोबाइल से गोपनीय जानकारी चोरी करने जैसे अपराधों के लिए कर रहे थे।
पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क का खुलासा मुंबई में रहने वाले एक व्यक्ति से हुई 17.42 लाख रुपये की साइबर ठगी की जांच के दौरान हुआ। पीड़ित को महानगर गैस लिमिटेड (MGL) के नाम से एक मैसेज भेजा गया था। इसमें 'MGL Gas Bill Update' नाम का एक ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा गया था। मैसेज को सही मानकर पीड़ित ने जैसे ही फर्जी ऐप अपने मोबाइल में इंस्टॉल किया, उसमें मौजूद मैलवेयर एक्टिव हो गया। इसके बाद साइबर ठगों ने मोबाइल का कंट्रोल हासिल कर बैंकिंग से जुड़ी गोपनीय जानकारी जुटाई और पीड़ित के खाते से 17.42 लाख रुपये निकाल लिए।
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साउथ रीजन साइबर पुलिस ने मामले की टेक्निकल इन्वेस्टीगेशन शुरू की तो फर्जी ऐप के बैकएंड सिस्टम तक पहुंचने वाले सर्वर का IP एड्रेस सामने आया। जांचकर्ताओं ने इस IP एड्रेस से जुड़े डिजिटल सुरागों की पड़ताल की। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय सर्वर प्रदाता कंपनी होस्टिंगर से जानकारी हासिल की गई। इस तकनीकी जांच में पुलिस को पता चला कि संबंधित VPS सर्वर हरियाणा के भिवानी खेड़ा में रहने वाले प्रवीण हुकुम चंद के नेटवर्क से जुड़ा है। जांच में यह भी सामने आया कि प्रवीण द्वारा उपलब्ध कराया गया सर्वर साइबर ठगों के लिए कमांड-एंड-कंट्रोल सर्वर की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था। इसी सर्वर के जरिए आरोपी ठग दूर बैठे पीड़ितों के मोबाइल से डेटा और ओटीपी जैसी संवेदनशील जानकारी हासिल कर रहे थे।
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पुलिस की पूछताछ में प्रवीण की तकनीकी पृष्ठभूमि भी सामने आई। उसने कंप्यूटर या सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ी कोई औपचारिक पढ़ाई नहीं की थी। वह केवल यूट्यूब ट्यूटोरियल और इंटरनेट पर उपलब्ध गाइड की मदद से वेबसाइट तैयार करने, रिमोट डेस्कटॉप प्रोटोकॉल (RDP) और वीपीएस तकनीक का इस्तेमाल करना सीख गया था। इसके बाद उसे समझ आया कि साइबर अपराध में शामिल लोगों को ऐसे सर्वरों की जरूरत होती है, जहां उन्हें अपनी पहचान और गतिविधियों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं देनी पड़े। इसी का फायदा उठाते हुए उसने अपनी वेबसाइट शुरू की और बिना पहचान पत्र या KYC प्रक्रिया के सर्वर उपलब्ध कराने लगा।
जांच के अनुसार, प्रवीण सर्वर की क्षमता और सुविधा के हिसाब से ग्राहकों से 1,699 रुपये से लेकर 13,199 रुपये प्रति माह तक किराया वसूलता था। उसकी वेबसाइट के जरिए करीब 1,100 ग्राहकों को सर्वर उपलब्ध कराए गए। पुलिस अब इन सभी ग्राहकों और उनके सर्वरों की गतिविधियों की जांच कर रही है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि प्रवीण की सर्वर सेवाएं लेने वाले कई ग्राहकों से जुड़े मोबाइल नंबर पहले से ही राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज कम से कम 30 साइबर अपराध शिकायतों में सामने आ चुके हैं। इससे पुलिस को संदेह है कि उसके सर्वरों का बड़े पैमाने पर साइबर अपराध के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।
पुलिस ने आरोपी के पास से लैपटॉप और मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। इसके अलावा पुलिस उसके बैंक खातों, सर्वर लॉग्स, वेबसाइट के रिकॉर्ड और ग्राहकों से हुए पैसों के लेन-देन की भी जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि 1,100 ग्राहकों में से कितने लोग सीधे तौर पर साइबर अपराधों में शामिल थे और कितने लोगों ने इन सर्वरों का इस्तेमाल दूसरे गैरकानूनी कामों के लिए किया।
पुलिस के मुताबिक, साइबर ठग अक्सर बैंकिंग, KYC, बिजली बिल या गैस बिल अपडेट करने के नाम पर लोगों को फर्जी APK फाइल डाउनलोड करने के लिए राजी करते हैं। मोबाइल में ऐप इंस्टॉल होते ही वह विभिन्न परमिशन हासिल कर मैसेज, नोटिफिकेशन और दूसरी संवेदनशील जानकारियों तक पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं।