Amar Ujala Ltd

09/17/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/17/2026 10:30

एक्सप्लेनर: कौन हैं चंद्रशेखरन, ऐसे इंटर्न जो बने टाटा संस के पहले गैर-पारसी चेयरमैन, अब क्यों सुर्खियों में

{"_id":"6aabe95e77b3ab78c00b6bb7","slug":"who-is-n-chandrasekaran-tata-sons-chairman-in-centre-of-tata-trusts-noel-tata-controversy-explainer-profile-2026-09-17","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"एक्सप्लेनर: कौन हैं चंद्रशेखरन, ऐसे इंटर्न जो बने टाटा संस के पहले गैर-पारसी चेयरमैन, अब क्यों सुर्खियों में?","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}

एक्सप्लेनर: कौन हैं चंद्रशेखरन, ऐसे इंटर्न जो बने टाटा संस के पहले गैर-पारसी चेयरमैन, अब क्यों सुर्खियों में?

Thu, 17 Sep 2026 06:51 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Thu, 17 Sep 2026 06:51 PM IST
सार

टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन कौन हैं? जानिए तमिल माध्यम स्कूल से पढ़ाई कर टीसीएस में इंटर्न बनने और फिर टाटा ग्रुप के पहले गैर-पारसी अध्यक्ष बनने तक की पूरी कहानी, उपलब्धियां और 'वन टाटा' की रणनीति।

विज्ञापन
टाटा संस चेयरमैन। - फोटो : अमर उजाला
  • Link Copied

विस्तार

भारत के सबसे बड़े कॉरपोरेट होल्डिंग समूहों में से एक टाटा संस में बीते कुछ महीनों से जारी हलचल थमने का नाम नहीं ले रही है। दरअसल, कंपनी के बोर्ड ने गुरुवार को एन. चंद्रशेखरन का चेयरमैन के तौर पर कार्यकाल पांच साल और बढ़ाने पर सहमति जता दी। हालांकि, टाटा ट्रस्ट्स की तरफ से इस फैसले को गैरकानूनी करार दे दिया गया है। माना जा रहा है कि टाटा संस के बोर्ड और टाटा ट्रस्ट्स के प्रमुख नोएल टाटा का यह सीधा टकराव अब टाटा समूह में नेतृत्व का संकट पैदा कर सकता है।
विज्ञापन


एन. चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को लेकर उठे विवाद के बीच अब यह जानना अहम है कि आखिर टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन कौन हैं? कंपनी से जुड़ने से पहले का उनका निजी, पारिवारिक और शैक्षिक इतिहास क्या रहा? कैसे एन. चंद्रशेखरन टाटा समूह से जुड़े और फिर कामयाबी की सीढ़िया चढ़ते हुए समूह की नियंत्रक कंपनी टाटा संस के पहले गैर-पारसी प्रमुख तक बन गए? हालिया समय में उन्होंने टाटा संस के चेयरमैन का पद छोड़ने का निर्णय क्यों लिया? आइये जानते हैं...
विज्ञापन

पहले जानें- क्या है एन. चंद्रशेखरन का पारिवारिक इतिहास?

नटराजन चंद्रशेखरन का पारिवारिक इतिहास काफी साधारण पृष्ठभूमि से जुड़ा है।
विज्ञापन
एन. चंद्रशेखरन। - फोटो : अमर उजाला
  • एन. चंद्रशेखरन के सबसे बड़े भाई एन. श्रीनिवासन मुरुगप्पा ग्रुप के ग्रुप फाइनेंस डायरेक्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। उनके दूसरे बड़े भाई एन. गणपति सुब्रमण्यम भी कॉरपोरेट जगत के एक बड़े नाम हैं, जो टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर रहे हैं। उनकी तीनों बहनें इरोड, बेंगलुरु और चेन्नई में रहती हैं।
  • बताया जाता है कि बचपन के दिनों में तीनों भाई गांव में तमिल माध्यम के सरकारी स्कूल जाने के लिए रोजाना तीन किलोमीटर पैदल चलते थे। चेन्नई में अपने शुरुआती दिनों में तीनों भाइयों का रहन-सहन बेहद साधारण था, जहां वे एक ही अपार्टमेंट साझा करते थे और स्कूटर से सफर करते थे।

वैवाहिक जीवन और आगे का परिवार
एन. चंद्रशेखरन का वैवाहिक जीवन बेहद सादगीपूर्ण है। उनकी पत्नी का नाम ललिता चंद्रशेखरन। उनकी शादी को करीब 30 साल से ज्यादा हो चुके हैं। उनका विवाह एक पारंपरिक अरेंज्ड मैरिज था, लेकिन वे पहली ही मुलाकात में एक-दूसरे के करीब आ गए थे। वह मौजूदा समय में अपनी पत्नी के साथ मुंबई में रहते हैं। ललिता ने कुछ समय पहले एक मीडिया समूह से बातचीत में कहा था, "आउटडोर एक्टिविटीज के प्रति दोनों का साझा प्रेम उनके रिश्ते की मुख्य धुरी है।"

ये भी पढ़ें: टाटा में विवाद: ट्रस्ट्स ने एन चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को क्यों बताया 'अवैध'? जानिए अनबन की पूरी कहानी
विज्ञापन

अब जानें- कितना पढ़े-लिखे हैं एन. चंद्रशेखरन?

स्कूली शिक्षा
चंद्रशेखरन ने अपनी शुरुआती पढ़ाई तमिलनाडु के नमक्कल जिले में स्थित अपने पैतृक गांव के एक तमिल माध्यम सरकारी स्कूल से पूरी की। उनके बड़े भाई ने एक मौके पर बताया था कि चंद्रशेखरन शैक्षणिक रूप से कोई बहुत उत्कृष्ट छात्र नहीं थे, लेकिन वे एक बेहद कर्तव्यनिष्ठ, प्रतिबद्ध और अपनी ड्यूटी में पूरी लगन लगाने वाले छात्र थे।

उच्च शिक्षा
  • उन्होंने कोयंबटूर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एप्लाइड साइंसेज में बैचलर की डिग्री हासिल की।
  • साल 1986 में तमिलनाडु के रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज, तिरुचिरापल्ली से मास्टर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशंस (एमसीए) की डिग्री ली।
  • इस संस्थान को बाद में वर्ष 2003 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी), तिरुचिरापल्ली का नया नाम दिया गया था।
एन. चंद्रशेखरन। - फोटो : अमर उजाला
इसके अलावा उन्हें जवाहरलाल नेहरू टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (हैदराबाद), अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, एसआरएम इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, केआईआईटी यूनिवर्सिटी और गीताम यूनिवर्सिटी से भी मानद डिग्रियां मिल चुकी हैं।


चंद्रशेखरन के टाटा समूह से जुड़ने और आगे बढ़ने की कहानी?

1. एक इंटर्न के रूप में शुरुआत (1986)
एन. चंद्रशेखरन ने साल 1986 में कंप्यूटर एप्लीकेशंस (एमसीए) की पढ़ाई पूरी की। हालांकि, वे अपनी पढ़ाई के अंतिम वर्ष में ही टाटा समूह की तकनीकी क्षेत्र की अग्रणी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) से इंटर्न के रूप में जुड़ चुके थे। पढ़ाई खत्म करने के तुरंत बाद साल 1987 में उन्होंने टीसीएस जॉइन भी कर ली। चेन्नई में काम करने के दौरान उनके शुरुआती दिन बेहद साधारण थे; वे अपने बड़े भाई के साथ एक ही फ्लैट साझा करते थे, जो बताते हैं कि नटराजन अक्सर सुबह 7 बजे से पहले दफ्तर के लिए निकल जाते थे और आधी रात के बाद ही घर लौटते थे।

2. टीसीएस में तरक्की और नेतृत्व का सफर (1987-2016)
टीसीएम में लगभग दो दशकों तक कंपनी में अपनी मेहनत के दम पर वे लगातार कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ते चले गए।
एन, चंद्रशेखरन। - फोटो : अमर उजाला
टीसीएस में जब एन. चंद्रशेखरन सीईओ बने तो उस दौर में वे टाटा समूह के सबसे युवा सीईओ में से एक बन गए। उनके कार्यकाल के दौरान टीसीएस काफी तेजी से उभरी और भारत की सबसे कीमती कंपनी का दर्जा हासिल किया। उनकी यही उपलब्धि आगे टाटा संस में चेयरमैन की नियुक्ति के लिए उनके काम आई।

3. टाटा संस के अध्यक्ष के रूप में ऐतिहासिक नियुक्ति (2017)
टाटा संस से साइरस मिस्त्री को हटाए जाने के बाद टाटा समूह में उठापटक का एक दौर आया। इसी दौरान अक्तूबर 2016 में चंद्रशेखरन को टाटा संस के बोर्ड में शामिल किया गया। जनवरी 2017 में उन्हें टाटा संस का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया और उन्होंने 21 फरवरी 2017 को आधिकारिक तौर पर कार्यभार संभाला। इस तरह वे टाटा समूह के 150 से अधिक वर्षों के इतिहास में पहले पेशेवर और गैर-पारसी अध्यक्ष बने। उन्होंने रतन टाटा, जिन्होंने उस वक्त समूह के अंतरिम अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली थी, के साथ टाटा संस को आगे ले जाने का काम किया।

ये भी पढ़ें: टाटा संस: एन चंद्रशेखरन बने रहेंगे टाटा संस के चेयरमैन, बोर्ड ने एक और कार्यकाल को दी मंजूरी

टाटा संस में कैसा रहा अध्यक्ष के तौर पर कार्यकाल?

एन. चंद्रशेखरन का टाटा संस के अध्यक्ष के रूप में लगभग साढ़े नौ साल का कार्यकाल भारत के इस सबसे बड़े औद्योगिक घराने के इतिहास में सबसे अधिक परिवर्तनकारी और रणनीतिक सुधारों वाला माना जाता है। 21 फरवरी 2017 को कार्यभार संभालने के बाद, उन्होंने टाटा समूह को आधुनिक बनाने और उसके बिखरे हुए व्यवसायों को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाई।

1. ऐतिहासिक शुरुआत और 'वन टाटा' दर्शन (2017)

एन. चंद्रशेखरन ने टाटा संस की जिम्मेदारी उस दौर में संभाली, जब समूह अंदरूनी कलह (साइरस मिस्त्री विवाद), कमजोर प्रदर्शन करने वाली संपत्तियों और आधुनिकीकरण के दबाव से जूझ रहा था। समूह के बिखरे हुए व्यवसायों को एकीकृत करने के लिए उन्होंने वन टाटा दर्शन की शुरुआत की, जिसने समूह के भीतर सहयोग, रणनीतिक स्पष्टता और वित्तीय संसाधनों के कुशल आवंटन को मजबूत किया।


2. प्रमुख रणनीतिक विलय, पुनर्गठन और वित्तीय अनुशासन

चंद्रशेखरन ने व्यवसायों के ढांचों को आसान करने और गैर-प्रमुख व नुकसानदेह क्षेत्रों से बाहर निकलने पर खास जोर दिया।
टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (टीसीपीएल) का गठन: टाटा टी के बेवरेजेस व्यवसाय और टाटा केमिकल्स के साल्ट व दालों के पोर्टफोलियो को मिलाकर एक मजबूत एफएमसीजी कंपनी बनाई, जिसका बाजार मूल्य करीब ₹1.14 लाख करोड़ तक पहुंच गया।

एविएशन सेक्टर का एकीकरण: टाटा समूह की ओर से एयर इंडिया को वापस अपने पा लाए जाने के बाद चंद्रशेखरन ने एयरएशिया इंडिया, विस्तारा और एयर इंडिया के संचालन को एकीकृत करने और उन्हें एकल एयरलाइन के तहत मर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की।

कर्ज पर नियंत्रण: उन्होंने समूह की मुख्य कंपनियों में भारी वित्तीय अनुशासन लागू किया। टाटा मोटर्स के लिए भारत में शून्य-शुद्ध-ऋण का लक्ष्य रखा। टाटा स्टील का ऋण, जो 2020 में लगभग ₹1 लाख करोड़ था, उसे घटाकर ₹81,800 करोड़ किया। इंडियन होटल्स ने उनके तहत एक नया मॉडल अपनाया।

गैर-प्रमुख संपत्तियों से निकास: घाटे में चल रहे व्यवसायों से बाहर निकलते हुए उन्होंने टाटा टेलीसर्विसेज के कंज्यूमर मोबिलिटी व्यवसाय को भारती एयरटेल के साथ मिलाया और 2019 में टाटा पेट्रोडाइन में अपनी हिस्सेदारी बेच दी।

3. साहसिक और सामरिक अधिग्रहणों का दौर

  • जेआरडी. टाटा की शुरू की गई एयरलाइन एयर इंडिया का सरकार से अधिग्रहण कर उसे वापस टाटा समूह में शामिल करना उनके कार्यकाल का सबसे भावुक और ऐतिहासिक कदम रहा।
  • उनके कार्यकाल में टाटा स्टील ने भूषण स्टील (2018) और नीलाचल इस्पात निगम (2022) का अधिग्रहण किया। टाटा कंज्यूमर ने कैपिटल फूड्स और ऑर्गेनिक इंडिया को खरीदा।
  • इसके अलावा, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने चेन्नई के पास आईफोन बनाने वाले पेगाट्रॉन प्लांट में 60% हिस्सेदारी खरीदी। ऑनलाइन ग्रॉसरी और हेल्थकेयर क्षेत्र में मजबूत पकड़ बनाने के लिए बिगबास्केट और 1एमजी का अधिग्रहण किया गया।


4. भविष्य के कारोबारों-योजनाओं की नींव

चंद्रशेखरन ने टाटा समूह को पारंपरिक विनिर्माण से निकालकर भविष्य की नई तकनीकों की ओर मोड़ने में भी अहम भूमिका निभाई है। नके कार्यकाल में कंपनी सेमीकंडक्टर से लेकर एयरक्राफ्ट उत्पादन के कामों में भी उतरी है।
  • टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के तहत गुजरात के धोलेरा में 91,000 करोड़ रुपये का भारत का पहला सेमीकंडक्टर फैब प्लांट लगाने की योजना बनाई है। इसमें ताइवान की पीएसएमसी का सहयोग लिया गया है। साथ ही और असम के जागीरोड में 27,000 करोड़ रुपये का असेंबली प्लांट स्थापित करने की नींव रखी गई है।
  • वडोदरा में एयरबस सी295 सैन्य परिवहन विमान के लिए असेंबली लाइन में भी टाटा ने हाथ डाला है। यह स्वदेशी रक्षा विनिर्माण में एक बड़ी क्रांति है। इसके साथ ही टाटा अब एयरक्राफ्ट उत्पादन के क्षेत्र में भी आ चुका है।
  • एग्राटास के तहत गुजरात के साणंद में 13,000 करोड़ के निवेश से बैटरी सेल प्लांट और यूके के समरसेट में एक गीगाफैक्ट्री स्थापित करने की योजना बनाई गई है।
  • पूरे टाटा इकोसिस्टम की डिजिटल सेवाओं को एक मंच पर लाने के लिए चंद्रशेखरन के नेतृत्व में ही टाटा न्यू सुपरएप लॉन्च किया गया। उन्होंने हर टाटा कंपनी को डेटा एआई, मशीन लर्निंग और एनालिटिक्स से जोड़ने की रणनीति अपनाई।
  • इसके अलावा उन्होंने पुणेत छतवाल (इंडियन होटल्स) और कैम्पबेल विल्सन (एयर इंडिया) जैसे वैश्विक स्तर के पेशेवरों को प्रमुख नेतृत्व भूमिकाओं के लिए नियुक्त किया। विल्सन के बाद इथियोपियाई एयरलाइंस के पूर्व प्रमुख तेवोल्डे गेब्रेमरियम कंपनी में लाने में भी उनकी भूमिका बताई जाती है।

पिछले महीने क्यों पद छोड़ने का किया एलान, इसी फैसले पर अब विवाद

टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने इसी साल अगस्त में कहा था कि जब उनका कार्यकाल 20 फरवरी, 2027 को समाप्त होगा तो वे पुनर्नियुक्ति की मांग नहीं करेंगे और उन्होंने बोर्ड से उत्तराधिकारी का फैसला करने को कहा है। टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का कहना है कि पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव को बोर्ड का सर्वसम्मति से समर्थन नहीं मिला; वे दूसरे कार्यकाल के लिए आवेदन नहीं करेंगे।

यह स्थिति उनके निदेशक पद पर पुनर्नियुक्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण सामने आई थी। रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि चंद्रशेखरन स्वयं इस्तीफा देने पर विचार कर रहे थे। वह शेयरधारकों के संभावित विवादास्पद मतदान पर अपना भविष्य नहीं छोड़ना चाहते थे।

चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 तक जारी है। अध्यक्ष पद पर बने रहने के लिए उनका टाटा संस के निदेशक के रूप में पुनर्नियुक्त होना जरूरी था। हालांकि, अब पुनर्नियुक्ति मिलने के बाद बोर्ड के सदस्य और टाटा संस में सबसे बड़े शेयर होल्डर टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए इसे अवैध करार दिया है।
Amar Ujala Ltd published this content on September 17, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 17, 2026 at 16:31 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]