पिछले नौ वर्षों में आईआईटी, आईआईएम और एनआईटी के कैंपस प्लेसमेंट में दोगुनी बढ़ोतरी हुई है। 2016 की तुलना में 2024 में इन तीनों प्रमुख संस्थानों में औसत वेतन 105 फीसदी बढ़ा है। आईआईएम में औसत सालाना वेतन 40 लाख रुपये से अधिक हो गया है। वहीं, आईआईटी और एनआईटी में औसत वेतन करीब दोगुना बढ़ा है।
सभी 14 आईआईएम के पीजी प्रोग्राम में बेटियों की संख्या 26.3 फीसदी से बढ़कर 37.7 फीसदी तक पहुंच गई है। आईआईटी और एनआईटी में बेटियों की संख्या में 20 फीसदी का उछाल है। उच्च शिक्षा में बेटियों की संख्या में लगातार सुधार हो रहा है। आईआईएम के मैनेजमेंट प्रोग्राम में हर तीन छात्रों में एक महिला तो आईआईटी और एनआईटी में इंजीनियरिंग प्रोग्राम में हर पांच छात्रों पर एक बेटी पढ़ाई कर रही है। सरकार के कैंपस प्लेसमेंट रिकॉर्ड के मुताबिक, पिछले 12 वर्षों में आईआईटी, एनआईटी और आईआईएम की संख्या 59 से बढ़कर 76 तक पहुंच गई है।
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एनआईटी में 93 फीसदी छात्रों को कैंपस प्लेसमेंट मिला
आईआईएम में कैंपस प्लेसमेंट रेट 99.8 फीसदी है। वर्ष 2016-17 में 7500 से बढ़कर 2024 में 13700 छात्रों को ऑफर लेटर मिला है। आईआईटी में कैंपस प्लेसमेंट दर 94 फीसदी तक है। यहां साढ़े नौ हजार से बढ़कर प्लेसमेंट 17,500 छात्रों तक पहुंच गया है। जबकि एनआईटी में कैंपस प्लेसमेंट दर 93 फीसदी तक है। यहां 18 हजार से बढ़कर 29 हजार छात्रों को रोजगार मिला है।
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7 आईआईटी, 9 आईआईएम, एक एनआईटी का निर्माण
बीते 9 वर्षों में सात आईआईटी, नौ आईआईएम व एक एनआईटी बने हैं। 2018 में यहां करीब 1.62 लाख पंजीकृत थे, जोकि वर्ष 2024 तक यह आंकड़ा 2.44 लाख तक पहुंच गया। यानी करीब 27% की बढ़ोतरी हुई। आईआईएम में 2018 में 9,298 छात्र थे, जोकि 2024 में करीब 18,243 थे। पीजी प्रोग्राम में महिलाओं की हिस्सेदारी नौ वर्षों में 11% (26.3 से बढ़कर 37.7 फीसदी) तक बढ़ी है।
उच्च शिक्षा में विस्तार के बाद अब गुणवत्ता और परीक्षा सुधार
देश में उच्च शिक्षा के संस्थानों और विद्यार्थियों की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन अब गुणवत्ता, शिक्षकों की उपलब्धता, रोजगार और परीक्षा व्यवस्था में सुधार बड़ी चुनौती है। एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट 'द स्टेट ऑफ हायर एजुकेशन इन इंडिया सिंस 2014' में शिक्षकों के खाली पद भरने, फीस का अंतर घटाने और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को वैधानिक दर्जा देने की सिफारिश की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 तक देश में 1,289 विश्वविद्यालय, 48,246 कॉलेज और 15,221 स्टैंडअलोन उच्च शिक्षण संस्थान थे। कुल संस्थानों की संख्या 64,756 पहुंच गई है। एक दशक में इसमें करीब 32 फीसदी की वृद्धि हुई, जबकि उच्च शिक्षा में विद्यार्थियों की संख्या करीब 4.5 करोड़ हो गई।
34 फीसदी शिक्षकों के पद खाली
केंद्रीय वित्तपोषित उच्च शिक्षण संस्थानों में स्वीकृत 41,351 शिक्षकों के पदों में से 14,042 खाली हैं। रिक्तियों की दर आईआईआईटी में 54 फीसदी, आईआईटी में 39 फीसदी, आईआईएम में 33 फीसदी और एनआईटी में 29 फीसदी है।