06/23/2026 | Press release | Distributed by Public on 06/23/2026 06:53
अल नीनो और कमजोर/अनिश्चित मानसून की संभावित स्थिति के बीच केंद्र सरकार ने खरीफ सीज़न के लिए अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों के कृषि मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों, जिला कलेक्टर्स, आईसीएआर, आईसीएआर-CRIDA और आईएमडी के विशेषज्ञों के साथ आज उच्चस्तरीय वर्चुअल बैठक कर देशभर की स्थिति की समीक्षा की तथा किसानों को भरोसा दिलाया कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर हरसंभव तैयारी कर रही हैं।
कमजोर मानसून की स्थिति और संभावित असर
बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि इस वर्ष मानसून सामान्य से काफी लेट चल रहा है और अब तक लगभग 43 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक 2 जुलाई तक के सप्ताह में भी बारिश कमजोर रहने की संभावना है। इसका सीधा मतलब है कि खरीफ की फसलों पर प्रभाव पड़ सकता है- खासकर उन क्षेत्रों में, जहाँ खेती पूरी तरह मानसून पर निर्भर है।
इसी संभावित जोखिम को देखते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में केंद्र सरकार कई दिनों से पूर्व तैयारी में जुटी हैं। शिवराज सिंह ने कहा कि हम केवल हालात बिगड़ने का इंतज़ार नहीं कर रहे, बल्कि पहले से वैज्ञानिक प्लानिंग और ज़मीनी अमल पर काम कर रहे हैं, ताकि असर कम से कम हो और किसानों की आजीविका सुरक्षित रहे।
315 संभावित प्रभावित जिलों की पहचान
शिवराज सिंह ने बताया कि कृषि मंत्रालय और आईसीएआर ने मिलकर वैज्ञानिक डेटा के आधार पर उन जिलों का आकलन किया, जहाँ कम वर्षा और सिंचाई की कमी का खतरा ज़्यादा है। लगभग 315 जिलों में मानसून कमजोर रहने की संभावना का अनुमान है।
इनमें से 111 जिले उच्च प्राथमिकता वाले हैं, जहाँ सिंचाई का दायरा 25 प्रतिशत से कम है। 76 जिले मध्यम प्राथमिकता वाले हैं, जहाँ 25-50 प्रतिशत तक सिंचाई की व्यवस्था है। 128 जिले निम्न प्राथमिकता वाले हैं, जहाँ डैम और अन्य साधनों से अपेक्षाकृत बेहतर सिंचाई उपलब्ध है। इन जिलों का बड़ा हिस्सा 12 राज्यों- मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में है। इन राज्यों के कृषि मंत्रियों और जिला कलेक्टरों से बैठक में विस्तार से चर्चा की गई और उनसे स्थानीय स्तर पर तैयारी को तेज करने का आग्रह किया गया।
जिला कृषि आकस्मिकता योजनाएँ (DACP): संकट में पहली ढाल
केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने बताया कि आईसीएआर और आईसीएआर-CRIDA ने सभी जिलों के लिए District Agriculture Contingency Plans (DACP) तैयार कर लिए हैं। इन योजनाओं में हर जिले की जलवायु, फसल पैटर्न, जल संसाधन और जोखिम को ध्यान में रखकर स्पष्ट उपाय दिए गए हैं, जैसे: कम वर्षा की स्थिति में वैकल्पिक फसलें कौन-सी हों, फसल बदलाव की रणनीति क्या हो, उपलब्ध पानी का सबसे बेहतर उपयोग कैसे किया जाए, जोखिम कम करके आय के नए विकल्प कैसे बनाए जाएं।
शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों और जिला प्रशासन से स्पष्ट कहा कि DACPs को सिर्फ फाइलों में नहीं, बल्कि जमीन पर लागू करने के लिए तैयार रखा जाए। उन्हें स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तुरंत रिव्यू और अपडेट कर "ऑपरेशनल प्लान" की तरह बनाकर रखा जाए, ताकि जरूरत पड़ते ही बिना देरी के लागू किया जा सके। उन्होंने कहा कि किसी भी आकस्मिक योजना की सफलता उसके ज़मीनी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है, इसलिए जिला प्रशासन इसे अपनी जिम्मेदारी समझकर पूरी ताकत से लागू करे।
जल संरक्षण और सिंचाई प्रबंधन: पानी की हर बूंद कीमती
कमजोर मानसून की आशंका के बीच जल संरक्षण को शीर्ष प्राथमिकता दी गई है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि इस समय "लपानी की एक-एक बूंद हमारे लिए कीमती है और इसी सोच के साथ योजना बनाई जा रही है।
उन्होंने बैठक में निर्देश दिए हैं कि तालाब, जलाशय, नाले, खेत-तालाब, चेक डैम, स्टॉप डैम, बोरी बंधन जैसी संरचनाओं को तुरंत दुरुस्त और मजबूत किया जाए। मनरेगा और आगे चलने वाले ग्रामीण विकास कार्यक्रमों जैसे विकसित भारत जी राम जी में जल संरक्षण और जल संचयन के कामों को प्राथमिकता दी जाए, ताकि रोजगार भी मिले और पानी की स्टोरेज क्षमता भी बढ़े। संवेदनशील जिलों में पीने के पानी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और जरूरत पड़ने पर अधिक पानी वाले क्षेत्रों से कम पानी वाले इलाकों तक सप्लाई की व्यवस्था की जाए। बैठक में बेसिन-वार जलाशयों की स्टोरेज स्थिति भी प्रस्तुत की गई, जहाँ कुछ बेसिनों में सामान्य से बेहतर स्टोरेज है, तो कुछ में 20-60 प्रतिशत तक कमी देखी गई। इसी आधार पर राज्यों को अपने-अपने क्षेत्र में प्राथमिकता तय करने को कहा गया।
फसल रणनीति: कम अवधि, कम पानी और विविधीकर
शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि वर्षा आधारित क्षेत्रों में फसल रणनीति बदलना समय की मांग है। इस दिशा में कम अवधि में पकने वाली और कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसल किस्मों को बढ़ावा दिया जाए। किसान फसल विविधीकरण अपनाएं, ताकि केवल एक फसल पर निर्भरता कम हो और जोखिम कई फसलों में बँट जाए। इंटर-क्रॉपिंग और मिश्रित खेती को प्रोत्साहन मिले, ताकि अगर एक फसल प्रभावित हो, तो दूसरी से आय बनी रहे। उन्होंने दलहन, मोटा अनाज (श्री अन्न) और तिलहन जैसी फसलों पर विशेष जोर दिया, जो सीमित नमी में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। राज्यों से यह भी कहा गया कि अगर सामान्य बुवाई के समय और बारिश में बहुत ज्यादा अंतर आ जाए, तो तुरंत वैकल्पिक फसल विकल्प लागू किए जाएं। केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि हम खेत खाली नहीं रहने देंगे। इतना पानी तो गिरेगा कि कोई न कोई फसल वहाँ हो सके। हमारी तैयारी उसी हिसाब से है।
बीज, उर्वरक और इनपुट की अग्रिम व्यवस्था
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीज और उर्वरक की उपलब्धता पर खास तौर पर विस्तार से जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि खरीफ सीज़न के लिए बीज की पर्याप्त व्यवस्था पहले से कर ली गई है। संभावित प्रभावित जिलों के लिए अतिरिक्त बीज स्टॉक सुरक्षित रखा गया है। उन्होंने बताया कि लगभग 1 प्रतिशत अतिरिक्त बीज विशेष रूप से उन जिलों के लिए रिज़र्व रखा गया है, जहाँ पुनर्बुवाई की जरूरत पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि फर्टिलाइजर मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, यूरिया, DAP, MOP, NPK और SSP सहित सभी प्रमुख उर्वरकों की स्थिति खरीफ के लिए संतोषजनक है। कमजोर मानसून की संभावना वाले जिलों में वितरित करने और समय पर पहुँच सुनिश्चित करने के लिए अलग से निगरानी की जा रही है, ताकि जैसे ही बारिश अनुकूल हो, किसान तुरंत बोनी कर सकें।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने वैज्ञानिक सलाह पर जोर देते हुए कहा कि 75 से 100 मिलीमीटर तक संचयी वर्षा और जमीन में पर्याप्त नमी होने के बाद ही बोनी करें। थोड़ी-सी बारिश में जल्दबाज़ी में बोनी करने से बीज खराब होने और पुनर्बुवाई का खतरा बढ़ जाता है।
किसानों तक वैज्ञानिक सलाह: KVK और डिजिटल प्लेटफॉर्म
किसानों तक समय पर और स्पष्ट सलाह पहुँचाने में कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और कृषि मौसम इकाइयों की भूमिका को सबसे अहम बताते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि देश में 731 KVK हैं, जो किसानों तक तकनीकी सलाह और बीज/फसल प्रबंधन की जानकारी पहुँचाने की मुख्य कड़ी हैं। KVK और एग्रो-मौसम सलाह इकाइयों को निर्देश दिया गया है कि वे जिलों के साथ मिलकर काम करें और अल नीनो के संभावित प्रभाव व कमजोर मानसून की स्थिति में किसानों को लगातार मार्गदर्शन दें। जानकारी पहुँचाने के लिए इन माध्यमों पर जोर दिया गया है: एग्रो-मेट एडवाइजरी, SMS और व्हाट्सऐप मैसेज, कॉल सेंटर, रेडियो और टीवी, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म। लक्ष्य यह रखा गया है कि समय पर जानकारी और सही सलाह हर किसान तक पहुँचे, ताकि वह वैज्ञानिक प्रोटोकॉल के अनुसार बुवाई, फसल बदलाव और इनपुट उपयोग के निर्णय ले सके।
पशुधन और चारा: संभावित संकट के लिए प्लान
कमजोर मानसून से पशुधन के लिए चारे की संभावित समस्या को लेकर मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि मानसून बहुत कमजोर रहा तो चारे का संकट पैदा होना संभव है। इसे देखते हुए जिन जिलों या राज्यों में चारे की पर्याप्त उपलब्धता है, वहाँ से कमी वाले क्षेत्रों के लिए अग्रिम सप्लाई योजना बनाई जा रही है। चारा स्टॉकिंग, वैकल्पिक चारा स्रोत और सप्लाई चेन पहले से प्लान की जा रही है, ताकि पशुपालकों को अचानक दिक्कत न हो। चारे की कालाबाज़ारी और जमाखोरी रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर निगरानी तंत्र मजबूत करेंगी।
किसानों की वित्तीय सुरक्षा: PMFBY, KCC और PM-किसान
शिवराज सिंह चौहान ने साफ कहा कि केवल फसल और पानी की तैयारी काफी नहीं, किसानों की वित्तीय सुरक्षा भी उतनी ही ज़रूरी है। संभावित प्रभावित जिलों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का कवरेज बढ़ाने पर जोर है, ताकि फसल नुकसान की स्थिति में किसानों को समय पर मुआवज़ा मिल सके। जिन किसानों के पास अभी किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) नहीं है, उनके कार्ड बनाने का काम तेज़ करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उनके पास बीज खराब होने, पुनर्बुवाई या अन्य निवेश के समय पर्याप्त संसाधन हों। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-किसान) की हालिया किस्त का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस राशि का उपयोग किसान बीज, खाद और अन्य जरूरी कृषि इनपुट के लिए कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि PMFBY, KCC और PM-किसान ये तीनों योजनाएँ मिलकर अल नीनो जैसी चुनौती के समय किसानों के लिए "संकट-सहारा" बनेंगी।
मल्टी-टियर समन्वय और मॉनिटरिंग सेल
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसी भी आकस्मिक योजना की सफलता जिला स्तर पर क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। इसी सोच के साथ केंद्र, राज्य, जिला, ब्लॉक और गांव स्तर पर अलग-अलग जिम्मेदारियों के साथ एक मल्टी-टियर समन्वय फ्रेमवर्क तैयार किया गया है। जिला कलेक्टर, कृषि विभाग, जल संसाधन, ग्रामीण विकास, पशुपालन, KVK, ATMA और अन्य संस्थाओं के बीच नियमित बैठकों और रियल-टाइम डेटा शेयरिंग की व्यवस्था बनाई जा रही है। दिल्ली में "अल नीनो मॉनिटरिंग सेल" और "Crop Weather Watch Group" गठित किए गए हैं, जो मानसून की प्रगति, फसल बुवाई, फसल स्थिति, इनपुट सप्लाई और बाज़ार संकेतों का लगातार विश्लेषण करेंगे। राज्यों को भी निर्देश दिया गया है कि वे अपने कंट्रोल रूम बनाएं और एक नोडल अधिकारी तय करें, जो केंद्र के साथ समन्वय करे। अधिकांश राज्यों ने अपने नोडल अधिकारी नामित कर दिए हैं। केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने बताया कि हर सप्ताह सचिव स्तर पर समीक्षा हो रही है और वे स्वयं भी मंगलवार को अल नीनो से जुड़ी परिस्थितियों की समीक्षा करते हैं।
उत्पादन लक्ष्य, भंडारण और खाद्य सुरक्षा
2025 खरीफ के लिए रखे गए कई प्रमुख उत्पादन लक्ष्यों- जैसे धान, मक्का और कुल खाद्यान्न को पहले ही हासिल या पार किया जा चुका है। 2026 खरीफ के लिए लगभग 176 मिलियन टन खाद्यान्न का लक्ष्य रखा गया है, जिसे मानसून पूर्वानुमान, MSP, मांग, पिछली प्रवृत्तियों और सरकारी योजनाओं को ध्यान में रखकर तय किया गया है। चावल और गेहूँ दोनों में भंडारण और बफर स्टॉक की स्थिति मजबूत है, इसलिए कमजोर मानसून की आशंका के बावजूद खाद्य सुरक्षा पर कोई तत्काल खतरा नहीं है।
किसानों के लिए संदेश: घबराएँ नहीं, मिलकर तैयारी करें
प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देश के किसानों को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि कमजोर मानसून की संभावित स्थिति के बावजूद हमारी तैयारी ऐसी है कि हम संकट का सामना मिलकर करेंगे। घबराने की नहीं, तैयारी और सामूहिक कार्रवाई की ज़रूरत है। केंद्र और राज्य सरकारें, वैज्ञानिक संस्थान, जिला प्रशासन और किसान- सब मिलकर अगर समन्वित प्रयास करें, तो अल नीनो की चुनौती को भी अवसर में बदला जा सकता है, जहाँ जल संरक्षण, फसल विविधीकरण, तकनीकी सलाह और सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ मिलकर किसानों के लिए सुरक्षा कवच बनें।
उन्होंने भरोसा जताया कि सामूहिक प्रयासों से देश की कृषि, पशुधन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को किसी बड़ी कठिनाई से सुरक्षित रखा जा सकेगा और किसानों की आजीविका को हर संभव तरीके से मजबूत किया जाएगा।
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आरसी/पीयू