03/07/2026 | Press release | Distributed by Public on 03/07/2026 08:36
चेन्नई के आईआईटी मद्रास परिसर में आज नारियल किसानों और हितधारकों के साथ संवाद के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ किया कि बजट2026-27 में घोषित'नारियल प्रमोशन स्कीम' केवल दिल्ली के दफ्तरों में बैठकर नहीं, बल्कि तमिलनाडु से असम तक खेतों में काम कर रहे किसानों के सुझावों के आधार पर बनेगी।
केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल, कर्नाटक, उड़ीसा, असम, महाराष्ट्र, गुजरात, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी जैसे नारियल उत्पादक राज्यों में किसान लंबे समय से उत्पादन, रोग, कीमत और वैल्यू-एडिशन की समस्याएँ उठा रहे थे। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की किसान-हितैषी सोच और वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण की बजट घोषणा के तहत अब इन समस्याओं के समग्र समाधान के लिए'नारियल प्रमोशन स्कीम' लाई जा रही है, जिसका उद्देश्य उत्पादकता बढ़ाना, लागत घटाना और किसानों की आय में स्पष्ट बढ़ोतरी करना है।
केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि इस योजना का मूल सिद्धांत है- किसानों के बीच जाकर, उनकी भाषा में उनकी बात सुनकर नीति बनाना। उन्होंने उल्लेख किया कि इस कंसल्टेशन में तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम सहित कई भाषाओं में किसान बोले, इंटरप्रिटर ने अनुवाद किया और पूरा हॉल एक"लघु भारत" की तरह दिख रहा था, जहाँ विविध भाषाओं के बीच भी किसानों की चिंता और आकांक्षा एक ही थी। श्री चौहान ने इसे अखंड भारत की सजीव झलक बताया।
श्री शिवराज सिंह ने बताया कि किसानों और स्टेकहोल्डर्स से मिले प्रमुख सुझावों में रोग-प्रतिरोधी किस्मों का विकास, क्लस्टर-आधारित खेती, एफपीओ और कोऑपरेटिव मॉडल को मजबूत करना, नारियल तुड़ाई से लेकर गिरी निकालने तक मशीनीकरण को बढ़ावा देना और वाइट-फ्लाई जैसी बीमारियों के लिए केमिकल के बजाय जैविक नियंत्रण की दिशा में बढ़ना शामिल रहा। किसानों ने नारियल-आधारित इंटीग्रेटेड फार्मिंग, कोको, काली मिर्च, डेयरी और मत्स्य-पालन को जोड़कर मल्टी-इनकम मॉडल बनाने और नारियल के हर हिस्से से वैल्यू-एडिशन(तेल, कोयर, कार्बन आदि) बढ़ाने की मांग भी रखी।
उन्होंने बताया कि एक अहम सुझाव सार्वजनिक वितरण प्रणाली(PDS) से जुड़ा था, जिसमें किसानों ने कहा कि यदि अन्य खाद्य तेलों के साथ नारियल तेल को भीPDS में शामिल किया जाए तो नारियल की मांग स्थिर रहेगी और किसानों को बेहतर दाम मिल सकेंगे। श्री चौहान ने बताया कि नारियल विकास बोर्ड पहले ही सभी राज्य सरकारों को पत्र लिखकरPDS में नारियल तेल को स्थान देने का आग्रह कर चुका है और अब राज्यों से प्रतिक्रिया व संवाद की प्रक्रिया चल रही है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों ने तमिलनाडु में प्रधानमंत्री आवास योजना(PMAY) और मनरेगा के क्रियान्वयन पर भी सवाल उठाए। इस पर केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि केंद्र की अपेक्षा स्पष्ट है- प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत मकानों को समय पर मंजूरी और निर्माण मिलना चाहिए ताकि कोई भी गरीब बिना पक्के मकान के न रहे। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु में2024-25 में स्वीकृत होने वाले लगभग दो लाख मकानों के प्रस्ताव लंबित हैं और नई सर्वे प्रक्रिया देशभर में पूरी हो चुकी है, इसलिए तमिलनाडु में भी इसे शीघ्र आगे बढ़ाया जाना चाहिए। सवाल पूछे जाने पर केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के मकान2 साल में2 लाख से ज्यादा मकान हमने दिए कि गरीबों को मकान दो। यहाँ की स्टेट गवर्नमेंट स्वीकृत नहीं कर रही है। गरीबों को घरों से क्यों वंचित कर रहे हो? 2 लाख गरीबों को मकान मिलते तो उनकी जिंदगी बदलने का काम होता।
मनरेगा पर पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि योजना का उद्देश्य ग्रामीण गरीबों के लिए रोज़गार और संपत्ति-निर्माण दोनों है, लेकिन यदि तीन लाख से ज्यादा शिकायतें आ रही हों तो यह जरूरी है कि राज्य सरकार गंभीरता से जांच करें, गड़बड़ी करने वालों पर कार्रवाई करें और धन के अपव्यय को रोके। सोशल ऑडिट से गड़बड़ी का पता लगा है। एक ही काम बार-बार कर दिया गया है, झूठे पेमेंट हो गए हैं, मजदूरों से नहीं मशीनों से काम हो रहा है, ऐसे काम लिए गए हैं, जैसे नहर की सफाई के काम जो बार-बार लेकर पैसा निकाल लिया गया है और यह बहुत बड़ी राशि है, करोड़ों रुपए जिसको हमने कहा कि ये वसूली जाए, ये गड़बड़ हुई है और गड़बड़ करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस तरह की चीजें होती हैं तो फिर मन में तकलीफ स्वाभाविक है। ऐसी शिकायतें कई योजनाओं के अंदर मिली हैं।
श्री शिवराज सिंह ने कहा कि आरोप-प्रत्यारोप से विकास का काम नहीं होता है। फेडरल स्ट्रक्चर में राज्य और केंद्र को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि केंद्र की योजनाएँ ज़मीन पर जितनी ईमानदारी से लागू होंगी, उतनी ही तेजी से गांव-देहात की तस्वीर बदलेगी।
उर्वरक आपूर्ति पर एक सवाल के जवाब में कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों, खासकर युद्ध और भू-राजनीतिक तनावों का असर उर्वरक बाज़ार पर पड़ता है, लेकिन केंद्र सरकार स्थिति पर लगातार नज़र रखे हुए है और वैकल्पिक स्रोतों, दीर्घकालिक कॉन्ट्रैक्ट्स और घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने जैसे सभी विकल्पों पर सक्रिय रूप से सरकार काम कर रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसान हितों की रक्षा के लिए जो भी संभव कदम होंगे, केंद्र उन्हें उठाने में पीछे नहीं रहेगा।
चक्रवात और प्राकृतिक आपदाओं से नारियल बागानों को होने वाले नुकसान पर केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि फसल बीमा योजना और आपदा राहत तंत्र को इस तरह मजबूत किया जा रहा है कि किसान पूरी तरह सुरक्षित महसूस करें। उन्होंने कहा कि'नारियल प्रमोशन स्कीम' के ड्राफ्ट में भी रिस्क-मैनेजमेंट और बीमा कवरेज को एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में शामिल किया जाएगा।
श्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि इस नई योजना का व्यापक लक्ष्य तीन स्तर पर काम करना है- फूड सिक्योरिटी, पोषण सुरक्षा और किसानों की बढ़ी हुई आय। उन्होंने विश्वास जताया कि किसानों, विशेषज्ञों और राज्य सरकारों के साथ मिलकर तैयार की जा रही'नारियल प्रमोशन स्कीम' भारत को नारियल, काजू, कोको और कोयर उत्पादों के क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी बनाएगी और नारियल किसान भाइयों-बहनों के जीवन में"वास्तविक परिवर्तन" लेकर आएगी।
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आरसी/पीयू/डीके