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09/20/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/20/2026 01:25

'साइबर हमलों और अन्य खतरों के लिए तैयार रहें': सेमीकंडक्टर उद्योग को वैष्णव ने किया आगाह, और क्या कहा

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'साइबर हमलों और अन्य खतरों के लिए तैयार रहें': सेमीकंडक्टर उद्योग को वैष्णव ने किया आगाह, और क्या कहा?

Sun, 20 Sep 2026 12:53 PM IST
देवेश त्रिपाठी पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: देवेश त्रिपाठी Updated Sun, 20 Sep 2026 12:53 PM IST
सार

भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र के विस्तार के बीच केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उद्योग को संभावित साइबर हमलों और दूसरी तरह की बाधाओं के प्रति सतर्क रहने को कहा है। उन्होंने कहा कि चिप डिजाइन और निर्माण में भारत की बढ़ती क्षमता वैश्विक स्तर पर कुछ स्थापित हितों के लिए चुनौती बन सकती है।

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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत के बढ़ते सेमीकंडक्टर क्षेत्र को संभावित साइबर हमलों और अन्य तरह की बाधाओं से सतर्क रहने को कहा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक चिप आपूर्ति श्रृंखला में भारत की बढ़ती भूमिका को स्थापित हितों से जुड़े कुछ देश 'खतरे' के तौर पर देख सकते हैं।
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एक साक्षात्कार में वैष्णव ने कहा कि उन्होंने उद्योग को लगातार सतर्क रहने की स्पष्ट सलाह दी है। भारत अब चिप डिजाइन और निर्माण की क्षमता रखने वाले देश के रूप में उभर रहा है और इसे कई स्थापित कारोबारी हितों के लिए चुनौती के तौर पर देखा जा सकता है।
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भारतीय कंपनियों को क्यों किया सतर्क?
केंद्रीय मंत्री ने कहा, "हमें लगातार उन संभावित भू-राजनीतिक जोखिमों पर नजर रखनी होगी, जो इसलिए पैदा होंगे क्योंकि भारत अब ऐसे देश के रूप में उभर रहा है जो चिप डिजाइन और निर्माण कर सकता है। जाहिर तौर पर इसे कई अन्य स्थापित कंपनियां और हित खतरे के तौर पर देखेंगे।"
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दरअसल, कई देश भारत को भरोसेमंद साझेदार के रूप में देख रहे हैं और यहां अपने उत्पादों का विकास के साथ निर्माण करना चाहते हैं। ऐसे में वैष्णव ने कहा कि भारत अपनी स्थिति को हल्के में नहीं ले सकता और उसे लगातार सतर्क रहना होगा।

सेमीकंडक्टर का हब बनने की कोशिश में भारत
उन्होंने कहा, "लेकिन हमें इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। हमें दूसरे खिलाड़ियों से आने वाले जोखिमों और चुनौतियों के प्रति सजग रहना चाहिए। इसलिए मैंने पूरे उद्योग से बहुत स्पष्ट रूप से कहा है कि साइबर हमलों के लिए तैयार रहें, किसी भी अन्य तरह के खतरे के लिए तैयार रहें और उन देशों की ओर से पैदा की जा सकने वाली किसी भी तरह की बाधा के लिए तैयार रहें, जो भारत को सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला में आगे बढ़ते हुए नहीं देखना चाहते।"

मंत्री ने कहा कि इस मुद्दे पर उनकी स्पष्ट बातचीत के बाद उद्योग अब जोखिमों को समझ रहा है और निश्चित तौर पर जरूरी कदम उठाएगा। भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। यह क्षेत्र देश की तकनीकी और विनिर्माण महत्वाकांक्षाओं के लिए लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है। सरकार चिप असेंबली और परीक्षण से आगे बढ़कर चिप डिजाइन, उपकरण, सामग्री और सेमीकंडक्टर निर्माण संयंत्रों तक पूरा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर जोर दे रही है।

सेमीकॉन 2.0 में हुए थे कौन से बड़े समझौते?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जुलाई में सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी दी थी। इसके तहत 1,27,500 करोड़ रुपये के खर्च का प्रावधान किया गया है। योजना में चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर उपकरण और सामग्री, निर्माण संयंत्र, उन्नत पैकेजिंग, अनुसंधान एवं विकास और प्रतिभा विकास को समर्थन दिया जाएगा।

यह कार्यक्रम सेमीकॉन योजना के पहले चरण की प्रगति पर आधारित है। पहले चरण के तहत 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली 12 सेमीकंडक्टर निर्माण परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें माइक्रोन, कायन्स और सीजी सेमी समेत पांच परियोजनाएं व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर चुकी हैं।

सेमीकंडक्टर को लेकर क्या है भारत का उद्देश्य?
भारत की चिप निर्माण पहल का उद्देश्य केवल पैकेजिंग तक सीमित रहने के बजाय देश में व्यापक घरेलू आपूर्ति शृंखला तैयार करना है। इसके साथ ही वैश्विक कंपनियों को भारत में सेमीकंडक्टर तकनीक के निर्माण और विकास के लिए आकर्षित करने की कोशिश की जा रही है। सरकार ने हाल में कहा था कि सेमीकंडक्टर योजना के दूसरे चरण के तहत करीब एक लाख करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धताएं मिल चुकी हैं।

हाल में संपन्न सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम में भी निवेशकों की रुचि प्रमुखता से सामने आई। यह देश की चिप निर्माण क्षमता को प्रदर्शित करने वाला बड़ा आयोजन था। इसमें कई बड़े निवेश और विस्तार प्रस्तावों की घोषणा हुई। इनमें एप्लाइड मैटेरियल्स की 2035 तक भारत में पांच अरब अमेरिकी डॉलर की योजना, लैम रिसर्च का 10,000 करोड़ रुपये का प्रस्तावित निवेश, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का धोलेरा में 363 एकड़ का वेंडर पार्क और फुजीफिल्म का 800 करोड़ रुपये का सेमीकंडक्टर सामग्री संयंत्र शामिल हैं।
Amar Ujala Ltd published this content on September 20, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 20, 2026 at 07:25 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]