Ministry of Heavy Industries of the Republic of India

08/21/2026 | Press release | Distributed by Public on 08/21/2026 09:06

सफाई सहायक से मशीनीकृत स्वच्छता उद्यमी तक: कैसे नमस्ते-एसयूवाई (NAMASTE-SUY) ने नीरज को एक सुरक्षित और आत्मनिर्भर आजीविका बनाने में मदद की

सफाई सहायक से मशीनीकृत स्वच्छता उद्यमी तक: कैसे नमस्ते-एसयूवाई (NAMASTE-SUY) ने नीरज को एक सुरक्षित और आत्मनिर्भर आजीविका बनाने में मदद की
प्रविष्टि तिथि: 21 AUG 2026 5:23PM by PIB Delhi
सुरक्षित और अधिक टिकाऊ आजीविका की तलाश कर रहे सफाई कर्मचारियों के लिए पैसे और मशीनीकृत उपकरणों तक सीमित पहुंच एक बड़ी बाधा हो सकती है। समय पर मिलने वाली वित्तीय सहायता उन्हें जोखिमपूर्ण मैनुअल कार्यों से दूर करने, स्वतंत्र उद्यम स्थापित करने और कार्यस्थल पर सम्मान के साथ जीवनयापन करने में मदद कर सकती है।

मशीनीकरण की बदलावकारी क्षमता को दर्शाते हुए, उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के मुरादनगर स्थित भिकनपुर गांव निवासी 40 वर्षीय नीरज ने नमस्ते योजना के स्वच्छता उद्यमी योजना घटक के तहत मिली सहायता से अपना मशीनीकृत स्वच्छता सेवा उद्यम स्थापित किया।

नीरज अनुसूचित जाति (जाटव) समुदाय से हैं और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने अपने परिवार की मदद करने के लिए कम उम्र में ही काम करना शुरू कर दिया था और धीरे-धीरे सफाई से जुड़े कार्यों में आ गए। कई वर्षों तक उन्होंने स्थानीय सफाई कर्मचारियों और निजी ठेकेदारों के साथ सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के काम में सहायक के रूप में काम किया।

लगातार मेहनत से उन्हें महत्वपूर्ण अनुभव तो मिला, लेकिन यह काम शारीरिक रूप से कठिन, असुरक्षित और कम वेतन वाला बना रहा। वह अक्सर सीमित सुरक्षा इंतजामों के बीच लंबे समय तक काम करते थे और अनियमित रोजगार के अवसरों के लिए ठेकेदारों पर निर्भर रहते थे।

अपनी पत्नी और दो बच्चों वाले परिवार के अकेले कमाने वाले सदस्य होने के कारण नीरज पर घरेलू खर्च, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने का लगातार दबाव था। उनकी लगभग 8,000 रुपये की मासिक आय अपर्याप्त और अनियमित थी। उन्हें अक्सर अपने बेटे की स्कूल फीस समय पर जमा करने में कठिनाई होती थी और बेटी के बीमार होने पर हमेशा उचित इलाज की व्यवस्था नहीं कर पाते थे।

आर्थिक कठिनाइयों के साथ-साथ नीरज को सफाई कार्य से जुड़े व्यावसायिक जोखिम, सामाजिक कलंक और भेदभाव का भी सामना करना पड़ा। सीमित शैक्षणिक और तकनीकी जानकारी, बचत की कमी तथा पूंजी जुटाने में कठिनाई के कारण वह आधुनिक सफाई मशीनरी खरीदकर अपना स्वतंत्र उद्यम स्थापित नहीं कर पा रहे थे।

नीरज की इच्छा थी कि वह अपनी खुद की मशीनीकृत स्वच्छता सेवा शुरू करें, ताकि स्वतंत्र रूप से, सुरक्षित तरीके से और सम्मान के साथ काम कर सकें। वह ठेकेदारों पर अपनी निर्भरता कम करना, मुरादनगर और आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता सेवाओं का विस्तार करना तथा अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और अवसर देना चाहते थे।

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एक महत्वपूर्ण मोड़ 2023 में आया जब नीरज को नमस्ते योजना के स्वच्छता उद्यमी योजना घटक के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। इस सहायता ने उन्हें सक्शन मशीनों से लैस तीन ट्रैक्टर खरीदने और एक मशीनीकृत स्वच्छता सेवा उद्यम स्थापित करने में सक्षम बनाया।

परियोजना की कुल लागत 11,90,400 रुपये थी, जिसमें 7,67,800 रुपये का ऋण और 4,22,600 रुपये की अग्रिम पूंजीगत सब्सिडी शामिल थी। इस सहायता से नीरज को स्वतंत्र रूप से सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई का काम करने के लिए आवश्यक वाहन और सक्शन उपकरण मिल सके।

मशीनीकृत उपकरणों ने उनके काम की सुरक्षा, दक्षता और गरिमा में काफी सुधार किया तथा जोखिमपूर्ण मैनुअल सफाई कार्यों पर निर्भरता कम की। निजी ठेकेदारों के अधीन काम करने के बजाय नीरज अब मुरादनगर और गाजियाबाद के आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता संबंधी कार्यों का स्वतंत्र रूप से संचालन करते हैं।

सहायता मिलने से पहले नीरज सफाई सहायक के रूप में लगभग 8,000 रुपये प्रति माह कमाते थे। अपना मशीनीकृत उद्यम स्थापित करने के बाद उनकी मासिक आय बढ़कर लगभग 30,000 से 40,000 रुपये हो गई। 17,149 रुपये की मासिक ईएमआई और परिचालन खर्चों का भुगतान करने के बाद भी वह स्थिर आय बनाए रखने और अपने परिवार की जरूरतों को अधिक आराम से पूरा करने में सक्षम हैं।

आय में वृद्धि से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। नीरज अब अपने बच्चों की शिक्षा का खर्च समय पर उठा सकते हैं, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करा सकते हैं और कम आर्थिक तनाव के साथ घरेलू जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। इस पहल से एक स्वतंत्र स्वच्छता उद्यमी के रूप में उनका आत्मविश्वास, सामाजिक पहचान और सम्मान भी बढ़ा है।

नीरज का परिवार, जिसने वर्षों की कठिनाइयों के दौरान उनका साथ दिया और उन्हें प्रोत्साहित किया, अब नए भरोसे के साथ भविष्य की ओर देख रहा है। नीरज की योजना आसपास के क्षेत्रों में अपनी मशीनीकृत स्वच्छता सेवाओं का विस्तार करने और अपने परिवार के लिए स्थिर एवं टिकाऊ आजीविका स्थापित करने की है।

नीरज की यात्रा दर्शाती है कि मशीनीकरण और लक्षित वित्तीय सहायता किस तरह सफाई कर्मचारियों को आर्थिक और व्यावसायिक बाधाओं से उबरने में मदद कर सकती है। उनकी प्रगति इस बात का प्रेरक उदाहरण है कि नमस्ते-स्वच्छता उद्यमी योजना सुरक्षा, सम्मान, स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में किस तरह मदद कर रही है।

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पीके / केसी / केजे


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