08/07/2026 | Press release | Distributed by Public on 08/07/2026 03:54
गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर उन शिकायतों में तेज़ी से वृद्धि देखी है जिनमें पेशेवरों और व्यापारियों के व्हाट्सएप खातों को खाता विवरण और नियामक संचार के रूप में दुर्भावनापूर्ण फ़ाइलों के माध्यम से हैक किया जा रहा है। पिछले कुछ दिनों में, दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान सहित कई राज्यों से इसी तरह की घटनाओं की सूचना मिली है। आई4सी ने 22 जून, 2026 को जारी "दुर्भावनापूर्ण विंडोज़ निष्पादन योग्य फ़ाइलों का उपयोग करके व्हाट्सएप खाता हैक करने और उच्च मूल्य की वित्तीय धोखाधड़ी के लिए नियामक और कार्यकारी प्रतिरूपण" शीर्षक से अपनी सलाह के माध्यम से नागरिकों को इस उभरते खतरे के प्रति आगाह किया था।
रिपोर्ट किए गए मामलों में, पीड़ितों को व्हाट्सएप, एसएमएस या ईमेल के ज़रिए एक कंप्रेस्ड (डॉट जिप) फ़ाइल मिलती है, जिसके नाम "स्टेटमेंट ऑफ अकाउंट डॉट जिप " (अक्सर तारीख के साथ, जैसे "0714 स्टेटमेंट ऑफ अकाउंट डॉट जिप ") या "आरबीआई डॉट जिप ", "एमसीए डॉट जिप " जैसे होते हैं। साथ में भेजा गया संदेश इस तरह से तैयार किया जाता है कि वह या तो सामान्य खाता विवरण लगे या भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) या कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय जैसे किसी नियामक की ओर से जारी एक ज़रूरी सूचना लगे, जिसमें बहुत जल्द अनुपालन करने को कहा जाता है। इस आर्काइव में एक दुर्भावनापूर्ण विंडोज एक्ज़ीक्यूटेबल (डॉट इएक्सइ) फ़ाइल और एक डायनेमिक लिंक लाइब्रेरी (डॉट डीएलएल) फ़ाइल होती है। जब इस फ़ाइल को विंडोज डेस्कटॉप या लैपटॉप पर खोला जाता है, तो एक ट्रोजन इंस्टॉल हो जाता है जो डिवाइस को हैक कर लेता है और पीड़ित के व्हाट्सअप वेब सेशन को हाईजैक कर लेता है। कई मामलों में आयकर विभाग के नाम से ईमेल भी भेजे जाते हैं।
इसके बाद, हैक किए गए व्हाट्सएप अकाउंट का दुरुपयोग करके पीड़ित के सभी संपर्कों और समूहों में उसी दुर्भावनापूर्ण फ़ाइल को स्वचालित रूप से प्रसारित किया जाता है, आमतौर पर प्राप्तकर्ता से अनुरोध किया जाता है कि वह फ़ाइल को अपने "सत्यापन के लिए कंपनी के वित्त प्रबंधक" को अग्रेषित करें और इसे कंप्यूटर पर खोलें, जिससे संक्रमण की श्रृंखला कॉर्पोरेट नेटवर्क में फैल जाती है। धोखाधड़ी के उन्नत चरण में, जिसे आमतौर पर "बॉस स्कैम" या सीईओ प्रतिरूपण धोखाधड़ी कहा जाता है, धोखेबाज किसी वरिष्ठ अधिकारी के असली व्हाट्सएप अकाउंट का उपयोग करते हैं - या गुप्त रूप से हैक किए गए डिवाइस में "सीईओ" के नाम से हमलावर द्वारा नियंत्रित नंबर को सहेज लेते हैं - ताकि लेखा और वित्त कर्मचारियों को फर्जी बैंक खातों में तत्काल धनराशि हस्तांतरित करने का निर्देश दिया जा सके।
आई4सी की राष्ट्रीय साइबर अपराध खतरा विश्लेषण इकाई (एनसीटीएयू) द्वारा किए गए तकनीकी विश्लेषण से पता चलता है कि यह अभियान राष्ट्रीय सीमाओं के पार काम करने वाले संगठित नेटवर्क द्वारा चलाया जा रहा है और इसमें उन्नत मैलवेयर का उपयोग किया जा रहा है, जिसका डीएलएल साइडलोडिंग विधि के माध्यम से आसानी से प्रसार किया जा सकता है और किसी को इसकी भनक तक नहीं लग पाती है। संबंधित कानून प्रवर्तन और तकनीकी एजेंसियों के समन्वय से जांच जारी है।
चूंकि यह मैलवेयर केवल विंडोज कंप्यूटरों पर सक्रिय होता है और लुभावने दस्तावेज़ खाता विवरण और नियामक अनुपालन का हवाला देते हैं, इसलिए यह अभियान चार्टर्ड अकाउंटेंट, कंपनी निदेशकों, मुख्य वित्तीय अधिकारियों (सीएफओ) और कंपनियों के वित्त एवं लेखा कर्मियों के लिए विशेष रूप से जोखिम भरा है। सभी कॉर्पोरेट संस्थाओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने कर्मचारियों, विशेष रूप से वित्त टीमों को, तुरंत इस बारे में जागरूक करें और व्हाट्सएप या ईमेल के माध्यम से प्राप्त किसी भी तत्काल निधि हस्तांतरण निर्देश या खाता परिवर्तन अनुरोध पर कार्रवाई करने से पहले सीधे वॉइस कॉल या व्यक्तिगत रूप से पुष्टि करके उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें।
इस खतरे से निपटने के लिए, आई4सी ने निम्नलिखित उपाय किए हैं:
(i) पीड़ित सूचना : शिकायत विश्लेषण और तकनीकी खुफिया जानकारी के माध्यम से पहचाने गए पीड़ितों और संभावित पीड़ितों को आई4सी द्वारा सक्रिय रूप से सूचित किया जा रहा है ताकि समय पर लिंक किए गए उपकरणों से लॉग आउट करना और खातों को सुरक्षित करना जैसी उपचारात्मक कार्रवाई की जा सके।
(ii) खतरे के संकेतों का आदान-प्रदान : मैलवेयर के खतरे के संकेतों और तकनीकी संकेतकों को भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम (सीईआरटी-इन), माइक्रोसॉफ्ट डिफेंडर और क्विक हील, के7 कंप्यूटिंग और नेट प्रोटेक्टर जैसी प्रमुख भारतीय एंटीवायरस कंपनियों के साथ साझा किया गया है, ताकि प्लेटफार्मों और सुरक्षा उत्पादों में दुर्भावनापूर्ण फ़ाइलों का तेजी से पता लगाने, अवरुद्ध करने और हटाने में सक्षम बनाया जा सके।
(iii) नागरिकों की सुरक्षा : इन समन्वित कार्यवाही के माध्यम से अब तक 10,000 से अधिक भारतीयों को सुरक्षित किया गया है। सहयोग पोर्टल के माध्यम से मैलवेयर को नियमित रूप से अवरुद्ध किया जा रहा है।
(iv) एसएमएस हेडर 'I4सीएमएचए-जी' के माध्यम से अलर्ट : आई4सी प्रभावित नागरिकों को एसएमएस हेडर 'आई4सीएमएचए-जी' के माध्यम से अलर्ट भेज रहा है। आई4सी ने पिछले 30 दिनों में एसएमएस हेडर 'I4सीएमएचए-जी' के माध्यम से 58000 से अधिक संभावित पीड़ितों को सूचित किया है। खतरे के संकेत सीईआरटी-इन, माइक्रोसॉफ्ट, भारतीय एंटीवायरस और थ्रेट इंटेलिजेंस कंपनियों के साथ साझा किए गए हैं। नागरिकों से अनुरोध है कि वे एसएमएस हेडर 'आई4सीएमएचए-जी' से प्राप्त संदेशों पर नजर रखें और उनमें दी गई सलाह पर तुरंत अमल करें।
नागरिकों और संगठनों को निम्नलिखित सावधानियों का पालन करने की सलाह दी जाती है:
साइबर धोखाधड़ी और इस प्रकार के संदिग्ध संचार की सूचना तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर दें। विस्तृत सलाह पोर्टल पर उपलब्ध है।
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