Amar Ujala Ltd

09/09/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/08/2026 17:01

भारत में फिर से बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम, कच्चा तेल 100 डॉलर के पार


भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। इसकी बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल है। भारत के लिए कच्चे तेल की औसत आयात लागत यानी इंडियन क्रूड बास्केट सितंबर में 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के मुताबिक सितंबर का औसत करीब 100.75 डॉलर प्रति बैरल रहा है, जबकि 7 सितंबर को इंडियन बास्केट की कीमत करीब 106.26 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी।

कच्चे तेल की कीमतों में इस तेजी के पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताएं प्रमुख कारण हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड भी 100 डॉलर के बेहद करीब कारोबार कर रहा है। 8 सितंबर को ब्रेंट करीब 98.4 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। सऊदी अरब की ऊर्जा सुविधाओं पर हूती हमलों और क्षेत्रीय तनाव ने बाजार में सप्लाई को लेकर आशंकाएं बढ़ा दी हैं।

कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक ऊंची बनी रहती है तो भारत में पेट्रोल और डीजल की लागत पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि पेट्रोल-डीजल के दाम तुरंत बढ़ना तय है। घरेलू ईंधन कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के अलावा रुपये की विनिमय दर, टैक्स, रिफाइनिंग और लॉजिस्टिक्स लागत समेत कई कारकों का असर पड़ता है। फिलहाल तेल कंपनियों ने खुदरा कीमतों में तुरंत बदलाव नहीं किया है।

बाजार के जानकारों का मानना है कि अगर इंडियन क्रूड बास्केट लंबे समय तक 100 डॉलर या उससे ऊपर बनी रहती है, तो घरेलू ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव बढ़ सकता है। कुछ अनुमानों में पेट्रोल और डीजल के दाम में 3 से 5 रुपये प्रति लीटर तक वृद्धि की संभावना जताई जा रही है, लेकिन यह अभी केवल अनुमान है और अंतिम फैसला तेल कंपनियों तथा सरकार की नीतियों पर निर्भर करेगा।

कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर सिर्फ पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहता। महंगा ईंधन परिवहन लागत बढ़ा सकता है, जिससे माल ढुलाई महंगी होने पर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव पड़ सकता है। साथ ही, महंगे तेल से देश का आयात बिल और रुपये पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। ऐसे में आने वाले दिनों में वैश्विक तेल बाजार और पश्चिम एशिया की स्थिति पर भारत की नजर बनी रहेगी। अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर टिकती हैं, तो वाहन चालकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

Amar Ujala Ltd published this content on September 09, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 08, 2026 at 23:01 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]