कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) की परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे छात्रों के आंदोलन को 'सत्याग्रह' बताया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र प्रतियोगी परीक्षा समन्वय समिति ने अपने आंदोलन को कांग्रेस के नए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 'सत्याग्रह' के रूप में दर्ज कराया है।
आंदोलन में क्या-क्या मुद्दे हैं शामिल?
राहुल गांधी ने शनिवार को ही देशभर में चल रहे मुद्दा आधारित आंदोलनों को एक मंच पर लाने के लिए 'सत्याग्रह' डिजिटल प्लेटफॉर्म की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए महाराष्ट्र के छात्रों की समस्याओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पुणे में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के दौरान महाराष्ट्र के छात्रों ने उनके सामने कई समस्याएं रखी थीं। इनमें पेपर लीक, सरकारी भर्तियों में देरी, महंगी शिक्षा, खराब छात्रावास, खाने की गुणवत्ता और डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) में कथित धोखाधड़ी जैसे मुद्दे शामिल थे।
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Satyagraha went live 9 hours ago. Since then, more than 10,000 people and groups have come forward.
That's how many struggles Indians are already fighting - quietly, convinced no one was listening.
We are listening. Every submission will be read. Already, we see stories in the…
- Rahul Gandhi (@RahulGandhi)
October 3, 2026
राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से एमपीएससी में सुधार करने, परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और छात्रों की समस्याएं सुनने की अपील की थी। उनके मुताबिक, इन मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण छात्र अब पुणे में सत्याग्रह कर रहे हैं।
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राहुल ने छात्रों की मांगों का किया जिक्र
उन्होंने छात्रों की दो प्रमुख मांगों का भी जिक्र किया। पहली मांग एमपीएससी अध्यक्ष के इस्तीफे की है। छात्रों का कहना है कि उनकी जगह ईमानदार और योग्य अधिकारी की नियुक्ति की जानी चाहिए। दूसरी मांग राज्य में 70 हजार से अधिक खाली सरकारी पदों को जल्द भरने की है। राहुल गांधी ने कहा कि ये मांगें अनुचित नहीं हैं और इन पर केवल आश्वासन देने के बजाय कार्रवाई की जरूरत है। उन्होंने कहा कि युवा कांग्रेस और एनएसयूआई भी छात्रों के आंदोलन के साथ हैं और जब तक छात्रों की मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनके साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने कहा कि वह महाराष्ट्र सरकार के सामने यह मुद्दा फिर उठाएंगे और समस्या का स्थायी समाधान मांगेंगे।