09/12/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/12/2026 08:06
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देश के नमक से लेकर सॉफ्टवेयर तक बनाने वाले सबसे बड़े कारोबारी घराने, टाटा समूह की मुख्य होल्डिंग कंपनी 'टाटा संस' को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से एक बड़ा झटका लगा है। केंद्रीय बैंक ने टाटा संस की नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (एनबीएफसी) लाइसेंस सरेंडर करने की अर्जी को औपचारिक रूप से खारिज कर दिया है। शनिवार को सामने आए इस घटनाक्रम के बाद अब शेयर बाजार में टाटा संस की लिस्टिंग अनिवार्य और लगभग तय मानी जा रही है।
मामले से जुड़े आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, रिजर्व बैंक की ओर से कंपनी सचिव और मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) को शनिवार को एक पत्र प्राप्त हुआ। इस पत्र में आरबीआई ने स्पष्ट किया कि टाटा समूह सरेंडर के लिए आवश्यक निर्धारित मानदंडों को पूरा नहीं करता है।
आरबीआई द्वारा आवेदन खारिज किए जाने के बाद टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग अब अपरिहार्य हो गई है।
इस फैसले से बाजार के उन कयासों पर विराम लग गया है, जिनमें माना जा रहा था कि टाटा संस एनबीएफसी दर्जा सरेंडर करके सार्वजनिक लिस्टिंग से बच सकती है।
खबर लिखे जाने तक इस पूरे घटनाक्रम पर दोनों पक्षों का आधिकारिक रुख पूरी तरह साफ नहीं हो सका है:
आरबीआई के इस कड़े रुख ने टाटा समूह के सामने एक स्पष्ट विनियामक स्थिति खड़ी कर दी है। एनबीएफसी लाइसेंस सरेंडर करने की योजना विफल होने के बाद, अब अपार-लेयर एनबीएफसी के मानकों का पालन करते हुए टाटा संस को भारतीय पूंजी बाजार में कदम रखना होगा। आने वाले समय में टाटा संस द्वारा लिस्टिंग की प्रक्रिया और समयसीमा को लेकर उठाए जाने वाले कदमों पर निवेशकों और पूरे कॉरपोरेट जगत की नजरें टिकी रहेंगी।