09/17/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/16/2026 17:14
रूस पर शिकंजा कसने वाला बिल अमेरिकी संसद से पास: भारत-चीन पर 100% तक टैरिफ का खतरा; क्या है मामला
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रूस पर शिकंजा कसने वाला बिल अमेरिकी संसद से पास: भारत-चीन पर 100% तक टैरिफ का खतरा; क्या है मामला?
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला। Published by: राकेश कुमार Updated Thu, 17 Sep 2026 04:21 AM IST
सार
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस और ईरान पर नए प्रतिबंधों से जुड़े विधेयक को 262-159 वोटों से पारित कर दिया है और अब यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास है। विधेयक रूस से बड़ी मात्रा में तेल और गैस खरीदने वाले तीसरे देशों पर 100 फीसदी तक शुल्क लगाने का अधिकार देता है, जिससे भारत और चीन पर संभावित असर की चर्चा है। क्या है पूरा मामला? जानिए...
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भारत पर फिर टैरिफ लगाएगा अमेरिका? - फोटो : Amar Ujala Graphics
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने बुधवार को रूस और ईरान पर नए प्रतिबंध लगाने वाले एक बड़े विधेयक को मंजूरी दे दी। 262 सांसदों ने इसके पक्ष में और 159 ने विरोध में मतदान किया। 61 पन्नों वाले इस विधेयक को अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा गया है। यह विधेयक पिछले महीने अमेरिकी सीनेट में भी 86-11 वोटों से पारित हो चुका है। इसका नाम लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 रखा गया है। यह नाम जुलाई में अप्रत्याशित रूप से दिवंगत हुए सीनेटर लिंडसे ग्राहम के सम्मान में रखा गया है, जो रूस के खिलाफ प्रतिबंधों के प्रमुख समर्थकों में रहे थे।
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रूस के खिलाफ इस विधेयक में क्या प्रावधान है?
विधेयक का सबसे अहम निशाना रूस का ऊर्जा क्षेत्र है। इसका मकसद रूस से तेल और गैस खरीदने वाले बड़े देशों पर आर्थिक दबाव बनाकर उसकी ऊर्जा से होने वाली कमाई घटाना है। इस कानून के तहत राष्ट्रपति को रूस से बड़ी मात्रा में तेल और गैस खरीदने वाले तीसरे देशों के सामान पर शुल्क लगाने का अधिकार मिल सकता है। इनमें चीन और भारत जैसे देश भी प्रभावित हो सकते हैं। अमेरिकी प्रतिबंधों का घोषित उद्देश्य रूस की उन आय के स्रोतों को कम करना है, जिनसे यूक्रेन के खिलाफ 2022 से जारी युद्ध को फंड किया जा रहा है।
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सात अहम बातें जो समझना जरूरी है:-
राष्ट्रपति को रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा खरीदने वाले तीसरे देशों पर 100 फीसदी तक शुल्क लगाने का अधिकार मिल सकता है।
सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के अनुसार, यह प्रावधान 2025 के विधेयक में प्रस्तावित 500 फीसदी शुल्क के मुकाबले अधिक सीमित है।
रूस के प्राकृतिक गैस निर्यात का 15 फीसदी से कम आयात करने वाले और रूसी ऊर्जा पर निर्भरता घटाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने वाले देशों के लिए छूट का प्रावधान है।
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अटलांटिक काउंसिल के अनुसार, चीन अगर रूसी तेल खरीदना जारी रखता है तो उसके सामान पर राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर 100 फीसदी तक शुल्क लगाया जा सकता है।
विधेयक में रूसी सरकारी अधिकारियों, अरबपतियों, उनके परिवार के कुछ सदस्यों और रूसी वित्तीय संस्थानों को भी निशाना बनाने का प्रावधान है।
ट्रंप के अनुरोध पर विधेयक में ईरान के हथियार और ऊर्जा क्षेत्रों की फंडिंग कम करने के उद्देश्य से प्रतिबंध लगाने के अधिकार को भी बढ़ाया गया है।
भारत पर अभी 100 फीसदी शुल्क नहीं लगाया गया है। विधेयक राष्ट्रपति को परिस्थितियों के अनुसार ऐसा शुल्क लगाने का अधिकार देता है।
भारत और चीन को लेकर इतनी चर्चा क्यों ?
भारत और चीन रूस से ऊर्जा खरीदने वाले बड़े देशों में शामिल हैं, इसलिए नए अमेरिकी कानून के संभावित असर को लेकर दोनों देशों का नाम सामने आ रहा है। हालांकि, यह अंतर समझना जरूरी है कि प्रतिनिधि सभा से विधेयक पास होने का मतलब यह नहीं है कि भारत पर तुरंत 100 फीसदी शुल्क लग गया है। विधेयक राष्ट्रपति को ऐसी कार्रवाई का अधिकार देता है। इसके अलावा, प्रावधान में उन देशों के लिए छूट की संभावना भी रखी गई है जो रूसी ऊर्जा पर अपनी निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं और जिनका आयात रूस के सालाना प्राकृतिक गैस निर्यात के 15 फीसदी से कम है।
अमेरिकी सांसदों ने विधेयक पर क्या कहा?
प्रतिनिधि सभा के कुछ वरिष्ठ डेमोक्रेट सांसदों ने विधेयक पर आपत्ति जताई। उनकी चिंता थी कि इससे ट्रंप को बहुत व्यापक शुल्क लगाने की शक्तियां मिल सकती हैं और उनका दुरुपयोग हो सकता है। हालांकि, ये आपत्तियां विधेयक को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं रहीं। सदन के स्पीकर माइक जॉनसन ने सोमवार को कहा था, 'मैं हमेशा रूस प्रतिबंध विधेयक के पक्ष में रहा हूं। लेकिन हमें इसके लिए सहमति बनानी पड़ी और मुझे लगता है कि अब हमारे पास वह सहमति है।' यूक्रेन समर्थक अमेरिकी संगठन रजॉम फॉर यूक्रेन के डेनियल बाल्सन ने विधेयक के पारित होने को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह ऐसे समय में हुआ है जब रूसी अधिकारी व्यापक लामबंदी की दिशा में बढ़ रहे हैं और यूक्रेन के महत्वपूर्ण ऊर्जा ढांचे पर बमबारी तेज कर रहे हैं।
Amar Ujala Ltd published this content on September 17, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 16, 2026 at 23:14 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]