Ministry of Heavy Industries of the Republic of India

03/12/2026 | Press release | Distributed by Public on 03/12/2026 11:06

बिहार की गंगोता जाति को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करना

जनजातीय कार्य मंत्रालय

बिहार की गंगोता जाति को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करना

प्रविष्टि तिथि: 12 MAR 2026 4:52PM by PIB Delhi

केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने लोकसभा को सूचित किया कि भारत सरकार ने दिनांक15.06.1999 को (25.06.2002 व 14.09.2022 को पुन: संशोधित) अनुसूचित जनजातियों की सूचियों में समावेशन, से अपवर्जन और अन्य संशोधनों के दावों पर निर्णय लेने के लिए प्रविधियां निर्धारित की हैं। प्रविधियों के अनुसार, केवल उन्हीं प्रस्तावों पर विचार किया जाता है तथा विधान में संशोधन किया जाता है जिन्हें संबंधित राज्य सरकार/संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन द्वारा अनुशंसित किया गया हो और न्यायोचित माना गया हो और भारत के महापंजीयक के कार्यालय (ओआरजीआई) तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) के द्वारा सहमति प्राप्त हो। समस्त कार्रवाई अनुमोदित प्रविधियों के अनुसार की जाती है।

बिहार राज्य सरकार ने अपने दिनांक 04.11.2019 के पत्र के साथ 'गंगोता' समुदाय की नृवंशविज्ञान रिपोर्ट संलग्न करते हुए इस समुदाय को राज्य की अनुसूचित जनजातियों की सूची में शामिल करने का प्रस्ताव भेजा था। प्रविधियों के अनुसार, उक्त प्रस्ताव को आगे की जांच और मामले पर टिप्पणियां देने के लिए ओआरजीआई को भेजा गया था। ओआरजीआई ने प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया। ओआरजीआई की टिप्पणियां फरवरी, 2021 में राज्य सरकार को इस अनुरोध के साथ प्रेषित की गईं कि यदि प्रस्ताव के समर्थन में कोई औचित्य/अतिरिक्त जानकारी उपलब्ध हो तो उसे उपलब्ध कराया जाए।

किसी राज्य या संघ राज्यक्षेत्र की अनुसूचित जनजातियों की सूची में समावेशन के प्रस्तावों में प्रविधियों के अनुसार कुछ प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है। यह एक सतत प्रक्रिया है। राज्य सरकार से प्राप्त प्रस्तावों के साथ एक नृवंशविज्ञान (नृजातीय) रिपोर्ट भीसंलग्न होनी चाहिए। प्रस्तावों की जांच आरजीआई के कार्यालय और फिर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) द्वारा की जाती है। यदि प्रस्ताव ओआरजीआई द्वारा अनुशंसित नहीं होता है, तो राज्य सरकारों को ओआरजीआई द्वारा उठाए गए बिंदुओं के बारे में संसूचित किया जाता है, ताकि अतिरिक्त जानकारी, यदि कोई हो, तो राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत की जा सके। ऐसे कई प्रस्ताव विभिन्न स्तरों पर जांच के अधीन रह सकते हैं।

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